Monday, September 11, 2023

हो जा रंगीला रे!

रंगीला : फ़िल्म रंगीला 1995 को रिलीज़ हुई थी। आमिर खान की जोरदार गंभीर कमबैक वाली फिल्म थी ये रंगीला।  इस फिल्म को 28 साल पूरे हो गए हैं। 

रंगीला ही वो फिल्म थी जिसके बाद आमिर खान ने अवॉर्ड फंक्शन्स में जाना बंद कर दिया था। दरअसल, आमिर को यकीन था कि रंगीला में उनके काम के लिए उन्हें ही फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिलेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उस साल ही शाहरुख की DDLJ (दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे) भी आई थी, रंगीला के लगभग 1 महीने बाद ही।
 फिल्मफेयर के सारे मेजर अवॉर्ड्स डीडीएलजे ले उड़ी और कालजयी cult फ़िल्म का तमगा भी। कहा जाता है कि इसी घटना के बाद शाहरुख के साथ आमिर के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रह गए थे। हालांकि बाद में दोनों के बीच सबकुछ ठीक हो गया।
ये फ़िल्म कई मायनों में एक मील का पत्थर थी.  DUBBED फ़िल्म रोजा (1992), हमसे है मुकाबला (1994) और बॉम्बे (मार्च 1995) के बाद रहमान के गाने हिंदी सिने दर्शकों को सुनने मिले थे जो धूम मचा रहे थे, उस कालखंड में ऑडियो कैसेट्स ही आमजन के बीच सुलभ और लोकप्रिय थे, CD (Compact Disc) कुछ साल बाद आयी थी जिसे CD केसेट कहा जाता था। 
90s का वो दौर अलग ही था, जिन्होंने उस दौर को जीया है उनके दिल दिमाग और यादों में उस दौर का नशा ऐसा छाया है कि अब नशा टूटने के बाद भी उस नशे में जाने को दिल चाहता है। 

थोड़ा है थोड़े की ज़रूरत है जैसी जिंदगी के बावजूद Sine wave का वो  pick है 90s का वो दौर की उस दौर में अपना बचपन लड़कपन स्कूल/कॉलेज जीवन जीने वाले उस मादकता भरे एहसास को मजनू बन के जाने कहाँ कहाँ ढूंढते है। 

उस दौर में नया नया कंप्यूटर युग आया था, अर्थव्यवस्था में बाजार खुलने से थोड़ी तेजी थी, IT में  Y2K की समस्या सामने खड़ी थी,  समस्या हल करने को थोड़ा भी कंप्यूटर हार्डवेयर सॉफ्टवेयर जानने समझने वाले को विदेश में अच्छी खासी नौकरी मिल जा रही थी। 

दूरदर्शन के एकछत्र राज को ज़ी tv , स्टार टीवी , सोनी , ATN आदि चैलेंज कर रहे थे और बच्चों युवाओं को लुभा रहे थे।  शायद बेहतर वर्णन न हो पाए पर समझिए कि एकदम टिपिकल 90s का दौर था।   
फ़िल्म का म्यूज़िक बेहतरीन था , इस फिल्म में आशा भोंसले जी ने दो गीत गाए थे। रंगीला रे व तन्हा तन्हा। और इत्तेफाक देखिए। रिलीज के दिन 8 सितंबर को ही आशा भोंसले जी का भी जन्मदिन पड़ता है। फिल्म सुपरहिट रही थी। लेकिन ये भी एक इत्तेफाक है कि आमिर खान ने इस फिल्म के बाद अभी तक किसी और फिल्म में उर्मिला मातोंडकर व रामगोपाल वर्मा के साथ काम नहीं किया है। वैसे इस फिल्म के लिए जैकी श्रॉफ को फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर इन सपोर्टिंग रोल ज़रूर मिला था। जबकी आशा भोंसले जी को तन्हा तन्हा सॉन्ग के लिए फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड, रहमान को फिल्मफेयर बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्टर अवॉर्ड, मनीष मल्होत्रा को फिल्मफेयर बेस्ट कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर अवॉर्ड व अहमद खान को रंगीला रे सॉन्ग के लिए फिल्मफेयर बेस्ट कोरियोग्राफर अवॉर्ड दिया गया था।
आमिर के साथ साथ इस फ़िल्म से उर्मिला मातोंडकर ने भी जोरदार कम बैक किया था। उर्मिला जो इस फ़िल्म की मुख्य अभिनेत्री थी,  इस फ़िल्म में अपने सेक्सी अवतार से छा गयी थी। जबकि उन्हें 70S की गुलज़ार की बेहतरीन फ़िल्म मासूम के लकड़ी की काठी काठी पे घोड़ा वाले गीत के बाल कलाकार के रूप में  याद किया जाता था। 
1991 की फ़िल्म नरसिम्हा में उर्मिला का चुलबुली अभिनेत्री के रूप में लांच हो चुका था , 1992 की शाहरुख अभिनीत फ़िल्म चमत्कार में भी वो मुख्य अभिनेत्री थी किन्तु रामगोपाल वर्मा की रंगीला से उसका कमबैक सभी मुख्य अभिनेत्रियों को हिला देने वाला था। 
रामगोपाल वर्मा का डायरेक्शन भी एक बड़ी चर्चा का विषय था उन्होंने भी 15-20 साल तक अपनी कला और व्यावसायिक मसाला फिल्मों के बीच अच्छी फिल्में दीं। 
यदि आप 80 या 90 के दशक के अंत में बड़े हुए हैं, तो आप आज की पीढ़ी की तुलना में कहीं अधिक भाग्यशाली हैं।  पूछो क्यों?  क्योंकि आपने स्मार्ट फोन, टैबलेट, फेसबुक, सेल्फी और अन्य चीजों से पहले अपने वास्तविक बचपन का आनंद लिया था...

आज आपके पास सबूत बहुत हैं पर सच्ची तस्वीरें और यादें कम और हल्की हैं जबकि उस 80s 90s के दौर की  तस्वीरें और सुबूत कम हैं किंतु बातें यादें किस्से और भावनाएं कहीं अधिक और दिल content वाली सी हैं....

If you grew up in late 80s or 90s, you are much fortunate than today’s generation. Ask me why? Because you enjoyed your real childhood before smart phones, tablets, facebook, selfies, and other ...

 #Rangeela #RangeelaRe #rangeela1995 #AamirKhan# comeback # 90s , dil se

Sunday, February 19, 2023

AI Artificial Intelligence and we( कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हम):

बहुत सिंपल है AI को समझना, पर उसके पहले थोड़ा जरूरी है कि आई ( i)  याने कि इंटेलिजेंस(बुद्धिमत्ता) को समझना.
 शायद आपने और कई कंप्यूटर के विद्यार्थियों ने अपनी कोर्स बुक में AI को पढ़ा होगा। 
पुस्तकों में AI को परिभाषित करने और समझाने के पहले प्राकृतिक बुद्धिमत्ता को ऐसे समझाया जाता है कि: बुद्धिमत्ता का अर्थ होता है बेहतर निर्णय लेने की क्षमता (decision making ability), वो भी अपने पास मौजूद ज्ञान के भंडार (नॉलेज बेस) के बलबूते से।
अतः  इसी बात से किसी की इंटेलिजेंस डिसाइड की जाती है . अर्थात फार्मूला हुआ ये कि : 
Knowledge Base + Decision making ability = intellingence 
अब इस प्राकृतिक बुद्धिमत्ता को कम्प्यूटर के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) में परिवर्तित करने के लिए लगेगा खूब सारा नॉलेज और उस जानकारी के बूते पर सही निर्णय लेना की क्षमता। 
किसी ने बताया है कि CHATGPT जो है वो 40TB के लगभग KB से समृद्ध है जो की एक आम इंसान के जानकारी के टक्कर का है। डिसीजन मेकिंग के लिए भी मिलियन बिलियन IF THEN BUT जैसे डिसीजन मेकिंग लूप्स और लॉजिक टूल्स होंगे ही। 
 तो पिछले 2-3दशकों में इस पर अच्छा खासा काम हुआ है और प्रगति हुई है। इसके फलस्वरूप ही एआई अब काफी समृद्ध हो चुका है एवं निरंतर प्रगति की ओर है किंतु फिर भी फिलहाल इसकी अपनी सीमाएं हैं, और मन मस्तिष्क आवेगों और भावनाओं से संचलित ह्यूमन ब्रेन तो निस्संदेह किसी भी कृत्रिमता से बने मशीन से अधिक मानवीय है ही। 

अतः कई मामलों में हम इस AI से फ़िलहाल तो आगे ही हैं किन्तु ये भी नहीं भूलना चाहिये कि कई मामलों में वह भी हम से आगे हैं। 
रचनात्मक कार्य और AI : 
कला और साहित्य जैसे रचनात्मक कामों में फिलहाल ह्यूमन ही AI से आगे हैं, यद्यपि AI भी अच्छी जुगलबंदी कर सकता है, कहानी लिख सकता, कहानी में बेहतर ट्विस्ट बना सकता है, कविता लिख सकता है, ड्रॉइंग और एनीमेशन बना सकता है, तथा कंप्यूटर की कोडिंग आदि में तो सामान्य इंसानों से  कहीं आगे है। पर फिलहाल शब्दों के खेल में ऐसा irony नहीं कर सकता।  कैसा? ऐसा👇 

 BBC :- हम पर छापा क्यों ?

सरकार:- हम पर छापा क्यों?
                  
...जो भी हो,  मानव की सहज i और मानवनिर्मित AI के बीच का यह संघर्ष रोचक है और दुनिया को बदल देने की क्षमता रखता है।

माँ सुनाओ मुझे वो कहानी...

माँ सुनाओ मुझे वो कहानी,
जिसमें राजा ना हो ना हो रानी..

जो हमारी तुम्हारी कथा हो,
जो सभी के ह्रदय की व्यथा हो,
गंध जिसमें भरी हो धरा की,
बात जिसमें ना हो अप्सरा की,
हो ना परियाँ जहाँ आसमानी...

जो किसी भी ह्रदय को हिला दे,
आदमी आदमी को मिला दे,
आग कुछ इस तरह की लगा दे,
आग में भी माधुरी मिला दे,
जो सुने हो चले पानी पानी..

वो कहानी जो हँसना सिखा दे,
पेट की भूख को जो भुला दे,
जिसमें सच की भरी चाँदनी हो,
जिसमें उम्मीद की रोशनी हो,
जिसमें ना हो कहानी पुरानी,
माँ सुनाओ मुझे वो कहानी....


-lyrics by नन्दलाल पाठक, Singer: Siza Roy, 
Album: Cry for CRY, Year-1991, Composer artist: Jagjit Singh , label : HMV SAREGAMA 
किस्से ,कहानी, और बातें बहुत सी हैं, हर बात पर एक बात है। पर क्या किस्से , कहानियों , मिथकों चमत्कारों से विकट समस्याओं का समाधान है? ये एक बड़ा यक्ष प्रश्न है। ऐसे ही जब कहीं कभी कोई भूखा बच्चा भूख की आग से लड़ता , हंसी और खुशी को तरसता बच्चा , क्या सोचता होगा इस बात को इस कवि नंदलाल पाठक ने सोंचा और लिखा.. । न जाने कैसे किस तरह से ये गीत जाने माने मशहूर ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह तक पहुंचा होगा और उन्हें इस गीत ने छुआ होगा। फिर उनके अलकेमिस्ट वाले दिल, दिमाग, हुनर और हाथों ने इसे जब गोद ले लिया तो फिर ये गीत शिज़ा रॉय की आवाज में जो बनकर आया, फिर तो न जाने कितनों के दिल को रुला कर, करोड़ों की आंखों से नायाब आँसू बनके बहा होगा पता नहीं...
 
ये गीत CRY FOR CRY नाम से HMV सारेगामा के एक ग़ज़ल अल्बम में साल 1991 आया था। सारे गीत गहरे दुख लिए हुए थे। सुना था कि इसकी कमाई बच्चों के लिए काम करने वाली NGO संस्था CRY (Child Rights and You) को दिया  जाना पहले ही तय किया गया था, इसलिए ही इस एल्बम का नाम ये रखा गया। 


ये है इस नायाब गीत ग़ज़ल की youtube लिंक -  https://youtu.be/ZwF73004LmM

और ये जगजीत सिंह के गाये एक live version का link :  

वैसे बहुतों ने इसे अपने अपने ढंग, ढब और समझ से गाया है..बेहद पसंद में से एक रहा है ये..हमेशा से।

Friday, January 6, 2023

क्यूँ दुनिया का नारा- जमे रहो? क्यों दुनिया का इशारा जमे रहो... तारे जमीन पर.. फ़िल्म साहित्य विचार हम और विरोधाभास

Every Child is special!  साल 2007 की हिंदी फ़िल्म तारे जमीन पर को बहुत सी बातों के लिए याद रखा जा सकता है, उसके गीतों के लिए भी। 

एक ये गीत भी है। -   

दुनिया का नारा- जमे रहो!
मंजिल का इशारा- जमे रहो!
दुनिया का नारा - जमे रहो!
मंजिल का इशारा- जमे रहो!
इस गीत के पहले भाग में एक आदर्श एवं अनुशासित जीवन की झलक दिखाई गई है तो वहीं गीत के दूसरे भाग में एक खिलंदड़ जिज्ञासु और एक विपरीत अनादर्श जीवन की झलक दिखलायी गयी है। दोनो ही एक दूसरे के पूरक एवं विरोधाभाषी है। a big contradiction!!! 

गीत के बोल हैं- 
कस के जूता, कस के बेल्ट,
खोंस के अन्दर अपनी शर्ट,
मंजिल को चली सवारी,
कंधो पे ज़िम्मेदारी..

हाथ में फाइल मन में दम
मीलों मील चलेंगे हम
हर मुश्किल से टकरायेंगे
टस से मस ना होंगे हम!

दुनिया का नारा- जमे रहो!
मंजिल का इशारा- जमे रहो!
दुनिया का नारा - जमे रहो!
मंजिल का इशारा- जमे रहो!

ये सोते भी हैं Attention
आगे रहने की है Tension
मेहनत इनको प्यारी है
एकदम आज्ञाकारी हैं (आज्ञाकारी हैं)

ये ऑमलेट पर ही जीते हैं, 
ये टोनिक सारे पीते हैं,
वक़्त पे सोते, वक़्त पे खाते,
तान के सीना बढ़ते जाते..

दुनिया का नारा- जमे रहो!
मंजिल का इशारा- जमे रहो!
दुनिया का नारा- जमे रहो,
मंजिल का इशारा-जमे रहो!
-----
यहाँ अलग अंदाज़ है,
जैसे छिड़ता कोई साज़ है,
हर काम को टाला करते हैं,
ये सपने पाला करते हैं!

ये हरदम सोचा करते हैं,
ये खुद से पुछा करते हैं-
क्यूँ दुनिया का नारा - जमे रहो?
क्यूँ मंजिल का इशारा - जमे रहो?
क्यूँ दुनिया का नारा जमे रहो?
क्यूँ मंजिल का इशारा जमे रहो?

ये वक़्त के कभी गुलाम नहीं,
इन्हें किसी बात का ध्यान नहीं,
तितली से मिलने जाते हैं,
ये पेड़ों से बतियाते हैं!

ये हवा बटोरा करते हैं,
बारिश की बूँदें पढ़ते हैं,
और आसमान के कैनवास पे,
ये कलाकारियाँ करते हैं..

क्यूँ दुनिया का नारा- जमे रहो?
क्यूँ मंजिल का इशारा जमे रहो?
क्यूँ दुनिया का नारा जमे रहो?
क्यूँ मंजिल का इशारा जमे रहो..


ध्यान दीजियेगा की आदर्श अनुशासित वाला पार्ट तेज गति और शोर से भरा हुआ है किंतु रचनात्मक और अनादर्श को दिखाने वाला भाग एकदम से स्लो टेम्पो के साथ शान्ति ले आता है और फिर वापस शोर की तरफ जाता है। गीत में कवि कहीं भी जजमेंटल नहीं हुआ है कि- ये अच्छा है और ये बुरा! पर क्या समाज में हम व्यवहारिक रूप से ऐसे हैं? सोंचने वाली बात है न??? 
अच्छे सवाल , अच्छे जवाब तक पहुंचाते हैं और एक बेहतर दुनिया बनाते हैं...और यह भी याद रखें कि- हर बच्चा खास है!

गाने के लिंक्स और डिटेल्स नीचे हैं, सुनियेगा..
Song Name: Jame Raho
Album: Taare Zameen Par,
Year: 2007 
Singer(s): Vishal Dadlani, shankar mahadevan
Starcast: Aamir Khan, Tanay Chheda, Darsheel Safary, Tisca Chopra
Composer: Shankar-Ehsaan-Loy, Lyrics: Prasoon Joshi
YouTube Link:  https://youtu.be/VofN1x93TG0