As a normal and common human being gone and going lots of sentiments. This blog is just a step to share some thoughts and a plateform to express and share some thoughts by hoping that this will help you to think feel and act to make a small social change and make this world a more better place to Live...
Saturday, December 3, 2022
आदमी बुलबुला है पानी का,
Friday, November 18, 2022
तेरी ख़ुशबू में बसे खत मैं जलाता कैसे...
Friday, October 7, 2022
जोश : how is the Josh ???
Thursday, October 6, 2022
world is market दुनिया एक बाजार:
Thursday, September 29, 2022
Facts and Aspects (तथ्य एवं पहलू) :
Wednesday, August 17, 2022
आम आदमी का प्यार प्रेम Love इश्क़ मोहब्बत और फिल्में (50 First dates) :
Thursday, July 7, 2022
साथिया तूने क्या किया..
Friday, May 13, 2022
राह पे रहते हैं, यादों में बसर करते हैं, खुश रहो अहले वतन , अब हम तो सफर करते हैं..
Saturday, March 5, 2022
A Prayer by An Atheist (एक नास्तिक की प्रार्थना) :
वर्षों से नास्तिक होने के पश्चात भी कुछ आस्तिकता की बातें कभी कभी मुझे आकर्षित करती हैं। जैसे कि ये प्रार्थना कि :
हे ईश्वर! मुझे उन सभी चीजों को शान्ति से स्वीकार करने की शक्ति प्रदान करें जिन्हें मैं बदल नहीं सकता हूँ, और जो मैं बदल सकता हूं उसे बदलने का साहस, तथा इन दोनों बातों में अंतर जानने की सद्बुद्धि प्रदान करें!
Dear God!,
grant me the 🇸🇪🇷🇪🇳🇮🇹🇾 to accept the things I cannot change,🇨🇴🇺🇷🇦🇬🇪 to change the things I can, and 🇼🇮🇸🇩🇴🇲 to know the difference'''.
दरअसल यह एक प्रसिद्ध शांति प्रार्थना है जो कि अमेरिकी धर्मशास्त्री रेनहोल्ड नीबुहर द्वारा लिखित है। और कल ही इसे प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर संदीप माहेश्वरी के एक 14 मिनट के वीडियो में you tube पर सुना और बेहद पसंद आया। नीचे के लिंक से इसे सुने आशा है पसंद आएगा और आपके जीवन को बहुमूल्य बनाने में काफी योगदान देगा।
For Detailed Description plz watch this Video By Sandeep Maheshwari https://youtu.be/0sr3Gcrh9vk संदीप माहेश्वरी का वीडियो । इसका ऑडियो भी है किंतु ज्यादा तकनीकी ज्ञान न होने के कारण यहाँ इसे संलग्न कर पाने में असमर्थ हूँ।
तर्कों और विज्ञान पे बसी दुनिया एक बेहतर मानवता वादी दुनिया होगी। किन्तु झूठे मिथकों, पुनर्जन्म की कहानियों, अंधविश्वास , रूढ़ि और परंपरा से लिपटे धर्म पंथ आदि इंसान को बेवजह और अतार्किक चीजों में फंसाकर गर्त में धकेल रहे हैं। और इंसान मानसिक शांति की तलाश में एक चक्रव्यूह में फंसा हुआ है।
हर एक इंसान का जीवन बेहतर हो..और ऐसा हो कि:हर एक घर में दिया भी जले, अनाज भी हो
अगर ना हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी हो
(एहतिजाज = अपने किसी अहित के लिए अहितकर्ता से रोष प्रकट करना)
हुकूमतों को बदलना तो कुछ मुहाल नहीं
हुकूमतें जो बदलता है वो समाज भी हो
(मुहाल = असंभव, कठिन, दुष्कर)
रहेगी कब तलक वादों में क़ैद खुश-हाली
हर एक बार ही कल क्यूँ, कभी तो आज भी हो
ना करते शोर शराबा तो और क्या करते
तुम्हारे शहर में कुछ और काम काज भी हो
-निदा फ़ाज़ली
इसी ग़ज़ल के कुछ और अश'आर:
रहेगी वादों में कब तक असीर खुश-हाली
हर एक बार ही कल क्यूँ, कभी तो आज भी हो
(असीर = क़ैद, बंदी)
बदल रहे हैं कई आदमी दरिंदों में
मरज़ पुराना है उसका नया इलाज भी हो
अकेले ग़म से नई शायरी नहीं होती
ज़बान-ए-मीर में ग़ालिब का इम्तिज़ाज भी हो
(इम्तिज़ाज = मिलाना, मिश्रित करना, मिलावट)
ये ग़ज़ल बहुत अच्छी है इसे भी सुनियेगा कभी, ये रही लिंक https://youtu.be/DjvVBptW-Dwhttps://youtu.be/DjvVBptW-Dw
तो आशा है कि अपने जीवन को BETTER करने के लिए आप इन 3 शब्दों Serenity= शांति, Courage= साहस, एवं Wisdom= सद्बुद्धि से मिलकर बनी हुई इस सरल सी बात को सदैव याद रखेंगे । शुक्रिया!💐
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