आदमी बुलबुला है पानी का.. , अच्छी कहानियां और यादें बनाएं , जीवन क्षणभंगुर है :
एक फिल्मी गाना है , एक जमाने में दूरदर्शन के चित्रहार में खूब आता था, तो खूब सुना है, पर इसके अर्थ पर उस उम्र में बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया, देना चाहिए था..सुन के देखियेगा। गीत है-
आदमी मुसाफिर है ,
आता है , जाता है ,
आते जाते रस्ते में यादें छोड़ जाता है..
ये हिंदी फिल्मी गीत जीवन के गहरे अर्थ बताने वाला दार्शनिकता का भाव लिए हुए है।
जीवन है तो मृत्यु भी है.., फ़िल्म मैट्रिक्स में इसपर एक प्रभावी quote है कि- हर शुरआत का एक अंत है.. , दार्शनिक कहते हैं कि हार जीत और सबकुछ को ही उसकी संपूर्णता में स्वीकारना चाहिए , यानी अच्छे को भी और बुरे को भी। रिश्तों में, लोगों में तथा जीवन में हम सब अक्सर अच्छा अच्छा ही चाहते हैं, केवल सुख और अमृत ही चाहिए, दुख कड़वाहट और विष नहीं..
Netflix पर रिलीज हुई फ़िल्म Good Bye देखिएगा...इसकी अधिकतर समीक्षाओं में एक्टिंग को, निर्देशन को, संवादो को या स्क्रिप्ट को रिव्यू करते है वैसा ही किया सबने..पर
Good Bye फिल्म में रिव्यू तो दरअसल मृत्यु का करना चाहिए था, कि जब कोई अपना इस दुनिया से चला जाता है तो दूसरे कैसे रिएक्ट करते हैं, और अपनों को क्या फील होता है..? दिखाया सब है लेकिन कही न कही बात थोड़ी अधूरी रह गई है ऐसा लगता है..!
इसी विषय पर इससे पहले हाल फिलहाल में दो फिल्मे और आई हैं ' रामप्रसाद की तेरहवीं' और 'पगलैट'..
हिंदुओ में मृत्यु के बाद तेरह दिनों के शोक में क्या क्या घटता है ये इन तीनों फिल्मों में मौजूद है..
मुझे पर्सनली इन तीनों फिल्मों में 'पगलैट' ही जिंदगी और वास्तविकता के ज्यादा करीब लगी.
गुड बाय में सबने अच्छा अभिनय किया है, महानायक अमिताभ बच्चन भी हैं और 'पुष्पा' वाली रश्मिक मंधाना भी हैं फ़िल्म में..मैने कुछ रिव्यूज देखे लेकिन किसी ने सुनील ग्रोवर के किरदार का जिक्र तक नहीं किया जबकि.. मेरे हिसाब से इस फ़िल्म में वह पात्र सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है..
ये किरदार महसूस करने वाला है ज्यादा है, बयान करने वाला कम..
मैं थोड़ी कोशिश करता हूं इसको बयान करने की..क्योंकि मैने इसे शायद ज्यादा गहराई से महसूस किया है..
हरीश भल्ला(अमिताभ बच्चन) की पत्नी का निधन हो चुका है और उनकी अस्थियों को लेकर गंगा में विसर्जित करने पूरा परिवार जा रहा है..जिस पंडित को ये अंतिम क्रिया करनी है वो महसूस करता है कि घर की बेटी तारा इन रीत रिवाजो को लेकर नाखुश है, और इसे ढोंग मानती है..इन सबमें वैज्ञानिक कारण खोजती है..
पंडित बने सुनील ग्रोवर जो कुछ भी इस लड़की को कहते है वो ही इस पूरी फिल्म का सार शिक्षा और मोरल है..!
बल्कि यूं कहे कि फ़िल्म ही नहीं बल्कि पूरे जीवन का सार है..!
पंडित बने सुनील ग्रोवर उन्हे महाभारत की एक कहानी सुना कर बताते हैं कि हम अस्थियां विसर्जित क्यो करते हैं...? ताकि मनुष्य को उसके पापों से, उसके बुरे कर्मो से मुक्ति मिल सके..!
लड़की पंडित जी से असहमति प्रकट करती है और बोलती है कि माफ कीजिए पंडित जी हम अस्थियां इसलिए प्रवाहित करते हैं क्योकि उसमे फॉस्फेट होता है जो हमारी खेती और मिट्टी की उर्वरता के लिए अच्छा होता है.. बाकी आप जो कह रहे हैं ये सब तो अंधविश्वास है..और वो वहां से उठकर चली जाती है...!
पंडित उनकी बात सुनकर गुस्सा नहीं होते..फिर रास्ते में सुनील ग्रोवर इस लड़की को कहते हैं कि..तारा जी आप बिल्कुल सही कह रही हैं, कि सब साइंस है , लेकिन ये साइंस की बात कितनी बोरिंग है न.? ना तो इसने आपकी परेशानियों से आपका ध्यान हटाया, ना ही कोई दर्शन या climax मिला, और ना ही आप इतनी दूर से गंगा में अस्थियां विसर्जन करने इसलिए आई हैं कि गंगा का पोषण हो सके..!
दरअसल ये कहानियां ही हैं जो दुनिया चलाती हैं..! कहानियों से लंबी उमर ना आपकी है, न मनुष्य की , ना डायनासोर की ,
और ना हो इस दुनिया की..!
बस कहानी सुनो और बच्चो को अपना वर्शन सुनाओ..!
लड़की कहती है- पर बहुत सी कहानियां और बाते एकदम बकवास और खयाली लगती हैं। पंडित उसको कहते हैं-हमें दर्शन और कहानियां अक्सर खयाली काल्पनिक लगती हैं, क्यूँकि हम उन्हे समझने की वैसी कोशिश नही करते..!
आप अपनी मां गायत्री जी के बारे में क्या याद करेंगी? उनकी छोटी-छोटी बाते ही ना..? या इसमें भी कोई साइंस है ..?? यही याद करोगी ना कि उन्होंने ये किया, वो किया..?
सुनो, आपकी माँ गायत्रीजी इस धरती पर पहले भी बहुत बार आकर चली गई हैं, पर इस जन्म में तुम्हारे लिए अपनी छोटी छोटी कहानियां छोड़ कर चली गई हैं।
बस यही एक वाक्य पूरे जीवन का सार है..!!
कहानियां हमारी उम्मीद है जीवन का संचार है..जीवन की आस है..
किसी को कयामत का इंतजार है कि अल्लाह आयेगा और हिसाब मांगेगा, किसीको दुबारा इस खूबसूरत दुनिया में बार बार आने की आस है और बीच मे बस RIP (rest in peace) है, क्योंकि वो इस दुनिया को छोड़ना नही चाहता..मोह है, माया है!
महाभारत भी एक उम्मीद है और रामायण भी..
अर्जुन जब अभिमन्यु के मरने का शोक नही मिटा पाता तो कृष्ण बोलते हैं कि तुम इस दुख से बाहर क्यो नहीं निकलते..?
अर्जुन बोले- अगर मैं वहां उस क्षण रणभूमि में मौजूद होता तो अपने पुत्र को बचा लेता..!
कृष्ण बोले फिर..?
...फिर क्या करते..??
फिर क्या तुम्हारा पुत्र सदा के लिए जीवित रहता..?
..अर्जुन नही निकले इस दुख से तो कृष्ण उन्हे स्वर्ग ले गए, कि चलो तुमको तुम्हारे पुत्र से मिलवा देते हैं ,
कृष्ण अर्जुन को स्वर्ग ले गए..
वहां उन्होंने अपने पुत्र अभिमन्यु को देखा, एक बड़े सिंहासन पर बैठे सुंदर वस्त्रों से सुशोभित, अर्जुन देखकर बड़े प्रसन्न हुए और दौड़कर गले मिले.
अभिमन्यु ने पूछा आप कौन हैं..??
अर्जुन अवाक रह गए..बोले- पुत्र मैं तुम्हारा पिता अर्जुन हूं..
अभिमन्यु हंसे और बोले- ना जाने कितने जन्म मैं तुम्हारा पिता रहा हूं, और ना जाने कितने जन्म आप मेरे पिता रहे.
मैं किस किस जन्म को याद करूं..?
हे अर्जुन! जो भी हमारे आपके बीच संबंध है वो सब उसी धरती पर ही है अन्यथा और कहीं नहीं, और वो वहीं समाप्त हो जाते हैं। इसलिए आप दुखी न हों! ये मिलन आगे भी हमारा कहीं ना कहीं होता ही रहेगा ..
ऐसे ही बुद्ध का एक किस्सा है: बुद्ध के पास एक बूढ़ी स्त्री रोते हुए आई, तुम ज्ञानी हो मेरे पुत्र को दुबारा जीवित कर दो , मुझसे ये शोक सहन नही हो रहा,
बुद्ध बोले- ठीक है मां , जाओ पहले उस घर से एक लकड़ी ले आओ जिस घर में कोई मृत्यु को प्राप्त ना हुआ हो.
बूढ़ी स्त्री ममता के वशीभूत खो कर खुश हुई कि एक न एक घर तो मिल ही जायेगा जहां कभी कोई मरा ना हो..सुबह से शाम हो गई पर ऐसा कोई घर नही मिला जहां किसी न किसी का परिजन मृत्यु को प्राप्त ना हुआ हो..!
बुद्ध की बात अब उस स्त्री को समझ आ चुकी थी...
ये कहानियां ही हैं, पर ये जो कहानियां हैं, ये मन की अशांत नदी में ठहराव लाती हैं, इसमें तर्क लाने या साइंस खोजने का कई बार कोई मतलब नहीं बनता..!!.हम मनुष्य हैं, रोबोट नहीं..,
मनुष्य शब्द मन से बना है,
बहुत से धर्मो में मनुष्य को मिट्टी का पुतला कहा गया है, कि मिट्टी में ही इसे मिल जाना है।
हिंदू धर्म में इस मिट्टी के पुतले को मनुष्य कहा गया है , इस मनुष्य शब्द का अर्थ डिक्शनरी में आपको शायद ठीक ठाक नहीं मिलेगा..
ये जो मन है, बस यही जीवन है..यही संसार है..
अगर आप ये पढ़ रहे हैं तो इसका एक मतलब ये है कि- जारी है आपका जीवन, और मृत्यु भी तथा आपकी कहानियां भी...अच्छी कहानियाँ और यादें बनाइये , संसार से हमें एक दिन चले जाना है, और अन्ततः कहानियों को ही रह जाना हैं।... चलो एक बेहतर दुनिया बनाएं! 🌈
🙏🏻
No comments:
Post a Comment