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Sunday, January 3, 2021

नया साल : इक बिराहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है...हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है....

मूलरूप से ये मिर्ज़ा ग़ालिब की बहुत ही फेमस गज़ल है, और जगजीत सिंह की आवाज़ में 1992 में मिराज नाम के एलबम में होने के बाद और भी ज्यादा मशहूर हुई है किन्तु मिराज़ में जगजीत सिंह की गायी गज़ल सबीर दत्त की लिखी हुई है जिसमें केवल अंतिम लाइन ग़ालिब की लिखी हुई है। और जगजीत को पसंद करने वालों को यही ज्यादा पसंद है। :

ग़ालिब की लाइनें कुछ यूं थी:

देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ ,
इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है।
.... ग़ालिब

उश्शाक़ : प्रेमी , lovers
बुतों : idols,  beloved ones
फ़ैज़ : success, grace, फ़ायदा, कृपा
बरहमन : Brahmin,  Hindu Priest, fortune teller

Meaning : Let's see what favors Beloved gives to me, As Fortune Teller predict this year is very good for my successes

*हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन,*
*दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है..*

और सबीर दत्त की लिखी तथा जगजीत सिंह की मिराज एलबम जो 1996 में आयी थी वो घज़ल कुछ यूं है: 

इक बरहामन ने कहा है के ये साल अच्छा है,
ज़ुल्म की रात बहुत जल्द ढलेगी अब तो,
आग चुल्हों में हर इक रोज़ जलेगी अब तो,

भूख के मारे कोई बच्चा नहीं रोएगा,
चैन की नींद हर इक शख्स़ यहाँ सोएगा,

आँधी नफ़रत की चलेगी न कहीं अब के बरस,
प्यार की फ़स्ल उगाएगी ज़मीं अब के बरस,

है यकीं अब न कोई शोर-शराबा होगा,
ज़ुल्म होगा न कहीं ख़ून-ख़राबा होगा,

ओस और धूप के सदमें न सहेगा कोई,
अब मेरे देस में बेघर न रहेगा कोई,

नए वादों का जो डाला है वो जाल अच्छा है,
रहनुमाओं ने कहा है के ये साल अच्छा है,

दिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है...

-सबीर दत्त

ये youtube का वीडियो लिंक है, सुनिएगा आशा है अच्छा लगेगा  https://youtu.be/w7ZusnFG1bg