" Reynolds Jetter " , छात्र जीवन मे ये luxury थी और मुश्किल से मिलने वाली और लुभाने वाली स्वर्ण मृग जैसी थी !
हज़ार बार जमाना इधर से गुज़रा है,
नयी नयी सी लगे है रहगुज़र फिर भी....
नीब और स्याही वाले waterman और Camlin ink pen का ज़माना ही कुछ और था..Camlin 03, 13, 19, 22 जैसे कुछ नम्बर होते थे, स्याही खत्म होने का इंडिकेशन दे पाने वाले ट्रांसपेरेंट पेन का होना खुशी था तो टेंशन भी था..camel या chelpark की स्याही का कपड़ो या कॉपियों पर लग जाना एक मुश्किल था पर अब एक सुखद याद और एहसास हैं..
नीले ढक्कन वाली सफेद 045 Reynolds और फिर ये Jetter आदि ने अच्छा सहुलियत भरा ऑप्शन देकर एक नई दुनिया खोल दी..उस दौर में अधिसंख्य students थोड़े मुफ़लिसी में ही होते थे, लिखना पढ़ना एक रोमांसिंग था, शायद अब की पीढ़ी इसे महसूस न कर पाए , या फिर उनके तौर तरीके अलग हैं जो पुराने न समझ पाएँ...
एक दौर के खत्म होने के हम गवाह रहे हैं..
ज़माने आएंगे , जाएंगे,
Pen लुभाती रहेगी , दुनिया बदलती रहेगी...
बस यूं ही याद आ गया , सो पुराने जमाने में चल गया था..
बॉलपॉइंट पेन बनाकर हमारी ज़िंदगियां आसान बनाने वाले LászlóBíró को नमन! ज़रा सोचिए, आज बाल पॉइंट पेन कितना सामान्य हो गया है , जिसके बगैर अब हम लिखने की कल्पना नहीं कर सकते...
छेड़ कर तज़किरा-ए-दौर-ए-जवानी रोया,
रात यारों को सुना कर मैं कहानी रोया ,
जब भी देखी है किसी चेहरे पे इक ताज़ा बहार,
देख कर मैं तिरी तस्वीर पुरानी रोया ...
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