Sunday, February 19, 2023

AI Artificial Intelligence and we( कृत्रिम बुद्धिमत्ता और हम):

बहुत सिंपल है AI को समझना, पर उसके पहले थोड़ा जरूरी है कि आई ( i)  याने कि इंटेलिजेंस(बुद्धिमत्ता) को समझना.
 शायद आपने और कई कंप्यूटर के विद्यार्थियों ने अपनी कोर्स बुक में AI को पढ़ा होगा। 
पुस्तकों में AI को परिभाषित करने और समझाने के पहले प्राकृतिक बुद्धिमत्ता को ऐसे समझाया जाता है कि: बुद्धिमत्ता का अर्थ होता है बेहतर निर्णय लेने की क्षमता (decision making ability), वो भी अपने पास मौजूद ज्ञान के भंडार (नॉलेज बेस) के बलबूते से।
अतः  इसी बात से किसी की इंटेलिजेंस डिसाइड की जाती है . अर्थात फार्मूला हुआ ये कि : 
Knowledge Base + Decision making ability = intellingence 
अब इस प्राकृतिक बुद्धिमत्ता को कम्प्यूटर के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) में परिवर्तित करने के लिए लगेगा खूब सारा नॉलेज और उस जानकारी के बूते पर सही निर्णय लेना की क्षमता। 
किसी ने बताया है कि CHATGPT जो है वो 40TB के लगभग KB से समृद्ध है जो की एक आम इंसान के जानकारी के टक्कर का है। डिसीजन मेकिंग के लिए भी मिलियन बिलियन IF THEN BUT जैसे डिसीजन मेकिंग लूप्स और लॉजिक टूल्स होंगे ही। 
 तो पिछले 2-3दशकों में इस पर अच्छा खासा काम हुआ है और प्रगति हुई है। इसके फलस्वरूप ही एआई अब काफी समृद्ध हो चुका है एवं निरंतर प्रगति की ओर है किंतु फिर भी फिलहाल इसकी अपनी सीमाएं हैं, और मन मस्तिष्क आवेगों और भावनाओं से संचलित ह्यूमन ब्रेन तो निस्संदेह किसी भी कृत्रिमता से बने मशीन से अधिक मानवीय है ही। 

अतः कई मामलों में हम इस AI से फ़िलहाल तो आगे ही हैं किन्तु ये भी नहीं भूलना चाहिये कि कई मामलों में वह भी हम से आगे हैं। 
रचनात्मक कार्य और AI : 
कला और साहित्य जैसे रचनात्मक कामों में फिलहाल ह्यूमन ही AI से आगे हैं, यद्यपि AI भी अच्छी जुगलबंदी कर सकता है, कहानी लिख सकता, कहानी में बेहतर ट्विस्ट बना सकता है, कविता लिख सकता है, ड्रॉइंग और एनीमेशन बना सकता है, तथा कंप्यूटर की कोडिंग आदि में तो सामान्य इंसानों से  कहीं आगे है। पर फिलहाल शब्दों के खेल में ऐसा irony नहीं कर सकता।  कैसा? ऐसा👇 

 BBC :- हम पर छापा क्यों ?

सरकार:- हम पर छापा क्यों?
                  
...जो भी हो,  मानव की सहज i और मानवनिर्मित AI के बीच का यह संघर्ष रोचक है और दुनिया को बदल देने की क्षमता रखता है।

माँ सुनाओ मुझे वो कहानी...

माँ सुनाओ मुझे वो कहानी,
जिसमें राजा ना हो ना हो रानी..

जो हमारी तुम्हारी कथा हो,
जो सभी के ह्रदय की व्यथा हो,
गंध जिसमें भरी हो धरा की,
बात जिसमें ना हो अप्सरा की,
हो ना परियाँ जहाँ आसमानी...

जो किसी भी ह्रदय को हिला दे,
आदमी आदमी को मिला दे,
आग कुछ इस तरह की लगा दे,
आग में भी माधुरी मिला दे,
जो सुने हो चले पानी पानी..

वो कहानी जो हँसना सिखा दे,
पेट की भूख को जो भुला दे,
जिसमें सच की भरी चाँदनी हो,
जिसमें उम्मीद की रोशनी हो,
जिसमें ना हो कहानी पुरानी,
माँ सुनाओ मुझे वो कहानी....


-lyrics by नन्दलाल पाठक, Singer: Siza Roy, 
Album: Cry for CRY, Year-1991, Composer artist: Jagjit Singh , label : HMV SAREGAMA 
किस्से ,कहानी, और बातें बहुत सी हैं, हर बात पर एक बात है। पर क्या किस्से , कहानियों , मिथकों चमत्कारों से विकट समस्याओं का समाधान है? ये एक बड़ा यक्ष प्रश्न है। ऐसे ही जब कहीं कभी कोई भूखा बच्चा भूख की आग से लड़ता , हंसी और खुशी को तरसता बच्चा , क्या सोचता होगा इस बात को इस कवि नंदलाल पाठक ने सोंचा और लिखा.. । न जाने कैसे किस तरह से ये गीत जाने माने मशहूर ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह तक पहुंचा होगा और उन्हें इस गीत ने छुआ होगा। फिर उनके अलकेमिस्ट वाले दिल, दिमाग, हुनर और हाथों ने इसे जब गोद ले लिया तो फिर ये गीत शिज़ा रॉय की आवाज में जो बनकर आया, फिर तो न जाने कितनों के दिल को रुला कर, करोड़ों की आंखों से नायाब आँसू बनके बहा होगा पता नहीं...
 
ये गीत CRY FOR CRY नाम से HMV सारेगामा के एक ग़ज़ल अल्बम में साल 1991 आया था। सारे गीत गहरे दुख लिए हुए थे। सुना था कि इसकी कमाई बच्चों के लिए काम करने वाली NGO संस्था CRY (Child Rights and You) को दिया  जाना पहले ही तय किया गया था, इसलिए ही इस एल्बम का नाम ये रखा गया। 


ये है इस नायाब गीत ग़ज़ल की youtube लिंक -  https://youtu.be/ZwF73004LmM

और ये जगजीत सिंह के गाये एक live version का link :  

वैसे बहुतों ने इसे अपने अपने ढंग, ढब और समझ से गाया है..बेहद पसंद में से एक रहा है ये..हमेशा से।