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Sunday, June 7, 2020

त्रिवेणी ghazal

त्रिवेणी : ये दो लाइन के शेर न होकर तीन लाइन की त्रिवेणियाँ हैं। जिसका अविष्कार गुलज़ार साब ने किया है और जगजीत जी ने बेहतरीन compose किया है। त्रिवेणी की खासियत ये है कि दो लाइन के शेर अपने आप में पूर्ण हैं, किंतु तीसरी लाइन आकर , पहले दो लाइनों के अर्थों को लगभग बदल ही देती है । पहले दो लाइनों के विचार और मायने को तीसरी लाइन आकर अर्थों की एक ऐसी नयी खिड़की खोल देती है और एक अलग ही रोशनी देती है कि फिर आप उन तीन लाइन के शेर को एक वृहत कैनवस के साथ ,  नए dimension में सोंचते हैं और पूरे विस्तृत विचार को समझ पाते हैं , कि ओह ये बात कहना चाह रहा था शायर!) 


ज़िन्दगी क्या है जानने के लिए,
ज़िंदा रहना बहुत जरुरी है,
आज तक कोई भी रहा तो नहीं!

सारी वादी उदास बैठी है,
मौसम-ए गुल ने ख़ुदकुशी कर ली ,
किसने बारूद बोया बाग़ों में !

आओ हम सब पहन लें आइना ,
सारे देखेंगे अपना ही चेहरा ,
सबको सारे हसीं लगेंगे यहाँ !

है नहीं जो दिखाई देता है ,
आईने पर छपा हुआ चेहरा ,
तर्जुमा आइने का ठीक नहीं !

हमको ग़ालिब ने ये दुआ दी थी ,
तुम सलामत रहो हज़ार बरस ,
ये बरस तो फ़क़त दिनों में गया !

लब तेरे मीर ने भी देखे है ,
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है ,
बात सुनते तो ग़ालिब हो जाते !

ऐसे बिखरे हैं रात दिन जैसे ,
मोतियों वाला हार टूट गया ,
तुमने मुझको पिरोके रखा था !

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Reference: https://youtu.be/QE4nIiuMSS4