Sunday, October 30, 2016

The Third Goat (तीसरी बकरी)

The Third Goat ...(तीसरी बकरी)
(Somewhat Long But Worth Reading..👍🏽)

रोहित और मोहित बड़े शरारती बच्चे थे, दोनों 5th स्टैण्डर्ड के स्टूडेंट थे और एक साथ ही स्कूल आया-जाया करते थे।


एक दिन जब स्कूल की छुट्टी हो गयी तब मोहित ने रोहित से कहा, “ दोस्त, मेरे दिमाग में एक आईडिया है?”




“बताओ-बताओ…क्या आईडिया है?”, रोहित ने एक्साईटेड होते हुए पूछा।

मोहित- “वो देखो, सामने तीन बक रियां चर रही हैं।”

रोहित- “ तो! इनसे हमे क्या लेना-देना है?”

मोहित-” हम आज सबसे अंत में स्कूल से निकलेंगे और जाने से पहले इन बकरियों को पकड़ कर स्कूल में छोड़ देंगे, कल जब स्कूल खुलेगा तब सभी इन्हें खोजने में अपना समय बर्वाद करेगे और हमें पढाई नहीं करनी पड़ेगी…”

रोहित- “पर इतनी बड़ी बकरियां खोजना कोई कठिन काम थोड़े ही है, कुछ ही समय में ये मिल जायेंगी और फिर सबकुछ नार्मल हो जाएगा….”

मोहित- “हाहाहा…यही तो बात है, वे बकरियां आसानी से नहीं ढूंढ पायेंगे, बस तुम देखते जाओ मैं क्या करता हूँ!”

इसके बाद दोनों दोस्त छुट्टी के बाद भी पढ़ायी के बहाने अपने क्लास में बैठे रहे और जब सभी लोग चले गए तो ये तीनो बकरियों को पकड़ कर क्लास के अन्दर ले आये।

अन्दर लाकर दोनों दोस्तों ने बकरियों की पीठ पर काले रंग का गोला बना दिया। इसके बाद मोहित बोला, “अब मैं इन बकरियों पे नंबर डाल देता हूँ।, और उसने सफेद रंग से नंबर लिखने शुरू किये-

पहली बकरी पे नंबर 1
दूसरी पे नंबर 2
और तीसरी पे नंबर 4

“ये क्या? तुमने तीसरी बकरी पे नंबर 4 क्यों डाल दिया?”, रोहित ने आश्चर्य से पूछा।

मोहित हंसते हुए बोला, “ दोस्त यही तो मेरा आईडिया है, अब कल देखना सभी तीसरी नंबर की बकरी ढूँढने में पूरा दिन निकाल देंगे…और वो कभी मिलेगी ही नहीं…”

अगले दिन दोनों दोस्त समय से कुछ पहले ही स्कूल पहुँच गए।

थोड़ी ही देर में स्कूल के अन्दर बकरियों के होने का शोर मच गया।

कोई चिल्ला रहा था, “ चार बकरियां हैं, पहले, दुसरे और चौथे नंबर की बकरियां तो आसानी से मिल गयीं…बस तीसरे नंबर वाली को ढूँढना बाकी है।”

स्कूल का सारा स्टाफ तीसरे नंबर की बकरी ढूढने में लगा गया…एक-एक क्लास में टीचर गए अच्छे से तालाशी ली। कुछ खोजू वीर स्कूल की

छतों पर भी बकरी ढूंढते देखे गए… कई सीनियर बच्चों को भी इस काम में लगा दिया गया।

तीसरी बकरी ढूँढने का बहुत प्रयास किया गया….पर बकरी तब तो मिलती जब वो होती…बकरी तो थी ही नहीं!

आज सभी परेशान थे पर रोहित और मोहित इतने खुश पहले कभी नहीं हुए थे। आज उन्होंने अपनी चालाकी से एक बकरी अदृश्य कर दी थी।

इस कहानी को पढ़कर चेहरे पे हलकी सी मुस्कान आना स्वाभाविक है। पर इस मुस्कान के साथ-साथ हमें इसमें छिपे सन्देश को भी ज़रूर समझना चाहिए। तीसरी बकरी, *दरअसल वो चीजें हैं जिन्हें खोजने के लिए हम बेचैन हैं पर वो हमें कभी मिलती ही नहीं….क्योंकि वे reality में होती ही नहीं*!

हम ऐसी लाइफ चाहते हैं जो perfect हो ideal हो, जिसमे कोई problem ही ना हो…. it does not exist !

हम ऐसा life-partner चाहते हैं जो हमें पूरी तरह समझे जिसके साथ कभी हमारी अनबन ना हो…..it does not exist!

हम ऐसी job या बिजनेस चाहते हैं, जिसमे हमेशा सबकुछ एकदम smoothly चलता रहे…it does not exist!

क्या ज़रूरी है कि हर वक़्त किसी चीज के लिए परेशान रहा जाए ?

ये भी तो हो सकता है कि हमारी लाइफ में जो कुछ भी है वही हमारे life puzzle को solve करने के लिए पर्याप्त हो….

ये भी तो हो सकता है कि जिस तीसरी चीज (एक आदर्श  one ideal thing) की हम तलाश कर रहे हैं वो हकीकत में हो ही ना….और हम पहले से ही complete हों !

इसलिए अदृश्य आदर्श की तलाश में अपनी life को spoil किये बगैर, वर्तमान में मस्त रहिये । this world is imperfect put your honest effort to make this world a better place to live and be happy....परिणाम शायद बहुत थोड़ा हो पर अपने निरन्तर ईमानदार प्रयासों में खुश रहें और संतुष्ठ रहें और अच्छी सोंच और अच्छे काम बंद न करें...दुनिया ऐसी ही है दोस्तों।

Keep smiling. . . . .😊

Wednesday, October 26, 2016

सच्चा न्याय The True Justice

 The True Justice 

"सच्चा न्याय" 

इंडोनेशिया के जज 'मरज़ुकी' एक बूढ़ी औरत के चोरी के मामले की सुनवाई कर रहे थे, बूढ़ी औरत ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था कि उसने एक बाग़ से कुछ फलों को चुराया था, उसने गिडगडाते हुए जज से प्रार्थना की, " जज साहब, मैं बहुत गरीब हूँ, मेरा बेटा बीमार है, मेरा पोता बहुत भूखा था, इसलिए मज़बूरन चोरी कर बैठी !!

बाग़ का मैनेजर बोला, " जज साहब, इसे कड़ी सज़ा दो ताकि दूसरों को नसीहत मिले !!

जज ने सारे पेपर जांच करने के बाद, नज़र ऊपर उठाई और बूढ़ी औरत को कहा, " मुझे बहुत दुःख है, परन्तु मैं कानून से नहीं हट सकता। इसलिए, तुम्हे क़ानून के तहद सज़ा ज़रूर मिलेगी । क़ानून में तुम्हारे इस अपराध की सज़ा है एक सौ डॉलर और ये जुर्माना ना देने पर ढाई साल की जेल !

बूढ़ी औरत रोने लगी क्योंकि वो जुर्माना नहीं भर सकती थी !!

तब जज साहब ने अपने सर से टोप उतारा और उसमें 11 डॉलर डाल कर बोले, " सच्चे न्याय के लिए, जो लोग इस अदालत में हाज़िर हैं वो हर एक साढ़े पांच डॉलर जुर्माने के तौर पर दें। शहर के नागरिक के रूप में सबका जुर्म है कि क्यों एक मासूम बच्चा भूखा रहा और इस बूढ़ी गरीब औरत को चोरी तक करने पर मज़बूर होना पड़ा ?? कोर्ट के रजिस्ट्रार को हिदायत है कि वो सब उपस्थित लोगों से ये जुर्माना ले लें।

बाग़ के मैनेजर से मिला कर सबसे 350 डॉलर की रकम इकठ्ठी हुई जिससे जुर्माने की रकम काटने के बाद, शेष बचे 250 डॉलर उस बूढ़ी औरत को दे दिए गए !!

शिक्षा :- इस सच्ची घटना से मुझे ये ज्ञान हुआ है, कि न्यायपूर्ण होने के साथ साथ संवेदनशील होना भी महत्वपूर्ण है !

ये कहानी मुझे whatsapp से मिली. जिसे पढ़ कर मन में एक सवाल उठा. क्या हमारे देश की अदालतों में भी कभी ऐसा न्याय होगा ??