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Thursday, November 26, 2020
Maradona माराडोना: अद्भुत, बदनाम, असाधारण, जीनियस और ग़ुस्सैल. डिएगो अरमांडो माराडोना. फ़ुटबॉल के एक ऐसे महानायक जिनमें कई ऐब भी थे.
Monday, June 29, 2020
सत्यानाशी (वानस्पतिक नाम:Argemone mexicana) Mexican prickly poppy :
सत्यानाशी (वानस्पतिक नाम:Argemone mexicana) Mexican prickly poppy :
खेत में इसका एक पौधा भी उपज गया तो छह महीने में पूरा खेत भर जाता है इससे... उसके बाद उस खेत में खेती सम्भव नहीं होती। फसल उपजे भी तो इसके कांटों के कारण न सोहनी हो पाती है न कटनी... खेत का लगभग सत्यानाश ही हो जाता है। इसीलिए बुजुर्गों ने इसका नाम सत्यानाशी रख दिया शायद...
फिर भी! जब इसमें फूल आते हैं तो कितना सुन्दर दिखता है यह। गज्जब का आकर्षण होता है इसमें... शायद कंटीली चीजें यूँ ही बहुत आकर्षक होती हैं। मनुष्य और जंतु फूल के लोभ में जाता है, और कांटों से छलनी हो कर लौटता है। गाँव के बूढ़े तभी कहते थे कि अधिक आकर्षक वस्तुओं से दूर ही रहना चाहिए।
हमारा जीवन भी ऐसा ही होता है। फूल की तरह सुन्दर, आकर्षक, पर मोह ईर्ष्या लोभ आदि कांटे घेरे रहते हैं। अंतर बस इतना है कि फूल के कांटे दूसरों को कष्ट देते हैं, हमारे अंदर के कांटे हमें ही दुख देते हैं। हमारे कांटे हमारी ही आत्मा में चुभते हैं।
किसी के प्रति घृणा में डूबा व्यक्ति अंत तक समझ नहीं पाता कि वह अपना ही अहित कर रहा है। उसे लगता है कि वह दूसरों का मजाक उड़ा कर, उन्हें पीड़ा दे कर उन्हें पराजित कर देगा। पर ऐसा होता नहीं है। सामने वाला धीरे धीरे व्यंग्य,आक्षेप सहने का आदी हो जाता है, पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाता है, और इधर घृणा में डूबा व्यक्ति स्वयं पराजित हो जाता है।
कई बार जब हमें कोई व्यक्ति गलत तरीके अपना कर सफल होता दिखता है, तो हमें जलन होने लगती है। यह जलन कई बार घृणा में भी बदल जाती है। पर समझना होगा कि हम जलन या घृणा में डूब जाएं तो उसे पराजित नहीं कर सकते। रामायण की कथा में भगवान श्रीराम ने यदि रावण से केवल घृणा की होती, या उससे डाह रखे होते तो उसे पराजित कर पाते क्या? नहीं! श्रीराम ने चौदह वर्षों तक अपने तरकश में तीर बटोरे... उन्होंने रावण के हर दांव की काट खोजी... उन्होंने स्वयं को रावण से अधिक समृद्ध किया... फल यह कि रावण पराजित हुआ। संयम ज़रूरी है।
कल्पना कीजिये, महाभारत में पांडवों ने अपने बनवास के बारह वर्ष यदि कौरवों से घृणा करने में ही, उनपर क्रोध करने में ही निकाल दिए होते तो क्या महाभारत युद्ध में उन्हें विजय मिलती? नहीं न?
सत्यानाशी का पौधा आयुर्वेद में औषधि माना जाता है। यह एक नहीं, अनेक रोगों में लाभ पहुँचाता है। कितना आश्चर्यजनक है न, सत्यानाशी जैसा कंटीला पौधा भी जीवनदायक औषधि है। जीवन का एक रङ्ग यह भी है। कई बार हम जिसे बुरा मान कर त्याग चुके होते हैं वही विपत्ति में सहायक सिद्ध होता है। परिस्थितियाँ कब किसे आपका शत्रु बना दें और किसे सहयोगी, यह कोई नहीं जानता। सो बेहतर है कि घृणा से मुक्ति पा ली जाय। है न?
अब यह न सोंचियेगा कि क्या शत्रुओं से भी घृणा करना छोड़ दें! शत्रु से भी घृणा कर अपनी ऊर्जा व्यर्थ क्यों करना, उसे पराजित ही करना है तो शस्त्र इकट्ठे करने चाहिए, लड़ना चाहिए बिना विद्वेष के, ईमानदारी से। वैसे शत्रुता का भाव भी नकारात्मक ही है, इसे छोड़ना ज्यादा बेहतर होगा अगर छोड़ सको तो।
राजनीति, विचारधारा, भाषा, क्षेत्र... जाने कितने कारक हैं जो मनुष्यों में दूरी बनाते हैं। इनसे मुक्ति पा लेना ही ज्ञान है। घृणा किसी से भी ठीक नहीं, क्योंकि कोई हमेशा नहीं रहने वाला, विचार और विचारधाराएं रहेंगी, संघर्ष रहेगा।
मोह, घृणा, लोभ, काम, क्रोध, जलन आदि विकृतियां सब में होती हैं। किसी में थोड़ा, किसी में कम, किसी में थोड़ा अधिक... कोई इनसे अछूता नहीं, हम सब में ये कांटे भरे पड़े हैं। यह भी सही है कि हम इन विकृतियों से पूर्ण रूप से मुक्त भी नहीं हो सकते। फिर भी... जितना सम्भव हो सके , स्वयं को इन कांटो से मुक्त करना चाहिए।
Sunday, June 7, 2020
त्रिवेणी ghazal
Sunday, May 31, 2020
Spread HAPPYNESS (सच्ची खुशियां, better customs ) :
Sunday, May 24, 2020
I love Tea...चाय पीजिये और कोरोना से बचिए
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की तुलना में चाय में मौजूद कैमिकल ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं. हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में स्थित हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (IHBT) के निदेशक डॉ संजय कुमार ने इस तथ्य का खुलासा किया।

जी हां एक कप चाय कोरोना संक्रमण को रोकने में हो सकती है कारगर !
कोरोना वायरस महामारी (Corona virus epidemic) COVID-19 के संक्रमण से बचाव के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ओर से जारी किए गए प्रोटोकॉल में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने की बात कही गई है. वहीं संक्रमण होने पर इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) की जगह एचआईवी-रोधी दवा के उपयोग की संभावना जताई है. लेकिन हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की तुलना में चाय में मौजूद कैमिकल कोरोना से बचाव में ज्यादा कारगर साबित हो सकते हैं. हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में स्थित हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (IHBT) के निदेशक डॉ संजय कुमार ने इस तथ्य का खुलासा किया है. कांगड़ा चाय के बारे में बोलते हुए यह बात उन्होंने अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर आईएचबीटी में आयोजित एक वेबिनार के दौरान कही है.
डॉ संजय कुमार के मुताबिक “चाय में ऐसे रसायन होते हैं जो कोरोनावायरस की रोकथाम में एचआईवी-रोधी दवाओं की तुलना मेंअधिक प्रभावी हो सकते हैं. हमारे वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर-आधारित मॉडल का उपयोग करते हुए जैविक रूप से सक्रिय 65 रसायनों या पॉलीफेनोल्स का परीक्षण किया है, जो विशिष्ट वायरल प्रोटीन को एचआईवी-रोधी दवाओं की तुलना में अधिक कुशलता से बाँध सकते हैं. ये रसायन उन वायरल प्रोटीन्स की गतिविधि को रोक सकता हैं, जो मानव कोशिकाओं में वायरस को पनपने में मदद करता है.
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद से संबद्ध आईएचबीटी अपने प्रौद्योगिकी साझेदारों के साथ मिलकर चाय आधारित प्राकृतिक सुगंधित तेलों से युक्त अल्कोहल हैंड सैनिटाइजर का भी उत्पादन और आपूर्ति कर रहा है. आईएचबीटी में चाय के अर्क के उपयोग से हर्बल साबुन भी बनाया गया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह साबुन प्रभावी रूप से फफूंद-रोधी, जीवाणु-रोधी और वायरस-रोधी गुणों से लैस है. हिमाचल की दो कंपनियों द्वारा इस साबुन का उत्पादन और बिक्री कर रही हैं.
Source: Look what I shared: एक कप चाय दूर करेगी कोरोना संक्रमण का खतरा, कई दवाओं से ज्यादा है कारगर | Zee Business Hindi @MIUI| https://www.zeebiz.com/hindi/india/one-cup-of-tea-will-reduce-the-risk-of-corona-infection-more-effective-than-many-medicines-get-details-here-27486