आज भारत जैसे लोकतंत्र में संविधान ने कानून व्यवठा बनाए रखने का काम पुलिस को और विवाद की स्थिति में सजा देने का काम न्यायपालिका को दिया हुआ है। किन्तु जब गहराई से देखेंगे तो हर सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार होता है, शिकायत लिखी तक नहीं जाती, और अगर लिखी भी जाती है तो कमजोर जांच और सबूतों के आधार पर कमजोर चार्जशीट से अधिकतर केसेज में सही न्याय हो ही नहीं पाता।
एक ही जज के पास हजारों केस होने के कारण अदालतों में बस तारीख पे तारीख मिलती रहती है और सालों साल चलने के बाद सही न्याय हो है नहीं पाता। लोग बचते हैं अदालतों के चक्कर लगाने से क्यूंकि यहीं इमेज है इस देश में न्याय प्रक्रिया की।
सरकारी कर्मचारी निरंकुश होकर भ्रष्टाचार करते हैं, विधायक सांसद भी 5 सालों तक सत्ता का दुरुपयोग करके भ्रष्टाचार करके आम आदमी की जिंदगी की प्रवाह न करते हुए ताकत का गलत उपयोग करके केवल पैसा बनाते हैं। कर्मचारी राजनीतिज्ञ पुलिस और न्यायपालिका का गठजोड़ एक दूसरे के साथ संतुलन बनकर आम वोटर जनता और देश की हालत दयनीय बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।
राइट टू रिकॉल (RRP) यानि वोट वापसी और जूरी कोर्ट एक ताकत है जो आम वोटर को इस भ्रष्टाचार को रोकने में और उसकी दशा में सुधार करने के लिए बेहद शक्ति प्रदान करेगा । ये एक गेम चेंजर होगा जो कि इस देश का भविष्य सुनहरा बना सकता है।
भगत सिंह आदि महान क्रांतिकारियों ने भी ऐसे ही विचारों का समर्थन किया था ताकि एक गरीब से गरीब इंसान को भी उसका सही अधिकार मिल सके इस यूटयूब लिंक पर जानकारी देखें
। https://youtu.be/478vtSYhdOE
राजनीतिक दल और ताकतवर लोग तथा संस्थाएं कभी भी आम वोटर को ऐसी ताकत देकर शक्ति देना नहीं चाहेंगी, और इन कानूनों को कभी भी लागू करना नहीं चाहेंगी। पर आम जनता को इन कानूनों के पक्ष में खड़ा रहकर इन्हे लागू करवाना होगा तभी इस देश का हर वोटर ताकतवर होगा और नेता अधिकारी न्यायपालिका पुलिस सब मिलकर अम जनता का भला करेंगे और उचित सम्मान देंगे।
पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेई वोट वापसी यानि right to recall पर ये कहते हैं https://youtu.be/1xCjwM3PL8U
RRP और जूरी कोर्ट ही एक आम वोटर को किंगमेकर से एक सच्चा किंग बनाएगा जहां पर वो इतना शक्तिशाली होगा की नेता जज और पुलिस को भी रखने और हटाने की ताकत एक आम वोटर के हाथ में होगी। लोग सही सेवक चुन पाएंगे और गलत को हटा पाएंगे।
शायद आप लोगों ने अंग्रेजी फिल्म 12 angry men देखी होगी इसका हिंदी रीमेक 'एक रुका हुआ फैसला' थी, यूं ट्यूब पर फ्री में उपलब्ध है ज़रूर देखिएगा । फिल्म में दिखाया गया है कि एक व्यक्ति की हत्या का इल्ज़ाम उसके बेटे पर लगाया जाता है इसका फैसला करने के लिए जूरी के 12 जज एक कमरे में इकट्ठा होते हैं, जब तक सभी जाजेक फैसले पर सहमत हो जाएं वो कमरे से बाहर नहीं सकते । शुरू में कोई जज अपने पूर्वाग्रह के चलते तो कोई जज जल्दी बाहर जाने की जल्दी में होता है और 12 में से 11 जज उसके बेटे के ही हत्यारे होने पर सहमत होते हैं। किन्तु एक जज के न मानने पर सबको बहस करनी पड़ती है और अंततः आखिरी सही फैसला हो पाता है। फिल्म और फिर वर्तमान भारत की न्याय प्रक्रिया के बारे में ज़रूर सोचिएगा ये रही फिल्म की यूं ट्यूब लिंक
https://youtu.be/mLrPhR0Gzn4
यहीं है RRP और जूरी कोर्ट की सच्ची तस्वीर जिसमें होगी
ईमानदार पुलिस, ईमानदार अफसर और ईमानदार न्यायपालिका आम जनता की सेवा में..
दृष्टीइस संबंध में दृष्टि IAS का ये निबंध भी काफी अच्छा है ।
कुछ बुद्धिजीवी जो इस विषय को काफी अच्छे से समझते हैं तथा किसी संशय को दूर कर सकते उनसे इस फेसबुक पेज के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है। पेज का लिंक ये है फेसबुक पेज लिंक
एक वेबसाइट भी जिनसे संपर्क कर इस जनता की सेवा करने वाले अभियान के बारे में जानकारी ले सकते हैं ये रहा लिंक https://www.facebook.com/RightToRecall/
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