Saturday, December 3, 2022

आदमी बुलबुला है पानी का,

आदमी बुलबुला है पानी का.. , अच्छी कहानियां और यादें बनाएं , जीवन क्षणभंगुर है :
 
एक फिल्मी गाना है , एक जमाने में दूरदर्शन के चित्रहार में खूब आता था, तो खूब सुना है, पर इसके अर्थ पर उस  उम्र में बहुत ज्यादा ध्यान नहीं दिया, देना चाहिए था..सुन के देखियेगा। गीत है- 
 आदमी मुसाफिर है , 
आता है , जाता है ,
आते जाते रस्ते में यादें छोड़ जाता है..

ये हिंदी फिल्मी गीत जीवन के गहरे अर्थ बताने वाला दार्शनिकता का भाव लिए हुए है। 

जीवन है तो मृत्यु भी है.., फ़िल्म मैट्रिक्स में इसपर एक प्रभावी quote है कि-  हर शुरआत का एक अंत है.. , दार्शनिक कहते हैं कि हार जीत और सबकुछ को ही उसकी संपूर्णता में स्वीकारना चाहिए , यानी अच्छे को भी और बुरे को भी। रिश्तों में, लोगों में तथा जीवन में हम सब अक्सर अच्छा अच्छा ही चाहते हैं, केवल सुख और  अमृत ही चाहिए, दुख कड़वाहट और विष नहीं..

 Netflix पर रिलीज हुई फ़िल्म Good Bye देखिएगा...इसकी अधिकतर समीक्षाओं में एक्टिंग को, निर्देशन को, संवादो को या स्क्रिप्ट को रिव्यू करते है वैसा ही किया सबने..पर

Good Bye फिल्म में रिव्यू तो दरअसल मृत्यु का करना चाहिए था, कि जब कोई अपना इस दुनिया से चला जाता है तो दूसरे कैसे रिएक्ट करते हैं, और अपनों को क्या फील होता है..? दिखाया सब है लेकिन कही न कही बात थोड़ी अधूरी रह गई है ऐसा लगता है..!
इसी विषय पर इससे पहले हाल फिलहाल में दो फिल्मे और आई हैं ' रामप्रसाद की तेरहवीं' और 'पगलैट'..

हिंदुओ में मृत्यु के बाद तेरह दिनों के शोक में क्या क्या घटता है ये इन तीनों फिल्मों में मौजूद है..
मुझे पर्सनली इन तीनों फिल्मों में 'पगलैट' ही जिंदगी और वास्तविकता के ज्यादा करीब लगी.

गुड बाय में सबने अच्छा अभिनय किया है, महानायक अमिताभ बच्चन भी हैं और 'पुष्पा' वाली रश्मिक मंधाना भी हैं फ़िल्म में..मैने कुछ रिव्यूज देखे लेकिन किसी ने सुनील ग्रोवर के किरदार का जिक्र तक नहीं किया जबकि.. मेरे हिसाब से इस फ़िल्म में वह पात्र सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है..
ये किरदार महसूस करने वाला है ज्यादा है, बयान करने वाला कम..
मैं थोड़ी कोशिश करता हूं इसको बयान करने की..क्योंकि मैने इसे शायद ज्यादा गहराई से महसूस किया है..

हरीश भल्ला(अमिताभ बच्चन) की पत्नी का निधन हो चुका है और उनकी अस्थियों को लेकर गंगा में विसर्जित करने पूरा परिवार जा रहा है..जिस पंडित को ये अंतिम क्रिया करनी है वो महसूस करता है कि घर की बेटी तारा  इन रीत रिवाजो को लेकर नाखुश है, और इसे ढोंग मानती है..इन सबमें वैज्ञानिक कारण खोजती है..
पंडित बने सुनील ग्रोवर जो कुछ भी इस लड़की को कहते है वो ही इस पूरी फिल्म का सार शिक्षा और मोरल है..!
बल्कि यूं कहे कि फ़िल्म ही नहीं बल्कि पूरे जीवन का सार है..!

पंडित बने सुनील ग्रोवर उन्हे महाभारत की एक कहानी सुना कर बताते हैं कि हम अस्थियां विसर्जित क्यो करते हैं...? ताकि मनुष्य को उसके पापों से, उसके बुरे कर्मो से मुक्ति मिल सके..!
लड़की पंडित जी से असहमति प्रकट  करती है और बोलती है कि माफ कीजिए पंडित जी हम अस्थियां इसलिए प्रवाहित करते हैं क्योकि उसमे फॉस्फेट होता है जो हमारी खेती और मिट्टी की उर्वरता के लिए अच्छा होता है.. बाकी आप जो कह रहे हैं ये सब तो अंधविश्वास है..और वो वहां से उठकर चली जाती है...!
पंडित उनकी बात सुनकर गुस्सा नहीं होते..फिर रास्ते में सुनील ग्रोवर इस लड़की को कहते हैं कि..तारा जी आप बिल्कुल सही कह रही हैं, कि सब साइंस है , लेकिन ये साइंस की बात कितनी बोरिंग है न.?  ना तो इसने आपकी परेशानियों से आपका ध्यान हटाया, ना ही कोई दर्शन या climax  मिला, और ना ही आप इतनी दूर से गंगा में अस्थियां विसर्जन करने इसलिए आई हैं कि गंगा का पोषण हो सके..! 
दरअसल ये कहानियां ही हैं जो दुनिया चलाती हैं..! कहानियों से लंबी उमर ना आपकी है, न मनुष्य की , ना डायनासोर की ,
और ना हो इस दुनिया की..!
बस कहानी सुनो और बच्चो को अपना वर्शन सुनाओ..!
लड़की कहती है- पर बहुत सी कहानियां और बाते एकदम  बकवास और खयाली लगती हैं। पंडित उसको कहते हैं-हमें दर्शन और कहानियां अक्सर खयाली काल्पनिक लगती हैं, क्यूँकि हम उन्हे समझने की वैसी  कोशिश नही करते..!
आप अपनी मां गायत्री जी के बारे में क्या याद करेंगी? उनकी छोटी-छोटी बाते ही ना..? या इसमें भी कोई साइंस है ..?? यही याद करोगी ना कि उन्होंने ये किया, वो किया..?
सुनो,  आपकी माँ गायत्रीजी इस धरती पर पहले भी बहुत बार आकर चली गई हैं, पर इस जन्म में तुम्हारे लिए अपनी छोटी छोटी कहानियां छोड़ कर चली गई हैं।
बस यही एक वाक्य पूरे जीवन का सार है..!!
कहानियां हमारी उम्मीद है जीवन का संचार है..जीवन की आस है..

किसी को कयामत का इंतजार है कि अल्लाह आयेगा और हिसाब मांगेगा, किसीको दुबारा इस खूबसूरत दुनिया में बार बार आने की आस है और बीच मे बस RIP (rest in peace) है, क्योंकि वो इस दुनिया को छोड़ना नही चाहता..मोह है, माया है!

महाभारत भी एक उम्मीद है और रामायण भी..
अर्जुन जब अभिमन्यु के मरने का शोक नही मिटा पाता तो कृष्ण बोलते हैं कि  तुम इस दुख से बाहर क्यो नहीं निकलते..? 
अर्जुन बोले- अगर मैं वहां उस क्षण रणभूमि में मौजूद होता तो अपने पुत्र को बचा लेता..!
कृष्ण बोले फिर..?
...फिर क्या करते..??
फिर क्या तुम्हारा पुत्र सदा के लिए जीवित रहता..?
..अर्जुन नही निकले इस दुख से तो कृष्ण उन्हे स्वर्ग ले गए, कि चलो तुमको तुम्हारे पुत्र से मिलवा देते हैं , 
कृष्ण अर्जुन को स्वर्ग ले गए..
वहां उन्होंने अपने पुत्र अभिमन्यु को देखा, एक बड़े सिंहासन पर बैठे सुंदर वस्त्रों से सुशोभित, अर्जुन देखकर बड़े प्रसन्न हुए और दौड़कर गले मिले.
 अभिमन्यु ने पूछा आप कौन हैं..??
अर्जुन अवाक रह गए..बोले- पुत्र मैं तुम्हारा पिता अर्जुन हूं..
अभिमन्यु  हंसे और बोले- ना जाने कितने जन्म मैं तुम्हारा पिता रहा हूं, और ना जाने कितने जन्म आप मेरे पिता रहे. 
मैं किस किस जन्म को याद करूं..?
हे अर्जुन! जो भी हमारे आपके बीच संबंध है वो सब उसी धरती पर ही है अन्यथा और कहीं नहीं, और वो वहीं समाप्त हो जाते हैं।  इसलिए आप दुखी न हों!  ये मिलन आगे भी हमारा कहीं ना कहीं होता ही रहेगा ..

ऐसे ही बुद्ध का एक किस्सा है: बुद्ध के पास एक बूढ़ी स्त्री रोते हुए आई, तुम ज्ञानी हो मेरे पुत्र को दुबारा जीवित कर दो , मुझसे ये शोक सहन नही हो रहा,
बुद्ध बोले- ठीक है मां , जाओ पहले उस घर से एक लकड़ी ले आओ जिस घर में कोई मृत्यु को  प्राप्त ना हुआ हो.  
बूढ़ी स्त्री ममता के वशीभूत खो कर खुश हुई कि एक न एक घर तो मिल ही जायेगा जहां कभी कोई मरा ना हो..सुबह से शाम हो गई पर ऐसा कोई घर नही मिला जहां किसी न किसी का परिजन मृत्यु को प्राप्त ना हुआ हो..!
बुद्ध की बात अब उस स्त्री को समझ आ चुकी थी...
ये कहानियां ही हैं, पर ये जो कहानियां हैं, ये मन की अशांत नदी में ठहराव लाती हैं, इसमें तर्क लाने या साइंस खोजने का कई बार कोई मतलब नहीं बनता..!!.हम मनुष्य हैं, रोबोट नहीं.., 
मनुष्य शब्द मन से बना है,
बहुत से धर्मो में मनुष्य को मिट्टी का पुतला कहा गया है, कि मिट्टी में ही इसे मिल जाना है।
हिंदू धर्म में इस मिट्टी के पुतले को मनुष्य कहा गया है , इस मनुष्य शब्द का अर्थ डिक्शनरी में आपको शायद ठीक ठाक नहीं मिलेगा..
ये जो मन है, बस यही जीवन है..यही संसार है..
अगर आप ये पढ़ रहे हैं तो इसका एक  मतलब ये है कि- जारी है आपका जीवन, और मृत्यु भी तथा आपकी कहानियां भी...अच्छी कहानियाँ और यादें  बनाइये , संसार से हमें एक दिन चले जाना है, और अन्ततः कहानियों को ही रह जाना हैं।... चलो एक बेहतर दुनिया बनाएं! 🌈
🙏🏻

Friday, November 18, 2022

तेरी ख़ुशबू में बसे खत मैं जलाता कैसे...

'तेरे खुशबू में बसे खत मैं जलाता कैसे ...'

8 शब्दों में महागाथा है ये. करोड़ों के दिल के करीब .


ऐसी नायाब नज़्म लिखने वाले उर्दू के बड़े शायर राजेन्द्र नाथ 'रहबर' साहब ने पिछले रविवार 13.11.2022 को इस फानी दुनिया से रुख़सती ले ली है।

 वे 91 बरस के थे। रहबर साहब ने 70 सालों तक उर्दू अदब की ख़िदमत की। वे खासे पढ़े लिखे भी थे पर शायरी का शौक उन्हें ग़ज़लों और नज्मों की दुनिया में ले आया। अदब को लेकर उनकी ईमानदारी और जज्बे को उनके इस शे'र में देखा जा सकता है -

"ये नस्ल-ए-नौ को अंदाज़ा नहीं है,
के अदब में चोर दरवाज़ा नहीं है...."

(नस्ल-ऐ-नौ = नयी नस्ल, नए युवा, new youth
अंदाज़ा= सम्भावना की जानकारी, estimate
अदब= इज़्ज़त, औपचारिकता, manner 
चोर दरवाज़ा= गुप्त रास्ता, escape route, bypass route)

रहबर साहब की ये नज़्म 'तेरे खुशबू में बसे ख़त...' को बहुत ज्यादा शोहरत मिली। इसे जगजीत सिंह जी ने धुन में पिरोया और आवाज दी तथा  30 सालों तक दुनिया भर में इसे गाया है,  ग़ज़ल प्रेमियों के बीच ये बेहद ही  लोकप्रिय है। इस नज्म को फ़िल्म निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी फ़िल्म 'अर्थ' में रखा और फिल्माया था।
Love is life..and it adds lot of colurs in life..

 आज रहबर साहब को आखिरी सलाम बतौर उनकी यह नज्म पेश है।


मोहब्बत और खुलूस दिलों में जिंदा रखिये, और थोड़ा सा साहित्य भी, यही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

Friday, October 7, 2022

जोश : how is the Josh ???

How is the जोश!!! ?  

हिन्दी फिल्मी गीतों में कुछ गीत हैं जो जोश से भर देते हैं। इसी जोश के चक्कर मे लगभग हर शादी की बारात में एक गीत "ये देश है वीर जवानों का .." जरूर ही बजता है , जिसमें गीत के बोल से कहीं अधिक 'मायने' उसकी धुन एवं संगीत से उत्पन्न जोश होता है। 

मानव मन की भावना को 'रस' कहा जाता है , यहीं से 'रसिया' शब्द की उत्पत्ति हुई है ( रूस वाला Russia मत समझ लीजियेगा..).  'भाव' मन की स्थिति है जबकि रस उस भाव से उत्पन्न होने वाला सौंदर्य/स्वाद है. रस को ही सजीवों, कला एवं साहित्य का प्राणतत्व माना जाता है। मनुष्य की भावनाओं को कला एवं साहित्य प्रमुखतः 8-9 वर्गों में वर्गीकृत करता है। साहित्य एवं कला में रस उत्पत्ति को सबसे पहले परिभाषित करने का श्रेय भरत मुनि को जाता है जिन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक नाट्यशास्त्र (नाट्यकला की प्राचीनतम पुस्तक) में 8 प्रमुख रसों एवं उनके स्थायी भाव बताए हैं जो की ये हैं : 
रति (Love)
हास्य (Mirth)
शोक (Sorrow)
क्रोध (Anger)
उत्साह (Energy)
भय (Terror)
जुगुप्सा (Disgust)
विस्मय (Astonishment)

हिंदी साहित्य में भी इसी तरह सिर्फ नौ रस (emotions, भाव) बताए गए हैं जो मनुष्य के अंदर भिन्न भिन्न भावना जगाते हैं.  वो 9 रस एवं उनसे जुड़े   भाव ये हैं: 

वीभत्स रस (घृणा, जुगुप्सा)
हास्य रस (हास)
करुण रस (शोक)
रौद्र रस (क्रोध)
वीर रस (उत्साह)
भयानक रस (भय)
श्रृंगार रस (रति)
अद्भुत रस (आश्चर्य)

अभिनेता संजीव कुमार की  1974 की एक प्रसिद्ध फ़िल्म थी 'नया दिन नई रात ' जिसमें संजीव कुमार ने 9 रोल(किरदार) अदा किये थे एवं उनका हर रोल (चरित्र) इन्ही रसों में से एक का प्रतिनिधित्व (represent) करने वाला था। पहले के जमाने में लोग सिर्फ गाने सुनने, अपने प्रिय कलाकार को देखने,  ड़बल रोल देखने आदि के लिए भी सिनेमा हॉल जाते थे। उस फिल्म का एक गीत " मैं वही, वही बात, मेरे लिये तो हर दिन , नया दिन,  हर रात नयी रात.." भी अच्छा एवं लोकप्रिय रहा है। 
वैसे श्रृंगार रस को रसराज (रसों का राजा) कहा जाता है क्यूंकि इसका उपयोग बहुत व्यापक है। 

 एक फिल्मी गीत " ज़िद्दी है , ज़िद्दी है, दिल ये ज़िद्दी है.." पिछले दिनों सुना जो जोरदार लगा। इसके गायक विशाल डडलानी को आपने सोनी टीवी पर आने वाले संगीत के रियालटी शो  indian idol में  जरूर देखा सुना होगा।  इस गीत की बाकी की पूरी टीम सामान्य जनता के लिए अंजानी सी ही है। 

 बेहद अलग से , अलग अलग लम्बाई (मीटर) के शब्दों/वाक्यों को जो ठीक से जुगलबंदी भी न कर रहे हों, ऐसे बोलों को सुंदर धुन और संगीत में पिरोना किसी म्यूजिक कंपोजर के लिए जरा टेढ़ा और कठिन कार्य होता होगा।  फ़िल्म की कहानी से जोड़ता और बहुत से भावों से भरा हुआ अद्भुत  गीत है ये।
Song Title/गाना: जिद्दी दिल Ziddi Dil
Movie: Mary Kom(Year-2014)
Singer/गायक: Vishal Dadlani
Music Director/संगीतकार: Shashi Suman
Lyrics Writer/गीतकार: Prashant Ingole
Star casts/अभिनीत किरदार: Priyanka Chopra, Sunil Thapa, Darshan Kumar
Music Label: Zee Music)

गीत में किशोर कुमार की तरह की  याडलिंग भी है, मोहित चौहान की तरह की आवाज में खराश भी है..कुल मिलाकर अच्छा जोशीला गीत है, ज़रा ध्यान से सुनिएगा.. , आशा है पसंद आएगा..और जोश को  High रखने में निश्चित ही मददगार होगा...

उल्लास में रहें, जोश में रहें, उड़ते रहें ...और संगीत सुना करें, क्योंकि संगीत मन को पंख लगाए...

बहुत बहुत  शुभकामनाएं!🌈

Thursday, October 6, 2022

world is market दुनिया एक बाजार:

Often every product,service or idea has some pros and cons. Smart marketers presents their products and services to the world in many different interesting ways.  Most of the time, such amazing and unbelievably beautiful dreams draws a rosy picture in your mind that shaken your thought process and you remember it too. 
 Most of the advertisements focus on the benefits and shows beautiful dreams of the meaningful changes that will come in life from the effect of that product.. Tempting erotic Beauties in men's shaving razor blades ads are popular but height is watching an erotic exposing sexy in a cement ads...., X Laga Dala To Life Jhingalala..,  Thanda Means Coca Cola!! (really??)  
 The clever advertiser avoids including the Cons of his product/services/idea/to the target audience in the sales pitch.. However, prepares for Objection Handling for a doubtful prospects If the prospect asks.  Sometimes Price is crucial, critical and a big  barrier b/n  seller & customer then sandwich method is used which is a good popular option and is used by telebrands kind of TV ads.
The world is full of examples of  advertisements because this world is transforming into a market, where sometimes you are the customer, sometimes a catalyst and sometimes the marketer too! So, you must be going through many such tempting advertisements, getting attracted and confused every day...which one you found attractive, tempting, clever..??
अक्सर हर उत्पाद एवं सेवा के कुछ न कुछ पक्ष और विपक्ष होते हैं।  चतुर  मार्केटर अपने उत्पादों और सेवाओं को कई अलग-अलग रोचक तरीकों से दुनिया के सामने पेश करते हैं। ज्यादातर तो ऐसे आश्चर्यजनक और अविश्वसनीय से हसीन सपने दिखाते हैं कि आपका दिमाग हिल जाए और आप उसे याद भी रखें। ज्यादातर विज्ञापन लाभों पर ध्यान केंद्रित करते हुए उस प्रोडक्ट के प्रभाव से जीवन में आने वाले सार्थक परिवर्तनों के हसीन सपने दिखाते हैं .. मर्दों के दाढ़ी बनाने वाले  विज्ञापन में हसीनाएं,  सीमेंट के विज्ञापन में भी कामुक हसीनाएं,   X लगा डाला तो लाइफ झिंगालाला , ठंडा मतलब कोका कोला ऐसे ही विज्ञापनों के उदाहरणों से दुनिया भरी पड़ी है क्योंकि दुनिया के बाजार में कभी आप ग्राहक हैं तो कभी विज्ञापन को आगे बढ़ने वाले उत्प्रेरक और कभी कभी मार्केटर भी! अतः ऐसे ही अनेकों लुभावने विज्ञापनों से आप रोज गुज़रते, आकर्षित होते और भ्रमित होते रहते होंगे..थोड़ा दिमाग पर जोर डालकर याद कीजिये और बताइए कि अभी अभी किस विज्ञापन ने आपको दिवास्वप्न दिखाया..
  
चतुर विज्ञापनदाता अपने उत्पाद एवं विचार के विपक्ष को सेल्स पिच में दिखाने बताने से बचता है.. यद्यपि  ऑब्जेक्शन हैंडलिंग के तहत इस पर वृहत विचार करकर तैयारी जरूर रखता है ताकि सशंकित इच्छित ग्राहक के संशय को दूर करके उसे अपना ग्राहक बनाया जा सके। यदि संभावना पूछती है। कई बार अधिक बिक्रीमूल्य भी बेचनेवाले और ग्राहक के बीच बड़ी दीवार होती है जो उसे  उत्पाद/सेवा लेने से रोकती है तब सैंडविच विधि का प्रयोग किया जाता है जो कि एक अच्छा प्रचलित विकल्प है तथा टीवी के telebrands आदि द्वारा इसका प्रयोग किया जाता है।

Thursday, September 29, 2022

Facts and Aspects (तथ्य एवं पहलू) :

Facts , aspects and world : 
एक होता है Fact और उससे निकलते हैं कई opinions! जब एक ही aspect को पकड़कर opinion बना लें और उस पर ही जोर दें  "की भैया यही बात सही है बाकी अन्य सभी aspects तो हैं ही नहीं या गौण हैं"  तब वो opinion आ जाता है ज्ञान की श्रेणी में। 

A man's most valuable trait is a judicious sense of what not to believe....
Euripides (A great Roman Philosopher) 

" एक मनुष्य की सबसे मूल्यवान विशेषता उसका वह तर्कपूर्ण विवेकबोध है जो उसे यह बताता है कि किस बात पर विश्वास करना है, और किस बात पर विश्वास नहीं करना है। "
ऐसा ही कुछ सूचना संचार, कम्युनिकेशन और कंप्यूटर की इन्फॉर्मेशन डेटा आदि के बारे में पढ़ते पढ़ाते वक़्त हम सभी पढ़ते हैं किन्तु आम जीवन में इस छोटी सी किन्तु महत्वपूर्ण बात को लगभग भूल ही जाते हैं। और फैक्ट के एक अतिमहत्वपूर्ण aspect को dilute कर opinions के जाल बुनते रहते हैं तथा फंसते भी रहते हैं। 
संशय यानी dilemma , यानी अनिर्णय की स्थिति को यूँ तो अच्छा नहीं माना जाता किन्तु इसे इतना भी बुरा नहीं मानना चाहिए क्योंकि शायद कोई भी इससे बच न सका। 
अर्जुन की ऐसी ही संशय वाली परिस्थितियों पे कृष्ण का दिया गया गीता का ज्ञान है तो लगभग सारे advertisements के soft targets भी वही संशय वाली मानसिकता है।

जहाँ जहाँ चुनाव एवं विकल्प हैं वहां वहां संशय है जिससे पार पाने के लिए और सही चुनाव की बुद्धिमत्ता यानि कि 'intelligency' काम आती है। 

वैसे ये भी एक opinion और  'ज्ञान' हो गया न?

Wednesday, August 17, 2022

आम आदमी का प्यार प्रेम Love इश्क़ मोहब्बत और फिल्में (50 First dates) :

क्या होगा अगर आप एक ऐसे युवती/युवक से प्रेम करने लगें जो अगले दिन आपको याद ही न रख पाए?

Hollywood Movie 50 First Dates (50 फर्स्ट डेट्स ) इसी विषयवस्तु की कहानी कहती है। हॉलीवुड को आम तौर पर बेहतरीन एक्शन , ग्राफ़िक्स , sets , फंतासी,  बेहतरीन कैमरा वर्क आदि तकनीकी पक्ष की उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। और हम भारतीय दर्शक हॉलीवुड की ऐसी ही फिल्में ज्यादातर देखते हैं। किन्तु ये फ़िल्म नायक नायिका के प्रेम जैसे घिसे पिटे विषय को नयी कहानी एवं बेहतरीन कलापक्ष तथा मानवीय मनोविज्ञान  के साथ प्रस्तुत करने वाली फिल्म है।
Brief Story : 
फ़िल्म की कहानी कुछ यूँ है कि नायक
हेनरी(एडम सैंडलर) जो कि एक पशु चिकित्सक है वो खूबसूरत नायिका लुसी (ड्रियू बेरीमूर) के प्यार में पड़ जाता है, लेकिन नायिका एक अल्पकालिक स्मृति हानि की बीमारी से पीड़ित है।  लुसी जब रात को सोती है तो अगली सुबह सब कुछ भूल जाती है। अब नायक हेनरी को अगर नायिका लूसी का प्यार एवं साथ पाना है , उसके साथ जीवन बिताना है तो उसे हर दिन नए सिरे से नायिका को रिझाना होगा, और प्रार्थना करनी होगी कि नायिका उससे रीझ जाए एवं उससे प्यार करे। और वो अपने प्रेम को पाने के लिए ये सब करता है। इस तरह नायक रोज नया व्यक्ति बनकर नायिका से मिलता है और उसे पटाता है, कभी इस मिशन में सफल होता है और कभी नहीं होता है यहां तक कि एक दिन नायिका उससे परेशान होकर पोलिस से पकड़वा भी देती है।  
यह रोमांटिक कहानी बहुत ही मज़ेदार भी है साथ ही प्रेरणादायी भी है. 
यदि आप प्रेम का सही अर्थ समझने में रुचि रखते हैं तो सच्ची घटनाओं पर आधारित यह फिल्म आपको प्रेम के बारे में सब कुछ तो नहीं बतायेगी किन्तु कम से कम एक छोटा सा अनदेखा अनजाना दृष्टिकोण देने में ज़रूर सफल होगी. 

Plot: In the movie , After falling for an art teacher with short-term memory loss, a veterinarian finds he must win her over again every single day.

50 First Dates (2004 , IMDb rating: 6.8/10)

(50 First Dates is a real-life love story of a veterinarian (Sandler) who falls for a Art Teacher with daily memory loss (Drew Barrymore). The film is based on the true story of Michelle Philpots, who suffered two head injuries, in 1985 and 1990.)

यह हॉलीवुड की उन भावुक चुनिंदा फ़िल्मों में से एक है जो हर इंसान को एक बार अवश्य ही देखनी चाहिए क्योंकि यह स्त्री पुरूष के प्रेम जैसे  आम मानवीय भावनाओं से जुड़ी हुई ऐसी असाधारण फ़िल्म है, जो शायद हर किसी के जीवन से जुड़ी हुई है।
 शायद आपको लगता हो कि प्रेम को जितना जानना समझना है उतना आपने जान समझ लिया है, किंतु ये फ़िल्म देखकर आप ज़रूर सोंचेंगे कि प्रेम के एक नए पक्ष एवं दृष्टिकोण से इस फ़िल्म ने आपका परिचय कराया है।

Thursday, July 7, 2022

साथिया तूने क्या किया..

Saathiya Tune kya Kiya....

साथिया तूने क्या किया ..ये एक बेहद ही मशहूर हिंदी रूमानी फिल्म गीत है, शायद आपने सुना ही होगा। अगर अब तक नहीं सुना है तो आज ही सुनिए, क्योंकि ये बेहद ही खूबसूरत कर्णप्रिय गीत है,  शायद आपके फेवरेट गीतों की लिस्ट में पहले से ही शामिल हो या जल्द ही हो जाए।
 इसी धुन पर एक और दक्षिण भारतीय भाषा का गीत है   "ई नादे येदो अय्यिंडी" - प्रेमा (तेलुगु)। शायद आपने  ये नहीं सुना होगा। अगर सचमुच ऐसा है तो फिरआज ही सुनिए, संगीत को महसूस करिए, एवं जानिए की language is not a barrier , यानि कि संगीत भाषाओं की सीमा से परे भी बहुत फैला हुआ, बहुआयामी एवं विस्तृत है।
 दरअसल इस मूल धुन की रचना एक तेलुगु फिल्म - प्रेमा (1989) के लिए मशहूर संगीतकार इलैयाराजा ने की थी, उसी धुन को बाद में आनंद-मिलिंद द्वारा हिंदी फिल्म लव (1991) के लिए कॉपी किया गया था, जिसे की सबसे हिट और मशहूर हिंदी प्रेमगीतों में रखा जाता है।
 साल 1989 में राजश्री बैनर की आयी फ़िल्म 'मैने प्यार किया' सुपर डुपर हिट और एक कल्ट फ़िल्म थी। इस फ़िल्म से सलमान और भाग्यश्री सबसे बड़े सितारे हो गए थे। सलमान और भाग्यश्री की फ़िल्म में लेने की होड़ लगी हुई थी,  किंतु भाग्यश्री ने इस फ़िल्म के बाद ही फिल्मी दुनिया को अलविदा कह कर फ़िल्म प्रेमियों का दिल तोड़ दिया था। उस एक अभिनेत्री के गैप को भरने के लिए सलमान के साथ बहुत सी नई अभिनेत्रियों को फ़िल्म में लांच किया गया। 
ऐसा ही 1973 की हिट फिल्म बॉबी के हीरो ऋषि कपूर के साथ भी हुआ। जब डिम्पल ने अपनी पहली सुपर डुपर हिट फिल्म के बाद फिल्में छोड़ दी तो ऋषि के साथ कई नयी अभिनेत्रियों को मौका दिया गया। जहां तक ऋषि कपूर ने सबसे अधिक संख्या में नयी अभिनेत्रियों को introduce कराया।
1991 की फिल्म "लव" में उस समय के  युवा  दिलों के धड़कन  सलमान खान और रेवती ने अभिनय किया था। वैसे रेवती का असली नाम Asha Kelluni है, किंतु उन्हें उनके फिल्मी नाम Revathi से अधिक पहचाना जाता है, ये उनकी पहली हिंदी फिल्म थी।  फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर औसत प्रदर्शन किया लेकिन  SPB और चित्रा द्वारा गाया गया ये गाना बड़ा हिट था। ये गाना आगे चलकर वर्षों बाद आज भी पसंद किया जाता है और यादगार है। रेवती भी जाना पहचाना नाम हैं और उन्हें आजकल चरित्र भूमिकाओं में भी देखा जा सकता है। अभी अभी जून 2022 में आयी एक बहुभाषी अच्छी एवं हिट फिल्म ' मेजर' में उन्हें अभिनेता  adivi sesh की मां की भूमिका में देखा जा सकता है । फ़िल्म मेजर मुम्बई हमले में शहीद हुए मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के जीवन पर आधारित है।

इस गाने और इसकी धुन को बालाजी टेलीफिल्म्स के हिट TV serials  'पवित्र रिश्ता' में भी अच्छा प्रयोग किया गया था। सीरियल मरहूम सुशांत सिंह और अंकिता लोखंडे के रिश्तों की वजह से भी चर्चित रहा। थोड़ा बहुत इस वजह से भी ये गीत वर्षों बाद आज भी युवा है, प्रासंगिक है और लोकप्रिय है। 

वैसे  "साथिया तूने क्या किया" हिंदी में एसपीबी की सबसे हिट गीतों में शामिल है। और तेलुगु वर्शन भी इन्ही दो गायकों ने ही गाया है। 

साथिया तूने क्या किया (Prema 1989)  "Ee Naade Yedo Ayyindi" - Prema (Telugu) on screen : Vyanktesh & Revathi Menon
YouTube Video link: https://youtu.be/O_L1rhEdLes 
तेलुगु में साथिया तूने क्या किया

 हिंदी मूवी: लव (1991)
 कलाकारः सलमान खान, रेवती
 गीत: मजरूह सुल्तानपुरी
 संगीत: आनंद-मिलिंद
 गायक: एस.पी.बालासुब्रमण्यम और के.एस.चित्रा
Movie: Love (1991)
Cast: Salman Khan, Revathi
Lyrics: Majrooh
Music: Anand Milind
Singers: S.P.Balasubrahmaniyam & K.S.Chitra

दोनो भाषाओ के गीत के वीडियो को देखकर आप महसूस करेंगे कि स्क्रीन पर दो प्रेमियों के प्यार और शरारत को खूबसूरती से दिखाया गया है। हिंदी गीत में तो कुछ कुछ तेलुगु के सीन्स एवं सिचुएशन को भी कॉपी किया गया है। कई बार छोटे छोटे क्षण और घटनाएं बेहद बड़ी यादें बन जाती हैं ऐसे क्षण आपको गीत में देखने को मिलेंगे जो आपके मन को हर्षित करेंगे। अपने जीवन मे ऐसे क्षणों को  सहेजना चाहिए एवं दूसरों के जीवन में भी ऐसे प्रेम भरे क्षण और यादें रहें ऐसी कोशिश करनी चाहिए... प्यार बांटिए।
ऐसे ही बहुत से गीत हैं जो एक ही धुन में तो हैं किंतु अलग अलग भाषाओं में हैं। और इनका हिट होना ये बताता है कि संगीत शब्दों से भी बहुत आगे बेहद विस्तृत है। So enjoy these 2 songs with same tune but with different languages.

कहते हैं कि संगीत और प्यार की कोई भाषा नहीं होती,  प्यार एवं संगीत स्वयमेव ही एक भाषा है.. So
💓Love Life, Love Music..spread Happiness🌈

Friday, May 13, 2022

राह पे रहते हैं, यादों में बसर करते हैं, खुश रहो अहले वतन , अब हम तो सफर करते हैं..

राह पे रहते हैं यादों पे बसर करते हैं ,
खुश रहो अहले वतन, हम तो सफर करते हैं ..
जल गये जो धूप में तो साया हो गये -
आसमाँ का कोई कोना ले थोड़ा सो गये 
जो गुज़र जाती है बस उसपे गुज़र करते हैं 

उड़ते पैरों के तले जब बहती हैं जमीं -
मुड़के हमने कोई मंज़िल देखी ही नहीं ,
रात दिन राहों पे हम शामो सहर करते हैं 
हो राह पे रहते हैं..

ऐसे उजड़े आशियाने तिनके उड़ गये,
बस्तियों तक आते आते रास्ते मुड़ गये ,
हम ठहर जायें जहाँ उसको शहर कहते हैं..
राह पे रहते हैं यादों पे बसर करते हैं,
खुश रहो अहले वतन अब, हम तो सफ़र करते हैं..

1982 की फ़िल्म नमकीन में गुलज़ार का लिखा ये सफ़राना  गीत संजीव कुमार पर ट्रक चलाते हुए फिल्माया गया था, नायक एक ट्रक ड्राइवर जो है। गाना बचपन में पहले सुन लिया था और इसका वीडियो यानी फ़िल्म बहुत बाद में देख पाया।  ऐसा बहुत से गीतों के साथ हुआ है और हर बार लगा है कि गाना और भी बहुत अच्छे से फिल्माया जा सकता था क्योकि मन में कुछ और ही तस्वीर बन चुकी थी। सो लगा कि इस वीडियो से तो गीत के भाव की पूरी अभिव्यक्ति नहीं हो पाई। भावसंप्रेषण बहुत बड़ी कला है और हमेशा बेहतरी की गुंजाइश होती ही है। 
फ़िल्म नमकीन जो कि गुलज़ार की सिग्नेचर फ़िल्म में से एक है। यह बांग्ला साहित्यकार समरेश बसु की कहानी पर आधारित है। 
सोंचता हूँ तो लगता है कि आज का सिनेमा ऐसी सरल और सामयिक कहानी कह ही नहीं पाता , क्योंकि शायद व्यावसायिक सिनेमा की अपनी सीमाएं हैं, किंतु भारत में अव्यावसायिक या कला फिल्मों में भी क्या इतना अकाल है? 
गुलज़ार जैसे लेखक विचारक ही ऐसे आम जीवन को गहराई से देख समझ सकते हैं और फिर उसे गीतों और फिल्मों में ढाल कर यूँ पेश कर सकते हैं की हर किसी को सोंचने पर ऐसा  मजबूर भी कर दे कि दर्शक का व्यक्तिगत विचार भी आगे बढ़कर समृद्ध हो और साथ ही मनोरंजन भी हो।  निस्संदेह गुलज़ार एक बहुत बड़े story teller हैं।

वजह बेवजह घूमने वाले और मंजिल की तलाश में चलने और सफर करने वाले के लिए बहुत से शब्द हैं राही, यात्री, traveller, explorer, wanderer , जोजोबोर (असमिया)  यायावर आदि बहुत से शब्द हैं सबके अपने अपने मतलब भी हैं और specific किस्म के यात्री को इंगित करते है।
 
*देखें तो हम सब अपनी जीवन यात्रा में चल रहे एक यात्री और यायावर ही तो हैं।*

गुलज़ार और उनकी कृतियों पर बहुत कुछ लिखा जा सकता है। वैसे सरल सादी सी हिंदी फ़िल्म देखने का शौक हो तो नमकीन ज़रूर देखें , मेरी तो फेवरेट है।
(फ़िल्म नमकीन की स्टोरी कुछ यूं है : हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से पर्वतीय गाँव में एक ट्रक ड्राइवर गेरुलाल (संजीव कुमार) आता है। स्थानीय ढाबे वाला धनीराम, गेरुलाल को एक वृद्धा ज्योति (वहीदा रहमान) के घर पर एक कमरा किराज़े पर दिलवा देता है। ज्योति की तीन बेटियां हैं- सबसे बड़ी... निमकी (शर्मिला टैगोर), मंझली... मिट्ठु (शबाना आज़मी) और सबसे छोटी चिनकी (किरण वैराले)। धीरे धीरे गेरुलाल, चारों महिलाओं के नजदीक आ जाता है और घर के सदस्य जैसा हो जाता है। वह निमकी से प्रेम करने लगता है परंतु वह शादी करने से इंकार कर देती है और गेरुलाल से कहती है कि उसे मिट्ठु से शादी कर लेनी चाहिये। गेरुलाल को वहाँ से जाना पड़ता है।
कुछ बरस बीत जाते हैं और एक बार गेरुलाल की मुलाकात नौटंकी में नाचने वाली स्त्री से होती है। यह चिनकी है जो अब अपने पिता किशनलाल के साथ रहती है। चिनकी से गेरुलाल को पता चलता है कि पिछले तीन बरसों में निमकी और बहनों की कोई खोज खबर न लेकर उसने गलती की है। वह गाँव में जाता है तो निमकी को अकेले रहते पाता है। ज्योति और मिट्ठु, दोनों ही मर चुकी हैं। गेरुलाल निमकी को अपने साथ ले आता है। फ़िल्म को आर॰ डी॰ बर्मन के अच्छे संगीत के लिये भी जाना जाता है।) 
फ़िल्म देखकर ये लगा की इसका नाम आखिर 'नमकीन' रखने का सोंचना और सचमुच में यही नाम रखना भी बहुत बड़ी बात है। 

Saturday, March 5, 2022

A Prayer by An Atheist (एक नास्तिक की प्रार्थना) :

वर्षों से नास्तिक होने के पश्चात भी कुछ आस्तिकता की बातें कभी कभी मुझे आकर्षित करती हैं।  जैसे कि ये प्रार्थना कि : 

हे ईश्वर!  मुझे उन सभी चीजों को शान्ति  से स्वीकार करने की शक्ति प्रदान करें जिन्हें मैं बदल नहीं सकता हूँ, और जो मैं बदल सकता हूं उसे बदलने का साहस,  तथा इन दोनों बातों में अंतर जानने की सद्बुद्धि  प्रदान करें!

Dear God!,

grant me the  🇸‌🇪‌🇷‌🇪‌🇳‌🇮‌🇹‌🇾‌ to accept the things I cannot change,🇨‌🇴‌🇺‌🇷‌🇦‌🇬‌🇪‌  to change the things I can, and 🇼‌🇮‌🇸‌🇩‌🇴‌🇲‌ to know the difference'''.

दरअसल यह एक प्रसिद्ध शांति प्रार्थना है जो कि अमेरिकी धर्मशास्त्री रेनहोल्ड नीबुहर द्वारा लिखित है। और कल ही इसे प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर संदीप माहेश्वरी के एक 14 मिनट के वीडियो में you tube पर सुना और बेहद पसंद आया। नीचे के लिंक से इसे सुने आशा है पसंद आएगा और आपके जीवन को बहुमूल्य बनाने में काफी योगदान देगा। 

For Detailed Description plz watch this Video By Sandeep Maheshwari   https://youtu.be/0sr3Gcrh9vk संदीप माहेश्वरी का वीडियो । इसका ऑडियो भी है किंतु ज्यादा तकनीकी ज्ञान न होने के कारण यहाँ इसे संलग्न कर पाने में असमर्थ हूँ।

तर्कों और विज्ञान पे बसी दुनिया एक बेहतर मानवता वादी दुनिया होगी। किन्तु झूठे मिथकों, पुनर्जन्म की कहानियों, अंधविश्वास , रूढ़ि और परंपरा से लिपटे धर्म पंथ आदि इंसान को बेवजह और अतार्किक चीजों में फंसाकर गर्त में धकेल रहे हैं। और इंसान मानसिक शांति की तलाश में एक चक्रव्यूह में फंसा हुआ है। 

हर एक इंसान का जीवन बेहतर हो..और ऐसा हो कि:

हर एक घर में दिया भी जले, अनाज भी हो
अगर ना हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी हो

(एहतिजाज = अपने किसी अहित के लिए अहितकर्ता से रोष प्रकट करना)

हुकूमतों को बदलना तो कुछ मुहाल नहीं
हुकूमतें जो बदलता है वो समाज भी हो

(मुहाल = असंभव, कठिन, दुष्कर)

रहेगी कब तलक वादों में क़ैद खुश-हाली
हर एक बार ही कल क्यूँ, कभी तो आज भी हो

ना करते शोर शराबा तो और क्या करते
तुम्हारे शहर में कुछ और काम काज भी हो

-निदा फ़ाज़ली

इसी ग़ज़ल के कुछ और अश'आर:

रहेगी वादों में कब तक असीर खुश-हाली
हर एक बार ही कल क्यूँ, कभी तो आज भी हो

(असीर = क़ैद, बंदी)

बदल रहे हैं कई आदमी दरिंदों में
मरज़ पुराना है उसका नया इलाज भी हो

अकेले ग़म से नई शायरी नहीं होती
ज़बान-ए-मीर में ग़ालिब का इम्तिज़ाज भी हो

(इम्तिज़ाज = मिलाना, मिश्रित करना, मिलावट)

ये ग़ज़ल बहुत अच्छी है इसे भी सुनियेगा कभी,  ये रही लिंक https://youtu.be/DjvVBptW-Dwhttps://youtu.be/DjvVBptW-Dw



तो आशा है कि अपने जीवन को BETTER करने के लिए आप इन 3 शब्दों Serenity= शांति, Courage= साहस, एवं  Wisdom= सद्बुद्धि से मिलकर बनी हुई इस सरल सी बात को सदैव याद रखेंगे । शुक्रिया!💐


🌱  🌳   🤹🏻‍♀️ 🎡 🎶  🍂  🌱  🌈

Friday, January 7, 2022

सवेरे का सूरज तुम्हारे लिए है..

नया साल आने पर लोग नए साल के स्वागत का खूब जश्न मनाते हैं, लेकिन साथ ही बीतते हुए साल को बेरुखी भरा bye bye करते हैं, जबकि साल भर पहले इसी बीतते हुए साल को खुली बाहों और आशाओं के साथ स्वागत किया था..सोंचने वाली बात तो ये भी हो सकती है कि भई अगर कुछ आशान्वित न हुआ, तो क्या पूरी गलती साल की ही थी.. Introspection यानी आत्मविश्लेषण और स्वआकलन में हम अक्सर impartial नहीं रह पाते और दूसरों पर दोष मढ़ देते हैं, दरअसल खुद तक पहुंचना भी बड़ा लंबा सफ़र है, ज्यादातर तो अपने जीवन का सफर खत्म होते तक भी खुद तक नहीं पहुंच पाते हैं..


 बहरहाल यह विदाई का गीत मुझे अक्सर विदाई की घड़ी में याद आता है, नए साल पर भी..(वैसे नए साल में ये ग़ज़ल की  "इक बिरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है.." भी बहुत याद आता है..) वैसे तो जमाने में नए का बहुत swag होता है, और पुराने की बुराई!.. , its not right but its ok.. ये उचित तो नहीं है पर दुनिया, जमाना और रवायत ऐसा ही है..
वैसे इस गाने की lyrics बहुत ही ख़ूबसूरत है, धुन औऱ गायकी भी इसे बहुत अच्छा compliment  करती है जाने के भावों को व्यक्त करती है, किंतु इसे किसी भी chartbuster पे नहीं पाया , न तो किशोर कुमार के top 50 गाने में इसे कहीं शामिल पाया , न कहीं इसका जिक्र पाया , शायद उनके गानों की लिस्ट बहुत बड़ी है जिसमें ये मोती गुम हो गया..
आप इस ब्लॉग तक पहुंचे हैं तो आशा है कि आप शब्दों को गौर से पढते हैं,  अतः अगर ऐसा है तो पूरी आशा है की ये गीत आपको जरूर पसंद आएगा सुनियेगा, सुनाइयेगा ..
ये रही links सुनने  Spotify link देखने सवेरे का सूरज youtube के लिए..आपका और सभी का ये साल तथा हर आने वाला साल अच्छा गुज़रे यही शुभकामनाएँ..Take Care!