Thursday, November 26, 2020

Maradona माराडोना: अद्भुत, बदनाम, असाधारण, जीनियस और ग़ुस्सैल. डिएगो अरमांडो माराडोना. फ़ुटबॉल के एक ऐसे महानायक जिनमें कई ऐब भी थे.

माराडोना : अद्भुत, बदनाम, असाधारण, जीनियस और ग़ुस्सैल. डिएगो अरमांडो माराडोना. फ़ुटबॉल के एक ऐसे महानायक जिनमें कई ऐब भी थे. जानिए 'Hand of God ' से 'Goal of the Century' तक, जीनियस और बदनाम डिएगो माराडोना की रोचक कहानी: 

फ़ुटबॉल के सबसे करिश्माई खिलाड़ियों में से एक, अर्जेंटीना के माराडोना के पास प्रतिभा, शोखी, नज़र और रफ़्तार का ऐसा भंडार था, जिससे वो अपने प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे.उन्होंने अपने विवादित कदमों की वजह से अपने फ़ैंस को ग़ुस्सा भी दिलाया और नाराज़ भी किया.माराडोना ने अपने विवादित 'हैंड ऑफ़ गॉड' गोल से सबको हैरत में डाला और मैदान के बाहर ड्रग्स और नशाखोरी जैसे मामलों में भी पड़े.

छोटे कद के माराडोना: फ़ुटबॉल के जीनियस :
माराडोना का जन्म आज से 60 साल पहले अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के झुग्गी-झोपड़ियों वाले एक कस्बे में हुआ था.
अपनी ग़रीबी से लड़ते हुए वो युवावस्था आने तक फ़ुटबॉल के सुपरस्टार बन चुके थे. कुछ लोग तो उन्हें ब्राज़ील के महान फ़ुटबॉलर पेले से भी शानदार खिलाड़ी मानते हैं.

Football Career : माराडोना ने 491 मैचों में कुल 259 गोल दागे थे. इतना ही नहीं, एक सर्वेक्षण में उन्होंने पेले को पीछे छोड़ '20वीं सदी के सबसे महान फ़ुटबॉलर' होने का गौरव अपने नाम कर लिया था.
हालाँकि इसके बाद फ़ीफ़ा ने वोटिंग के नियम बदल दिए थे और दोनों खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया था.
माराडोना विलक्षण प्रतिभा के धनी थे, यह उनके बचपन से ही नज़र आने लगा था. उन्होंने महज़ 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल जगत में क़दम रख दिया था.
कद से छोटे और शरीर से मोटे, सिर्फ़ पाँच फ़ीट पाँच इंच लंबाई वाले माराडोना कोई सामान्य खिलाड़ी नहीं थे.
माराडोना के पास चतुराई, तेज़ी, चौकन्नी नज़र, फ़ुटबॉल को काबू में रखने की क्षमता और ड्रिब्लिंग जैसे गुण थे, जिन्होंने उनके ज़्यादा वज़न से कभी-कभार होने वाली दिक्कतों को ढँक लिया था.

हैंड ऑफ़ गॉड' और 'गोल ऑफ़ द सेंचुरी' :
माराडोना ने अर्जेंटीना के लिए 91 मैच खेले, जिनमें उन्होंने कुल 34 गोल दागे. लेकिन ये उनके उतार-चढ़ाव भरे अंतरराष्ट्रीय करियर का एक हिस्सा भर ही है.

उन्होंने अपने देश को साल 1986 में मेक्सिको में आयोजित वर्ल्ड कप में जीत दिलाई और चार बार टूर्नामेंट के फ़ाइनल तक पहुँचाया.

1986 के वर्ल्ड कप के क्वार्टर फ़ाइनल में माराडोना ने कुछ ऐसा किया, जिसकी चर्चा हमेशा होती रहेगी.
मेक्सिको में क्वार्टर फ़ाइनल का यह मैच अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच था. दोनों देशों के बीच यह मैच पहले से ही ज़्यादा तनावपूर्ण था क्योंकि इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच सिर्फ़ चार साल पहले फ़ॉकलैंड्स युद्ध हुआ था.

22 जून 1986 को साँसें थमा देने वाले इस रोमांचक मैच के 51 मिनट बीत गए थे और दोनों टीमों में से कोई एक भी गोल नहीं कर पाया था.
इसी समय माराडोना विपक्षी टीम के गोलकीपर पीटर शिल्टन की तरफ़ उछले और उन्होंने अपने सिर और हाथ से फ़ुटबॉल को नेट में डाल दिया. हाथ का इस्तेमाल होने की वजह से यह गोल विवादों में आ गया.
फ़ुटबॉल के नियमों के अनुसार हाथ का इस्तेमाल होने के कारण यह गोल फ़ाउल था और इसके लिए माराडोना को 'येलो कार्ड' दिखाया जाना चाहिए था.
लेकिन उस समय वीडियो असिस्टेंस टेक्नॉलजी नहीं थी और रेफ़री इस फॉउल को ठीक से देख नहीं पाए. इसलिए इसे गोल माना गया और इसी के साथ अर्जेंटीना 1-0 से मैच में आगे हो गया.
मैच के बाद माराडोना ने कहा था कि उन्होंने यह गोल 'थोड़ा सा अपने सिर और थोड़ा सा भगवान के हाथ से' किया था. इसके बाद से फ़ुटबॉल के इतिहास में यह घटना हमेशा के लिए 'हैंड ऑफ़ गॉड' के नाम से दर्ज हो गई.

गोल ऑफ़ द सेंचुरी: 
इसी मैच में इस विवादित गोल के ठीक चार मिनट बाद माराडोना ने कुछ ऐसा किया जिसे 'गोल ऑफ़ द सेंचुरी' यानी 'सदी का गोल' कहा गया.
वो फ़ुटबॉल को इंग्लैंड की टीम के पाँच खिलाड़ियों और आख़िरकार गोलकीपर शिल्टन से बचाते हुए ले गए और गोल पोस्ट के भीतर दे डाला. इस गोल के बारे में बीबीसी के कमेंटेटर बैरी डेविस ने कहा था:  "आपको मानना ही होगा कि ये शानदार था. इस गोल के बारे में कोई संदेह नहीं है. यह पूरी तरह से फ़ुटबॉल जीनियस है."

इस मैच के बारे में माराडोना ने कहा था, "यह मैच जीतने से कहीं से ज़्यादा था. इसका मक़सद इंग्लैंड को वर्ल्ड कप से बाहर करना था."

ड्रग्स और शराब में फँसा नेपोली का हीरो :
माराडोना बार्सिलोना और नेपोली जैसे नामी फ़ुटबॉल क्लबों के लिए भी खेले और इन क्लबों के हीरो कहलाए. साल 1982 में वो तीन मिलियन पाउंड में स्पेन के फ़ुटबॉल क्लब बार्सिलोना और इसके दो साल बाद पाँच मिलियन पाउंड में इटली के क्लब नेपोली में शामिल हुए.
जब माराडोना हेलिकॉप्टर में सवार होकर इटली के सान पाओलो स्टेडियम पहुँचे तो वहां 80 हज़ार से ज़्यादा प्रशंसक अपने नए हीरो का स्वागत करने के लिए मौजूद थे.
उन्होंने अपने करियर का सबसे अच्छा क्लब फ़ुटबॉल इटली में ही खेला और वहाँ उन्हें अपने प्रशंसकों से ख़ूब प्रसिद्ध मिली.

Limelight और चकाचौन्ध से ऊब नशा और ड्रग्स:
इटली में माराडोना को इतनी शोहरत मिली को वो इससे तंग तक आ गए. एक बार उन्होंने कहा था, "यह एक बेहतरीन जगह है लेकिन मैं यहाँ मुश्किल से साँस ले पाता हूँ. मैं आज़ाद और बेफ़िक्र होकर इधर-उधर घूमना चाहता हूँ. मैं किसी आम इंसान की तरह ही हूँ."
इस बीच उन्हें कोकीन की लत लग गई थी और उनका नाम इटली के कुख्यात माफ़िया संगठन कैमोरा से भी जुड़ गया था.
साल 1991 में माराडोना एक डोप टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गए और अगले 15 महीनों के लिए उन्हें फ़ुटबॉल से प्रतिबंधित कर दिया गया.

इसके बाद साल 1994 में अमरीका में होने वाले फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप में माराडोना को प्रतिबंधित ड्रग एफ़ेड्रिन लिए पाया गया था. इसके बाद बीच टूर्नामेंट में ही उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

माराडोना timeline :
1977: अर्जेंटीना बनाम हंगरी- अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल में शुरूआत.
1982: बार्सिलोना में दो साल बिताने के बाद नेपोली में शामिल.
1986: अर्जेंटीना को वर्ल्ड कप जिताया.
1990: अर्जेंटीना को वर्ल्ड कप में रनर अप बनाया.
1991: ड्रग टेस्ट में पॉज़िटिव पाए जाने के बाद 15 महीने का प्रतिबंध.
1994: अमरीका में वर्ल्ड कप के दौरान डोप टेस्ट फ़ेल होने के बाद टूर्नामेंट से बाहर.
1997: तीसरे पॉज़िटिव टेस्ट के बाद प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉल से रिटायर हुए.
2010: दो साल तक अर्जेंटीना की टीम के मैनेजर. वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना के क्वार्टर फ़ाइनल से बाहर होने के बाद पद से अलग हुए.

रिटायरमेंट के बाद माराडोना की ज़िंदगी और असाधारण घटनाएं: 
ततीसरी बार ड्रग्स पोज़िटिव पाये जाने के बाद माराडोना ने अपने 37वें जन्मदिन पर प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉल से रिटायरमेंट ले लिया था. हालाँकि इसके बाद भी विवाद और मुश्किलें उनका पीछा करती ही रहीं. जैसे की

माराडोना ने एक बार एक पत्रकार पर एयर राइफ़ल से गोली चलाई थी जिसके लिए उन्हें दो साल 10 महीने के लिए जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

कोकीन और शराब की लत की वजह से उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी कई तकलीफ़ें हो गई थीं.
उनका वज़न भी काफ़ी बढ़ गया था और एक समय में 128 किलो तक पहुँच गया था. साल 2004 में माराडोना को दिल का दौरा पड़ा था जिसकी वजह से उन्हें आईसीयू में भर्ती होना पड़ा था.
मोटापा घटाने के लिए माराडोना की गैस्ट्रिक-बाइपास सर्जरी तक करानी पड़ी थी. इतना ही नहीं, ड्रग्स की लत से छुटकारा पाने के लिए भी मदद लेनी पड़ी थी.

इन सभी विवादों और परेशानियों के बावजूद साल 2008 में माराडोना को अर्जेंटीना की नेशनल टीम के मैनेजर के तौर पर नामित किया गया. उन्हें मैनेजर के तौर पर कई और भूमिकाएँ भी मिलीं, जिनके बारे में लोगों की राय बँटी रही और वो लगातार किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बने रहे.

एक बार उनके कुत्ते ने उन्हें होठों पर काट लिया था जिसकी वजह से उन्हें सर्जरी करानी पड़ी.
माराडोना ने एक विवाहेतर संबंध से जन्मे अपने बेटे डिएगो अरमांडो जूनियर को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया था.

साल 2018 के फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप में जब वो रूस में अर्जेंटीना और नाइजीरिया के बीच मैच देखने गए थे तब उनका एक फ़ोटो वायरल हो गया था. इस फ़ोटो से पता चला था कि माराडोना की जीवनशैली कितनी बिगड़ चुकी थी.

रूस में उन्होंने एक नाइजीरियाई फ़ैन के साथ डांस किया, मैच शुरू होने से पहले आसमान की ओर देखते हुए प्रार्थना की, मेसी के गोल पर बुरी तरह झूमकर सेलिब्रेट किया, मैच के दौरान ही सो गए और अर्जेंटीना के दूसरे गोल के बाद 'डबल मिडिल फिंगर सल्यूट' किया.
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार माराडोना का ज़िंदगी के आख़िरी बरसों में अपनी जीवनशैली सुधारने के लिए माराडोना को इलाज कराना पड़ा था.

माराडोना का राजनैतिक दर्शन :

दिएगो मारादोना ने अपने टखने और बांह पर बीसवीं सदी के दो सबसे बड़े लातीन अमेरिकी क्रांतिकारियों फिदेल कास्त्रो और चे गुएवारा के टैटू गुदवा रखे थे. एक बहुत बड़ी सेलेब्रिटी के तौर उसे अधिकार था कि जितनी चाहे उतनी रकम मांग कर अमेरिकी पूंजीवाद का टट्टू बन जाता. पर उसने उन पर थूक दिया. उसने कहा वह अपने लोगों से मोहब्बत करता है.

फुटबॉल को समझने-चाहने वालों में से आधे लोग उसे भगवान मानते हैं. इतनी ही तादाद उसे बर्बाद नशेड़ी बताने वालों की भी है. कुछ भी हो आपको उसे पिछले सौ सालों के सबसे बड़े दो या तीन फुटबॉलरों में गिनना ही होगा. उसके जैसी बेबाक राजनैतिक प्रतिबद्धता और सजगता बहुत कम खिलाड़ियों में रही. 

इस चैम्पियन ने अपने समय के सबसे ताकतवर आदमी यानी अमेरिकी राष्ट्रपति को सार्वजनिक रूप से "मानव गू का हिस्सा" कहा. मारादोना कहता था – "जब आपको दुनिया जानने लगती है तो आपको अमरीका या उसके राष्ट्रपति के बारे में कुछ भी कहने की अनुमति नहीं होती. ऐसे और भी बहुत से निषिद्ध विषय होते हैं लेकिन आपको यह सीखना होता है कि किसे कितनी इज़्ज़त दी जानी चाहिये. आप चाहे कितने ही मशहूर फ़ुटबॉलर या और कोई खिलाड़ी क्यों न हों, आपको एक हत्यारे व्यक्ति के बारे में अपने विचार व्यक्त करने का पूरा अधिकार होता है.”

अगर मारादोना की मौत पर कुछ लिखे-कहे बिना चैन न आ रहा हो तो तेल और फ्लैट बेचने वाले महानायकों वाले हमारे देश के हर खेलप्रेमी नागरिक को सर्बिया के जबदस्त फिल्मकार एमीर कुस्तुरिका की 2008 में बनाई फिल्म 'मारादोना' एक बार जरूर देखनी चाहिए. 

मारादोना कहता था - "अमेरिका की यह बात मुझे ज़रा भी पसंद नहीं है कि वह दुनिया पर अपनी दादागीरी चलाने के लिए बहुत मेहनत करता है और उसे दुनिया के हर नागरिक की समस्या दूर करने का फितूर है."

यानी माराडोना बेहतरीन खिलाडी, बेबाक बदनाम, शर्मनाक , मनोरंजक फिलोसोफर...सब कुछ थे. ऐसी असाधारण ज़िंदगी वाले डिएगो माराडोना और उनकी 10 नम्बर की जर्सी को सालों तक , हर 25/11 को असाधारणता के लिए याद किया जायेगा। 

सलाम चैम्पियन! अलविदा चैम्पियन!

Monday, June 29, 2020

सत्यानाशी (वानस्पतिक नाम:Argemone mexicana) Mexican prickly poppy :

सत्यानाशी (वानस्पतिक नाम:Argemone mexicana) Mexican prickly poppy :

      खेत में इसका एक पौधा भी उपज गया तो छह महीने में पूरा खेत भर जाता है इससे... उसके बाद उस खेत में खेती सम्भव नहीं होती। फसल उपजे भी तो इसके कांटों के कारण न सोहनी हो पाती है न कटनी... खेत का लगभग  सत्यानाश ही हो जाता है। इसीलिए बुजुर्गों ने इसका नाम सत्यानाशी रख दिया शायद...
     फिर भी! जब इसमें फूल आते हैं तो कितना सुन्दर दिखता है यह। गज्जब का आकर्षण होता है इसमें... शायद कंटीली चीजें यूँ ही बहुत आकर्षक होती हैं। मनुष्य और जंतु फूल के लोभ में जाता है, और कांटों से छलनी हो कर लौटता है। गाँव के बूढ़े तभी कहते थे कि अधिक आकर्षक वस्तुओं से दूर ही रहना चाहिए।


     हमारा जीवन भी ऐसा ही होता है। फूल की तरह सुन्दर, आकर्षक,  पर मोह ईर्ष्या लोभ आदि कांटे घेरे रहते हैं। अंतर बस इतना है कि फूल के कांटे दूसरों को कष्ट देते हैं, हमारे अंदर के कांटे हमें ही दुख देते हैं। हमारे कांटे हमारी ही आत्मा में चुभते हैं।

     किसी के प्रति घृणा में डूबा व्यक्ति अंत तक समझ नहीं पाता कि वह अपना ही अहित कर रहा है। उसे लगता है कि वह दूसरों का मजाक उड़ा कर, उन्हें पीड़ा दे कर उन्हें पराजित कर देगा। पर ऐसा होता नहीं है। सामने वाला धीरे धीरे व्यंग्य,आक्षेप सहने का आदी हो जाता है, पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाता है, और इधर घृणा में डूबा व्यक्ति स्वयं पराजित हो जाता है।
     कई बार जब हमें कोई व्यक्ति गलत तरीके अपना कर सफल होता दिखता है, तो हमें जलन होने लगती है। यह जलन कई बार घृणा में भी बदल जाती है। पर समझना होगा कि हम जलन या घृणा में डूब जाएं तो उसे पराजित नहीं कर सकते। रामायण की कथा में भगवान श्रीराम ने यदि रावण से केवल घृणा की होती, या उससे डाह रखे होते तो उसे पराजित कर पाते क्या? नहीं! श्रीराम ने चौदह वर्षों तक अपने तरकश में तीर बटोरे... उन्होंने रावण के हर दांव की काट खोजी... उन्होंने स्वयं को रावण से अधिक समृद्ध किया... फल यह कि रावण पराजित हुआ। संयम ज़रूरी है।
     कल्पना कीजिये, महाभारत में पांडवों ने अपने बनवास के बारह वर्ष यदि कौरवों से घृणा करने में ही, उनपर क्रोध करने में ही निकाल दिए होते तो क्या महाभारत युद्ध में उन्हें विजय मिलती? नहीं न?
  
    सत्यानाशी का पौधा आयुर्वेद में औषधि माना जाता है। यह एक नहीं, अनेक रोगों में लाभ पहुँचाता है। कितना आश्चर्यजनक है न, सत्यानाशी जैसा कंटीला पौधा भी जीवनदायक औषधि है। जीवन का एक रङ्ग यह भी है। कई बार हम जिसे बुरा मान कर त्याग चुके होते हैं वही विपत्ति में सहायक सिद्ध होता है। परिस्थितियाँ कब किसे आपका शत्रु बना दें और किसे सहयोगी, यह कोई नहीं जानता। सो बेहतर है कि घृणा से मुक्ति पा ली जाय। है न?
अब यह न सोंचियेगा कि क्या शत्रुओं से भी घृणा करना छोड़ दें! शत्रु से भी घृणा कर अपनी ऊर्जा व्यर्थ क्यों करना, उसे पराजित ही करना है तो शस्त्र इकट्ठे करने चाहिए, लड़ना चाहिए बिना विद्वेष के, ईमानदारी से। वैसे शत्रुता का भाव भी नकारात्मक ही है, इसे छोड़ना ज्यादा बेहतर होगा अगर छोड़ सको तो।


    राजनीति, विचारधारा, भाषा, क्षेत्र... जाने कितने कारक हैं जो मनुष्यों में दूरी बनाते हैं। इनसे मुक्ति पा लेना ही ज्ञान है। घृणा किसी से भी ठीक नहीं, क्योंकि कोई हमेशा नहीं रहने वाला,  विचार और विचारधाराएं रहेंगी, संघर्ष रहेगा।
  
   मोह, घृणा, लोभ, काम, क्रोध, जलन आदि विकृतियां सब में होती हैं। किसी में थोड़ा, किसी में कम, किसी में थोड़ा अधिक... कोई इनसे अछूता नहीं, हम सब में ये कांटे भरे पड़े हैं। यह भी सही है कि हम इन विकृतियों से पूर्ण रूप से मुक्त भी नहीं हो सकते। फिर भी... जितना सम्भव हो सके , स्वयं को इन कांटो से मुक्त करना चाहिए।

Sunday, June 7, 2020

त्रिवेणी ghazal

त्रिवेणी : ये दो लाइन के शेर न होकर तीन लाइन की त्रिवेणियाँ हैं। जिसका अविष्कार गुलज़ार साब ने किया है और जगजीत जी ने बेहतरीन compose किया है। त्रिवेणी की खासियत ये है कि दो लाइन के शेर अपने आप में पूर्ण हैं, किंतु तीसरी लाइन आकर , पहले दो लाइनों के अर्थों को लगभग बदल ही देती है । पहले दो लाइनों के विचार और मायने को तीसरी लाइन आकर अर्थों की एक ऐसी नयी खिड़की खोल देती है और एक अलग ही रोशनी देती है कि फिर आप उन तीन लाइन के शेर को एक वृहत कैनवस के साथ ,  नए dimension में सोंचते हैं और पूरे विस्तृत विचार को समझ पाते हैं , कि ओह ये बात कहना चाह रहा था शायर!) 


ज़िन्दगी क्या है जानने के लिए,
ज़िंदा रहना बहुत जरुरी है,
आज तक कोई भी रहा तो नहीं!

सारी वादी उदास बैठी है,
मौसम-ए गुल ने ख़ुदकुशी कर ली ,
किसने बारूद बोया बाग़ों में !

आओ हम सब पहन लें आइना ,
सारे देखेंगे अपना ही चेहरा ,
सबको सारे हसीं लगेंगे यहाँ !

है नहीं जो दिखाई देता है ,
आईने पर छपा हुआ चेहरा ,
तर्जुमा आइने का ठीक नहीं !

हमको ग़ालिब ने ये दुआ दी थी ,
तुम सलामत रहो हज़ार बरस ,
ये बरस तो फ़क़त दिनों में गया !

लब तेरे मीर ने भी देखे है ,
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है ,
बात सुनते तो ग़ालिब हो जाते !

ऐसे बिखरे हैं रात दिन जैसे ,
मोतियों वाला हार टूट गया ,
तुमने मुझको पिरोके रखा था !

*************************
Reference: https://youtu.be/QE4nIiuMSS4

Sunday, May 31, 2020

Spread HAPPYNESS (सच्ची खुशियां, better customs ) :

कुछ रूपयों का हार, नारियल, अगरबत्ती लेकर 

 या 

चादर, इत्र, फूल, मोमबत्ती लेकर किसी धार्मिक स्थल जाने की बजाए,

 कुछ रुपयों का बिस्किट, chocolate, मिठाई, गुब्बारे, खिलौने लेकर जाने का प्रयत्न करें.....

कुछ छोटे बच्चे खुशियों के आने की राह देखते हैं...

खुशियां मांगने से नही, बांटने से मिलती है....
TheGodOfSmallThings

Sunday, May 24, 2020

I love Tea...चाय पीजिये और कोरोना से बचिए

एक कप चाय दूर करेगी कोरोना संक्रमण का खतरा, कई दवाओं से ज्यादा है कारगर : 

Thursday, May 21, 2020

music timless love song Sathiya tuney kya kiya

हिंदी के कुछ गाने timless love songs हैं। जैसे कि ये ..1991 का गाना है पर आज भी उतना ही कर्णप्रिय (melodious) और खूबसूरत लगता है, बार बार सुनने का मन करता है। SP balasubraminam और चितत्रा की आवाज और आनंद मिलिंद की धुन बेहद खोइबसूरत है , सुनिएगा एक बार, ज़रूर , humble request है..plz..
Duration : 5:12 
Size : 6.6MB , 
Sathiya Tune Kya kiya | साथिया तूने क्या किया – Chitra – Balasubrahmanyam

Gaana.com link : 
https://gaana.com/song/saathiya-tune-kya-kiya-1 

साथिया तूने क्या किया?
बेलिया ये तूने क्या किया?
मैने किया तेरा इंतेज़ार,
इतना करो ना मुझे प्यार!

साथिया तूने क्या कहा?
बेलिया ये तूने क्या कहा?
यूँ ना कभी करना इंतज़ार,
मैने किया है तुमसे प्यार!
मैने किया है तुमसे प्यार।

साथिया तूने क्या किया?
बेलिया ये तूने क्या किया?

इतनी मोहब्बत सह ना सकूँगा,
सच मानो ज़िंदा रह ना सकूँगा.
तुझको सम्हालूं ये मेरा ज़िम्मा,
मैं हू तो क्या ग़म जाने तमन्ना!
अब जीना मरना मेरा जानम तेरे हाथ है,
मैने कहा ना सनम अब तू मेरे साथ है!
तो फिर सम्हाल…ये मैं चला, 
जाना कहाँ…आ दिल मे आ,
ला ला ला …

साथिया तूने क्या किया? 
बेलिया ये तूने क्या किया?

दिल के चमन का हंसना तो देखो,
जागी नज़र का सपना तो देखो!
ऐसे हुए हम , इक जान एक दिल,
तू है के मैं हूँ ,  कहना है मुश्किल,
झोंका बसंती है तू,  तन है गुलाबी मेरा!
दो रंग मिलने के बाद, 
होते नही है जुदा.
तो फिर संभाल…दिल ये चला,
जाना कहां…आ दिल मे आ.

साथिया तूने क्या कहा,
बेलिया ये तूने क्या कहा?
यूँ ना कभी करना इंतज़ार
मैने किया है तुमसे प्यार.
मैंने किया है तुमसे प्यार!
इतना करो ना मुझे प्यार..
इतना करो न,  मुझे प्यार!

Movie: Love (1991)
Singers: Krishnan Nair Shantakumari Chitra (K.S. Chitra), S. P. Balasubrahmanyam
Song Lyricists: Majrooh Sultanpuri
Music: Anand Milind
Music Label: Venus Records
Starring: Salman Khan, Revthi, Shafi Inamdaar, Amjad Khan
Released on: 30th August, 1991
Music Genre: hindi duet soft love song,  90s magic, slow melody, timless love song

Wednesday, May 20, 2020

New Business Startup suggestion by Sholay's Gabbar (गब्बर की सलाह नए व्यवसाय के लिए )

कोई नया व्यवसाय शुरू करने के लिए क्या आवश्यक है : 

चलो गब्बर से सीखते हैं क्या क्या करना चाहिए ?

गब्बर सिंह एक वास्तविक प्रबंधन गुरु था।

 उन्होंने पढ़ाया : 

1. जो डर गया - समझो मर गया !
 Means :
व्यवसाय की सफल नींव रखने के लिए साहस और उद्यम महत्वपूर्ण कारक हैं।
सफलता प्राप्त करने के लिए पराक्रम की जरूरत है।

2. कितने आदमी थे ? मतलब :
प्रतियोगिता और उसके आकार को जानना महत्वपूर्ण है। वह समझ गया कि एक छोटी सी टीम भी फर्क कर सकती है।

3. अरे ओ सांभा, कितना इनाम रक्खें है , सरकार हम पर?
मतलब :
अपने बाजार मूल्य को जानें। अपने खुद के ब्रांड को बढ़ावा देना बहुत महत्वपूर्ण है और हमेशा ये बढ़ना जरूरी है |

4 गोली 6 और आदमी 3 बहुत नाइंसाफी है !
मतलब:
डिमांड कम है और सप्लाई ज्यादा करोगे तो मारे जाओगे

5. ले अब गोली खा!

कभी-कभी संगठन के हित में आपको कठोर और अलोकप्रिय निर्णय लेने पड़ते हैं।

इसलिए कभी-कभी किसी कर्मचारियों के नेता को बाहर का रास्ता दिखाना पड़ता है अगर वे आपकेबिज़नेस को ख़राब करने करने की कोशिश में हों |

6. ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर।

बाजार में खतरों के तत्वों को पहचानें और उन्हें कम से कम करने के उपाय करें

7. होली कब है, कब है होली?

आपके बिज़नेस के भीतर प्रमुख घटनाओं का आंकलन करना बहुत जरूरी है | अगर पहले से पता है कब क्या होगा तो आप अपने कम्पीटिशन वाले से जीत पाओगे |

8.बसंती, नाच !

सिर्फ वेतन और बोनस से अपनी टीम को प्रेरित न करें बसंती को भी नाचना पड़ेगा ....।

 ये जरूरी चीजें बताने के लिए गब्बर को धन्यवाद कहें, और Happy journey ...