Monday, June 14, 2021

वोट वापसी का अधिकार Right To Recall और JURY COURT

जिस तरह से RTI के लागू होने से पारदर्शिता आती है उसी तरह वोट वापसी कानून और जूरी कोर्ट के लागू होने से सरकारी विभागों और न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है। 

आज भारत जैसे लोकतंत्र में संविधान ने कानून व्यवठा बनाए रखने का काम पुलिस को और विवाद की स्थिति में सजा देने का काम न्यायपालिका को दिया हुआ है। किन्तु जब गहराई से देखेंगे तो हर सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार होता है, शिकायत लिखी तक नहीं जाती,  और अगर लिखी भी जाती है तो कमजोर जांच और सबूतों के आधार पर कमजोर चार्जशीट से अधिकतर केसेज में सही न्याय हो ही नहीं पाता।
एक ही जज के पास हजारों केस होने के कारण अदालतों में बस तारीख पे तारीख मिलती रहती है और  सालों साल चलने के बाद सही न्याय हो है नहीं पाता। लोग बचते हैं अदालतों के चक्कर लगाने से क्यूंकि यहीं इमेज है इस देश में न्याय प्रक्रिया की। 
सरकारी कर्मचारी निरंकुश होकर भ्रष्टाचार करते हैं, विधायक सांसद भी 5 सालों तक सत्ता का दुरुपयोग करके भ्रष्टाचार करके आम आदमी की जिंदगी की प्रवाह न करते हुए ताकत का गलत उपयोग करके केवल पैसा बनाते हैं। कर्मचारी राजनीतिज्ञ पुलिस और न्यायपालिका का गठजोड़ एक दूसरे के साथ संतुलन बनकर  आम वोटर  जनता और देश की  हालत दयनीय बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।
 
राइट टू रिकॉल (RRP) यानि वोट वापसी और जूरी कोर्ट एक ताकत है जो आम वोटर को इस भ्रष्टाचार को रोकने में और उसकी दशा में सुधार करने के लिए बेहद शक्ति प्रदान करेगा । ये एक गेम चेंजर होगा जो कि इस देश का भविष्य सुनहरा बना सकता है। 
भगत सिंह आदि महान क्रांतिकारियों ने भी ऐसे ही विचारों का समर्थन किया था ताकि एक गरीब से गरीब इंसान को भी उसका सही अधिकार मिल सके इस यूटयूब लिंक पर जानकारी देखें 
। https://youtu.be/478vtSYhdOE

 राजनीतिक दल और ताकतवर लोग तथा संस्थाएं कभी भी आम वोटर को ऐसी ताकत देकर शक्ति देना नहीं चाहेंगी, और इन कानूनों को कभी भी लागू करना नहीं चाहेंगी। पर आम जनता को इन कानूनों के पक्ष में खड़ा रहकर इन्हे लागू करवाना होगा तभी इस देश का हर वोटर ताकतवर होगा और नेता अधिकारी न्यायपालिका पुलिस सब मिलकर अम जनता का भला करेंगे और उचित सम्मान देंगे। 
पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेई वोट वापसी यानि right to recall पर ये कहते हैं https://youtu.be/1xCjwM3PL8U 

RRP और जूरी कोर्ट ही एक आम वोटर को किंगमेकर से एक सच्चा  किंग बनाएगा जहां पर वो इतना शक्तिशाली होगा की नेता जज और पुलिस को भी रखने और हटाने की ताकत एक आम वोटर के हाथ में होगी। लोग सही सेवक चुन पाएंगे और गलत को हटा पाएंगे। 
शायद आप लोगों ने अंग्रेजी फिल्म 12 angry men देखी होगी इसका हिंदी रीमेक 'एक रुका हुआ फैसला' थी, यूं ट्यूब पर फ्री में उपलब्ध है ज़रूर देखिएगा । फिल्म में दिखाया गया है कि एक व्यक्ति की हत्या का इल्ज़ाम उसके बेटे पर लगाया जाता है इसका फैसला करने के लिए जूरी के 12 जज एक कमरे में इकट्ठा होते हैं, जब तक सभी जाजेक फैसले पर सहमत हो जाएं वो कमरे से बाहर नहीं सकते । शुरू में कोई  जज अपने पूर्वाग्रह  के चलते तो कोई जज जल्दी बाहर जाने की जल्दी में  होता है और  12 में से 11 जज उसके बेटे के ही हत्यारे होने पर सहमत होते हैं।  किन्तु एक जज के न मानने पर सबको बहस करनी पड़ती है और अंततः आखिरी  सही फैसला हो पाता है। फिल्म  और फिर वर्तमान भारत की न्याय प्रक्रिया के बारे में ज़रूर सोचिएगा ये रही फिल्म की यूं ट्यूब लिंक 
https://youtu.be/mLrPhR0Gzn4

यहीं है RRP और जूरी कोर्ट की सच्ची तस्वीर जिसमें होगी 
ईमानदार पुलिस, ईमानदार अफसर और ईमानदार  न्यायपालिका आम जनता की सेवा में..

दृष्टीइस संबंध में दृष्टि IAS का ये निबंध भी काफी अच्छा है ।
कुछ बुद्धिजीवी जो इस विषय को काफी अच्छे से समझते हैं तथा किसी संशय को दूर कर सकते उनसे इस फेसबुक पेज के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है। पेज का लिंक ये है फेसबुक पेज लिंक
एक वेबसाइट भी जिनसे संपर्क कर इस जनता की सेवा करने वाले अभियान के बारे में जानकारी ले सकते हैं ये रहा लिंक https://www.facebook.com/RightToRecall/
 

Friday, June 11, 2021

समाज और रिश्तों को कमजोर करता पूंजीवाद :

सड़ते पूँजीवाद के कारण आपके आसपास बहुत कुछ बड़ी तेज़ी से बदल रहा है। आर्थिक बदलाव जैसे बेरोज़गारी का बढ़ना, जॉब क्रिएशन का घटते जाना, अमीरी और गरीबी के बीच का फ़ासला बड़ा होते जाना, मध्य वर्ग की मुश्किलें बढ़ते जाना आदि तो आसानी से दिखाई दे जाता है लेकिन जज़्बाती और सामाजिक बदलाव अमूमन आसानी से नज़र नहीं आते, लेकिन जब आप इधर ध्यान देते हैं तो आपको दिखाई पड़ता है कि आपके इर्द गिर्द की दुनिया तेज़ी से बदल रही है। 
शहरों में पड़ोसी फ्लैट या मकान में कौन रहता है, उनके हालात कैसे हैं आदि पर तवज्जो देना बहुत पहले ख़त्म हो गया था, सोसाइटीज में रहने वालों के बीच भी रिश्ते व्यवस्था को लेकर तो हैं लेकिन जज़्बाती रिश्ते यहाँ भी कमज़ोर हुए हैं। इस तरह के बदलाव सबसे ज़्यादा गाँवों में नज़र आते हैं, ख़ासतौर पर अगर आप शहरों में आबाद हो गए हैं और लंबे समय बाद गाँव जाते हैं तो आप इन बदलावों को आसानी से देख पाएंगे। 

गाँवों में अब लोग पड़ोसी के घर नहीं बल्कि चाय की दुकान पर बैठते हैं। खेती का सारा काम मशीनों के हवाले हो चुका है तो पूरे साल का काम एक सप्ताह में निपट जाता है, ऐसे में लोगों के पास खूब समय है। टीवी हर घर में हैं और जो ज़हर वो उड़ेल रहा है, उसे यहाँ सच माना जाता है। इसका नतीजा ये हुआ है कि मज़हबी बुनियादों पर यहाँ भी दूरियाँ बढ़ने लगी हैं। चाय की दुकानों पर होने वाली चर्चा टीवी पर आने वाली कुश्ती से तय हो रही है। 
एक और बड़ा परिवर्तन हुआ है, हर समझदार आदमी को लग रहा है कि ऐसी चर्चा से बचना चाहिए, ऐसे में नुक्कड़ की इस चर्चा में सिर्फ साम्प्रदायिक नफरत से संक्रमित लोग बचते हैं, अक़्ल की बातें करने वालों के लिए ये जगह सुरक्षित नहीं रही। 

पारिवारिक बदलाव और ज़्यादा परेशान करने वाले हैं। अभी 20-25 साल पहले परिवार भावनात्मक सुरक्षा का सबसे बड़ा केंद्र या पनाहगाह था, अब इसमें तेज़ी से बदलाव हो रहा है। भाइयों के बीच की दूरियाँ बढ़ रही हैं, बहुएं बुजुर्गों से दूर रहना चाहती हैं, जॉब की वजह से औलादों और उनके वालिदैन के बीच की दूरियाँ बढ़ रही हैं। बच्चों के पालन पोषण में परिवार के सदस्यों की भूमिका बहुत अहम है, उन्हें चाचा, ताया, दादी नानी और अपने जैसे दूसरे बच्चों के बीच रहकर प्रेम की जो पाठशाला मयस्सर थी, अब नहीं है। बच्चे और बूढ़े सबसे ज़्यादा असुरक्षित हैं और ये असुरक्षा लगातार बढ़ती जा रही है।

पूँजीवादी निज़ाम में सबकुछ आपके ज़ेब के वज़न से तय होता है,  लेकिन ज़ेब का वज़न लगातार कम होता जाता है, ऐसे में पारिवारिक और सामाजिक जीवन भी तहस नहस हो रहा है। इस बिखराव का नतीजा है अवसाद और अवसाद से पैदा होने वाली बीमारियां। बीमारियां जिसकी दवा उद्योग को ज़रूरत है। 

इस तरह पूँजीवाद आपसे वो सब कुछ छीन रहा है जो एक इंसान के रूप में आपने सदियों में अर्जित किया है। ये आपकी और आपके तहज़ीब की हत्या कर रहा है, चूँकि ये हत्या बेहद योजनाबद्ध और सॉफिस्टिकेटेड तरीके से किया जा रहा है इसलिए आप बिना किसी चीख़ पुकार के मरे जा रहे हैं, कमाल तो ये है कि ख़ुद को मारने में सहयोग भी दे रहे हैं। 
सोचिये और इस बारे में अपने अनुभव और अवलोकन शेयर कीजिये। परस्पर विचार-विमर्श से शायद हम ख़ुद को, समाज को और इस दुनिया को इन ज़हरीली मौत से बचा सकें।
(~मूल लेख श्री  Dr. Salman Arshad का है जिसे फेसबुक से लिया गया है।)

सरफरोशी की तमन्ना ..बिस्मिल

'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है' ये ग़ज़ल जब कानों में पड़ती है तो ज़ेहन में भगत सिंह और साथियों कि याद आती है और राम प्रसाद बिस्मिल का चेहरा आता है. इस कविता(गजल) ने आजादी की लड़ाई में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। 


ये ग़ज़ल क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल का प्रतीक सी बन गई है. लेकिन बहुत कम ही लोगों को पता होगा कि इसके रचयिता दरअसल रामप्रसाद बिस्मिल नहीं, बल्कि शायर बिस्मिल अज़ीमाबादी थे.


 बिस्मिल अज़िमाबादी (1901 - 1978) पटना, बिहार से एक उर्दू कवि थे। 1921 में उन्होंने "सरफरोशी की तमन्ना" नामक देशभक्ति कविता लिखी थी। 


और इस कविता को राम प्रसाद बिस्मिल (जो एक महान भारतीय क्रान्तिकारी नेता और भगत सिंह के साथी थे) ने मुकदमे के दौरान अदालत में अपने साथियों के साथ सामूहिक रूप से गाकर बहुत लोकप्रिय बनाया।


सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है

ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तिरे ऊपर निसार
ले तिरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफ़िल में है

वाए क़िस्मत पाँव की ऐ ज़ोफ़ कुछ चलती नहीं
कारवाँ अपना अभी तक पहली ही मंज़िल में है

रहरव-ए-राह-ए-मोहब्बत रह न जाना राह में
लज़्ज़त-ए-सहरा-नवर्दी दूरी-ए-मंज़िल में है

शौक़ से राह-ए-मोहब्बत की मुसीबत झेल ले
इक ख़ुशी का राज़ पिन्हाँ जादा-ए-मंज़िल में है

आज फिर मक़्तल में क़ातिल कह रहा है बार बार
आएँ वो शौक़-ए-शहादत जिन के जिन के दिल में है

मरने वालो आओ अब गर्दन कटाओ शौक़ से
ये ग़नीमत वक़्त है ख़ंजर कफ़-ए-क़ातिल में है

माने-ए-इज़हार तुम को है हया, हम को अदब
कुछ तुम्हारे दिल के अंदर कुछ हमारे दिल में है

मय-कदा सुनसान ख़ुम उल्टे पड़े हैं जाम चूर
सर-निगूँ बैठा है साक़ी जो तिरी महफ़िल में है

वक़्त आने दे दिखा देंगे तुझे ऐ आसमाँ
हम अभी से क्यूँ बताएँ क्या हमारे दिल में है

खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है..

अब न अगले वलवले हैं और न वो अरमाँ की भीड़
सिर्फ़ मिट जाने की इक हसरत दिल-ए-'बिस्मिल' में है ..
- बिस्मिल अज़ीमाबादी

राम प्रसाद बिस्मिल के बारे में व्यक्तिगत जानकारी इस प्रकार है; (Personal Information about Ram Prasad Bismil)

पूरा नाम: राम प्रसाद बिस्मिल

उपनाम : 'बिस्मिल', 'राम', 'अज्ञात'

जन्मस्थल : शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश

माता: मूलमती

पिता:       श्री मुरलीधर

भाई/बहन: रमेश सिंह, शास्त्री देवी, ब्रह्मादेवी, भगवती देवी

आन्दोलन: भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम

प्रमुख संगठन: हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन (HRA)

उपजीविका: कवि, साहित्यकार

राष्ट्रीयता: भारतीय

स्मारक: अमर शहीद पं॰ राम प्रसाद बिस्मिल उद्यान, ग्रेटर नोएडा

संग्रहालय:    शाहजहाँपुर

समाधि:      बाबा राघवदास आश्रम, बरहज(देवरिया), उ0प्र0

बिस्मिल का प्रारम्भिक जीवन एवं शिक्षा (Early life and education of Ram Prasad Bismil):-

राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर शहर के खिरनीबाग मुहल्ले में श्री मुरलीधर और माता मूलमती की दूसरी सन्तान के रूप में हुआ था. राम प्रसाद बिस्मिल को घर में सभी लोग प्यार से "राम" कहकर ही पुकारते थे.

बिस्मिल पढने लिखने में अच्छे विद्यार्थी नहीं थे और खेलने में ज्यादा रूचि लेते थे. लगभग 14 वर्ष की आयु में रामप्रसाद को अपने पिता की सन्दूकची से रुपये चुराने की आदत पड़ गयी थी. इन चुराए गए रुपयों से वह सिगरेट, भाँग और उपन्यास खरीदा करते थे.

राम प्रसाद ने पं॰ गेंदालाल दीक्षित के मार्गदर्शन में "मातृवेदी" नाम का एक संगठन बनाया था. इस दल के लिये धन एकत्र करने के उद्देश्य से रामप्रसाद ने, जून 1918 से सितम्बर 1918 तीन डकैतियाँ भी डालीं थीं.

काकोरी-काण्ड क्या है? (What is Kakori Case?)

क्रांतिकारी पार्टी के कार्य हेतु धन की आवश्यकता पहले भी थी किन्तु अब तो और भी अधिक बढ़ गयी थी. इसलिए उन्होंने 7 मार्च 1925 को बिचपुरी तथा 24 मई 1925 को द्वारकापुर में दो राजनीतिक डकैतियाँ डालीं परन्तु कुछ विशेष धन प्राप्त नहीं हुआ था.इन राजनीतिक डकैतियों में उनके साथी भी मारे गये थे जिसके कारण उन्होंने तय किया कि वे अब केवल सरकारी खजाना ही लूटा करेंगे.


सरकारी खजाना लूटने के इरादे से शाहजहाँपुर में उनके घर पर 7 अगस्त 1925 को हुई एक इमर्जेन्सी मीटिंग में हुए निर्णय के अनुसार 9 अगस्त 1925 को शाहजहाँपुर रेलवे स्टेशन से बिस्मिल के नेतृत्व में कुल 10 लोग, जिनमें राजेन्द्र लाहिड़ी, अशफाक उल्ला खाँ,चन्द्रशेखर आजाद, मन्मथनाथ गुप्त, शचीन्द्रनाथ बख्शी, मुकुन्दी लाल, केशव चक्रवर्ती (छद्मनाम), मुरारी शर्मा (छद्मनाम), तथा बनवारी लाल,8 डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर रेलगाड़ी में सवार हुए.

सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर जैसे ही लखनऊ से पहले काकोरी रेलवे स्टेशन पर रुक कर आगे बढ़ी, क्रान्तिकारियों ने चेन खींचकर उसे रोक लिया और सरकारी खजाने का बक्सा नीचे गिरा दिया. बक्से को खोलने की कोशिश की गयी लेकिन वह नहीं खुला तो हथौड़े से बक्सा खोला गया और खजाना लूट लिया गया लेकिन जल्दी के कारण चाँदी के सिक्कों व नोटों से भरे चमड़े के कुछ थैले वहीँ छूट गये.

ब्रिटिश सरकार ने इस डकैती को काफी गंभीरता से लिया और सी॰ आई॰ डी॰ इंस्पेक्टर आर॰ ए॰ हार्टन के नेतृत्व में स्कॉटलैण्ड की सबसे तेज तर्रार पुलिस को इसकी जाँच का काम सौंप दिया.

6 अप्रैल 1927 को विशेष सेशन जज ए0 हैमिल्टन ने 115 पृष्ठ के निर्णय में प्रत्येक क्रान्तिकारी पर गंभीर आरोप लगाये और डकैती को ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने की एक सोची समझी साजिश बताया था.

राम प्रसाद को गोरखपुर जेल में फाँसी: (Death of Ram Prasad Bismil)
बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा का आखिरी अध्याय (अन्तिम समय की बातें) 16 दिसम्बर 1927 को पूरा किया था. उन्होंने 18 दिसम्बर 1927 को माता-पिता से अन्तिम मुलाकात की और सोमवार 19 दिसम्बर 1927 को प्रात:काल 6 बजकर 30 मिनट पर गोरखपुर की जिला जेल में उन्हें फाँसी दे दी गयी थी. उनकी अंतिम यात्रा में लगभग 1.5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था.


रामप्रसाद 'बिस्मिल एक महान क्रांतिकारी, कवि, शायर, साहित्यकार थे. उन्होंने कई कविताएँ, ग़ज़लें एवं पुस्तकें लिखी थीं. उनके द्वारा लिखी गयी कुछ किताबों के नाम (Ram Prasad Bismil books) इस प्रकार हैं.

1. मैनपुरी षड्यन्त्र,

2. स्वदेशी रंग,

3. चीनी-षड्यन्त्र (चीन की राजक्रान्ति)

4. अरविन्द घोष की कारावास कहानी

5. अशफ़ाक की याद में,

6. सोनाखान के अमर शहीद-'वीरनारायण सिंह

7. जनरल जार्ज वाशिंगटन

8. अमरीका कैसे स्वाधीन हुआ?

इस प्रकार भारत माँ की सेवा में सर कटाने की तमन्ना रखने वाला भारत मां का यह वीर सपूत भारत को आजादी दिलाने के लिए ख़ुशी ख़ुशी फांसी के फंदे पर चढ़ गया था.

 ऐसे वीर सपूत को न सिर्फ किसी विशेष दिन याद करके औपचारिकता निभानी चाहिए, बल्कि  अपनी हर सांस के साथ हमें उनके ऊंचे आदर्शों को अपने मन, वचन और कर्म में आत्मसात करना चाहिए, यहीं एक आदर्श श्रद्धांजलि होगी। 

Tuesday, June 8, 2021

NARCOS, NETFLIX की एक बेहतरीन वेब सीरिज:

NARCOS (80 के दशक के सबसे अमीर कोलंबियन ड्रग तस्कर डॉन पाब्लो एस्कोबार के जीवन पर Netflix की शानदार सीरिज हिंदी में): 
 
अगर आप समझते हैं कि डॉन का मतलब गुंडा होता है तो शायद आपको जानने की जरूरत है कि डॉन का मतलब " बड़े" या प्रमुख होता है। और ये बहुत इज्जत देते हुए किसी को दिया जाने वाला संबोधन रहा है जो कि 90s के दशक के बाद सबसे बदनाम हुए शब्दों में से एक हैं। 
आज से एक साल पहले मुझे किसी ने नेटफ्लिक्स पर नार्कोस वेब सीरीज देखने की सलाह दी थी लेकिन मैं पहले एपिसोड से आगे नही बढ़ पाया क्यूंकि किसी दूर देश की संस्कृति और कहानी को केवल सबटाइटल्स से समझना दुष्कर था एवं  1ST एपिसोड बहुत खास नहीं लगा था।
उसके बाद कई बार जब भी नेटफ्लिक्स की बात चली बहुतों ने  नार्कोस का नाम लिया…और मैने एक बार फिर से इसको देखने का पूरा मन बना लिया और अब तो यह हिन्दी में तथा इंगलिश सबटाइटल्स के साथ उपलब्ध है….इस बार मैंने पहले एपिसोड को देखा और दूसरे एपिसोड की तरफ बढ़ा…अब यह रोमांचक लगने लगा था…और फिर…एक के बाद एक इसके दोनों सीजन खत्म कर दिए…..मैनें इसके 20 एपिसोड लगभग 1 महीने में देखे क्यूंकि मैं एकांत में , बहुत ध्यान से , एक एक डायलॉग सुनना समझना पसंद करता हूं। और निस्संदेह ये अब तक की सबसे अच्छी वेब सीरिज में से एक है। 

कहानी की शुरुआत 1980 के दशक से शुरू होती है जब अमेरिकन सरकार के ड्रग्स निरोधक संस्था  (DEA) का अफसर एजेंट मर्फी कोलम्बिया में आता है और उसका एक ही  लक्ष्य है कि कोलंबिया से अमेरिका में कोकीन की चल रही अवैध तस्करी के कारोबार का नामोनिशान मिटाना… पर पाब्लो एस्कोबार की एंट्री के बाद यह सीरीज अलग ही मुकाम तक पहुँच जाती है…..बेशक पाब्लो एस्कोबार  बुरा रहा होगा पर उसके किरदार में ऐसा चुंबकीय आकर्षण था कि मैंने उसके हर एक दृश्य को सांस रोक कर देखा, आप भी उससे अपना जुड़ाव नहीं रोक पाएंगे….जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है पाब्लो के बारे में और जानने की चाह भी बढ़ती जाती है….कहानी के बीच में पाब्लो की रियल लाईफ के वीडियोज को देखना रोमांच को बढ़ावा देता है….शायद आप भी बीच बीच में गूगल से अधिक जानकारी लेना चाहेंगे।
इस सीरीज को बनाने वाली टीम ने बहुत रिसर्च और मेहनत की है इसके दृश्यों और कहानी को वास्तविक रखने के लिए। 
छोटी छोटी मिन्यूट डिटेल्स पर भी आप गौर करेंगे तो आपको वास्तविकता से बेहद आस पास लगेगा। मेरे जैसे हॉलीवुड की फिल्म देखने वाले को भी सभी एक्टर्स नए लगे। पाब्लो की भूमिका को ब्राजीलियन अभिनेता वैगनर मौरा ने निभाया है और बेहतरीन काम किया है….यह भूमिका आपको हमेशा याद रहने वाली है…..उसका सोफे से उठना…अपनी कमर से नीचे खिसक गई पतलून को ऊपर उठाना, धीरे धीरे चलना…आखों को ऊपर उठा कर भर्राए हुये कंठ से बोलना , सब याद रहेगा…..(पाब्लो की भूमिका को जो ऊंचाई उन्होंने यहां दे दी  है अब किसी और को पाब्लो के रूप में देखना कम से कम मुझे तो जमेगा नही…)

एजेन्ट पेनिया के रोल में पेड्रो पास्कल हैं…जिनके माथे पर खिंच जाती लकीरें उनको जँचती हैं …यह एक ऐसा किरदार है जो कॉल गर्ल्सके साथ सोकर खुफिया जानकारी जुटाता है किन्तु सही और गलत के चक्कर में खुद को उलझा हुआ भी पाता है ….
पर अंत में वह अपनी भावनाओं पर जीत प्राप्त करता है और एक युद्ध को युद्ध की तरह लड़ता है…ऐसा युद्ध जिसमें कोई नैतिक सिद्धान्त नही है…बस एक ही चीज़ अहम है और वो है जीत…फिर कैसे भी मिले…जीतना महत्वपूर्ण हो जाता है….एजेंट मर्फी का किरदार बहुत बार पेनिया के रोल के आगे फीका पड़ जाता है. कर्नल कारिलो की भूमिका भी शानदार लिखी गई है।  

पाब्लो की मिसेज के रूप में मेक्सिकन अभिनेत्री पालीना गितान हैं ….शुरू में यह किरदार बहुत साधारण लग रहा था पर अपनी आँखों से वह वो सब भी कह जाती हैं जो उनको स्क्रिप्ट में लिख कर नही दिया गया होगा ..
यह महिला जो पाब्लो की बीवी है, साधारण सी आम बीवी की तरह घर परिवार संभालती है, पर समय आने पर बहुत मजबूत भी है....और कभी कभी असहाय भी…इस एक किरदार में बहुत से रंग हैं…हर स्त्री और इंसान की तरह।

इस सीरीज में दिखाई दिया हरेक किरदार बहुत महत्वपूर्ण है और हर एक ने अपने काम को शानदार तरीके से अंजाम दिया है उनके डायलॉग भी साधारण भाषा में किन्तु बेहतरीन लिखे गए…चाहे वो कोई एक छोटी भूमिका में रहा हो या मुख्य किरदार निभाने वाला हो…सब ने बांध के रखा…
पात्रों द्वारा लोकल स्पेनिश भाषा में बात करना भी मज़ेदार लगता है,  उनका अनुवाद हिन्दी में न होने के कारण अच्छे से समझने के लिए  आपको स्क्रीन के नीचे सबटाइटल की मदद लेनी पड़ेगी जो थोड़ा सिरदर्द लगता है (किन्तु भाषा, संस्कृति, चरित्र  का संबंध और गहराई आप समझ पाएंगे तो आपको इस सच्ची  कहानी का और भी मजा ही आएगा जैसे की  दोस्तों के बीच कई गालियां बस यूं ही कह दी जाती है पर उसका दोस्तों के बीच विद्वेष बिल्कुल नहीं होता है बल्कि वो आपसी आत्मीयता ही बढ़ाता है )….
पाब्लो सहित हर चरित्र को यथासंभव उसकी वास्तविक शैली में पेश किया गया है, बहुत रिसर्च के साथ बनाया गया है ये स्पष्ट महसूस होता है….और स्क्रिप्ट इतनी कसी हुई है कि 45 मिनट का एपिसोड पल में बीत जाता लगता है…स्क्रीनप्ले बहुत कमाल का है….कोई एक भी सीन ज़रा भी बोर नही करता….सीरीज का बैकग्राउंड संगीत बहुत बढ़िया है….(टाईटल गीत सुरीला है और उसका हिंदी मतलब समझेंगे तो फैन हो जाएंगे. from here get song meaning)..

(I am the fire that burns your skin,)
Soy el fuego que arde tu piel
(I am the water that kills your thirst.)
soy el agua que mata tu sed.
(Of the castle, I am the tower,)
El castillo, la torre yo soy
(the sword that guards the treasure.)
la espada que guarda el caudal.
(You, the air that I breathe,)
tu el aire que respiro yo
(and the light of the moon on the sea.)
y la luz de la luna en el mar.
(The throat that longs to be choked)
La garganta que ansio mojar
(that I’m afraid I’ll drown in love.)
que temo ahogar de amor.

(And which desires you are going to give me.)

y cuales deseos me vas a dar
(just to look is treasure enough,)
mi tesoro basta con mirarlo,
(it will be yours, it will be yours.)
tuyo será, y tuyo será.


Spanish lyrics, courtesy of Genius:
Soy el fuego que arde tu piel
Soy el agua que mata tu sed
El castillo, la torre yo soy
La espada que guarda el caudal

Tú, el aire que respiro yo
Y la luz de la luna en el mar
La garganta que ansío mojar
Que temo ahogar de amor

¿Y cuáles deseos me vas a dar? (oooh)
Dices tú: "Mi tesoro, basta con mirarlo y tuyo será, y tuyo será."
शायद मैं बहुत ज्यादा तारीफ कर रहा हूँ पर सब कुछ तारीफ के काबिल है, देखने वाला फैन हो ही जायेगा….

सीरीज के बहुत सारे सीन इतने ज़बरदस्त हैं कि अकेले में भी आप ताली बजा देंगे….जैसे की पाब्लो का पुलिस को लेड या सिल्वर (रिश्वत लेकर मुझे तस्करी करने दो या फिर मेरी गोली खाने को तैयार रहोplato or plomo सीन ) कहकर रिश्वत देना और टीवी को ट्रक में भरकर नाका पार करना,

 पाब्लो का अपने चचेरे भाई और  रिश्तेदारों के साथ तस्करी का बड़ा व्यापार खड़ा करना (जिसमें वो हर महीने 25000 का रबर बैंड खरीदते थे नोटों की ग़ड्डी बनाने के लिए)
, पाब्लो का  देश का सांसद बनकर संसद जाना और आगे उसी संसद में हमला करवा कर जजों को मरवा देना, राष्ट्रपति पुलिस और सेना को समझौते पर मजबूर करना, ड्रग तस्करों का आपसी युद्ध,  डॉन पाब्लो का खुद ही जेल जाना वहां अड्डा बना लेना, जेल से भागना, अपनी बेटी को ठंड से बचाने के लिए लाखों डॉलर्स को आग के हवाले कर देना, अमेरिकन DEA और कोलंबियन स्पेशल कमांडो फोर्स का खोजी अभियान और सामंजस्य, राष्ट्रपति और सेना प्रमुख का शानदार नपा तुला संवाद और जीवन…ऐसे बहुत सारे सीन हैं जो इस शो को बहुत ज्यादा खास बनाते हैं...

हालांकि थोड़े बहुत न्यूड सीन कुछ एपिसोड में  हैं…हिंसा और गाली के भी कुछ दृश्य हैं …ये कहानी को अधिक वास्तविक तो  बनाते हैं पर इसी वजह से आप इसको फेमली के साथ बैठ कर देख नहीं पाएंगे….बेहतर होगा कि अकेले में  आराम से देखो तो निश्चित ही बहुत मज़ा आएगा….
आखिर में मैं पाब्लो के बारे में यही कहना चाहता हूं कि वो सच में एक ऐसा शख्स था जिसके बारे में जितना भी जानते जाओ उतना कम लगता है…और कहीं न कहीं वो खलनायक होने के बावजूद दर्शकों का दिल जीत लेने वाला साबित होता है….मैं इस कहानी के अंत में यही सोचता रहा कि अगर पाब्लो कोलंबिया का राष्ट्रपति बन जाता…जैसी की उसकी तीव्र इच्छा थी…तो क्या वो एक अच्छा राजनेता साबित हो सकता था ??..
तब शायद इस कहानी का अंत दुनिया के लिए  कुछ और ही होता…एक जगह उसका बॉडीगार्ड कहता है कि  " जिस तरह पेप्सी कोक दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार है अगर इसी तरह कोकीन यदि लीगल हो जाए तो आप दुनिया पर राज करेंगे! " 

कहानी को american officer के नज़रिए से कहा गया है साथ ही सभी पक्ष को भी दिखाने की कोशिश की है पर दूसरे  कोणों से देखने पर कहानी के सही- गलत तथा हीरो और विलेन बदल भी सकते हैं! अमेरिकन कितने दूध के धुले हुए हैं सबको पता ही है। फिर जब एक पक्ष है ही नहीं अपना पक्ष बताने के लिए तो फिर कहानी अधूरी है समझो,   जैसे कि फिल्म संजू देख कर आपको संजय दत्त महान इंसान ही लगेगा उसी तरह एस्कोबार एक विलेन। 
अंततः दुनिया के सबसे अमीर ड्रग तस्कर की रियल लाईफ की यह कहानी जरूर जरूर ही देखे जाने के  लायक है…..….यह शो netflix पर और proxy sites पर हिंदी और इंग्लिश भाषा में मौजूद है। 

🙏🙏🙏
Note: यदि आप किसी को होशियारी दे रहे हैं कि आप वेब सीरिज देखते हैं और आपने खुद NARCOS नहीं देखा है तो आपसे  बड़ा वाला **** कोई नहीं 😁 ।

Friday, May 28, 2021

मय रहे मीना रहे गर्दिश में पैमाना रहे...

मय रहे मीना रहे गर्दिश में पैमाना रहे ,
मेरे साक़ी तू रहे आबाद मय-ख़ाना रहे..
हश्र भी तो हो चुका रुख़ से नहीं हटती नक़ाब ,
हद भी आख़िर कुछ है कब तक कोई दीवाना रहे ..

कुछ नहीं हम दिल-जलों की बे-क़रारी कुछ नहीं ,
तेरी महफ़िल वो है जिसमें शम-ए-परवाना रहे ..

गोरे हाथों में बने , चौड़ी ख़त-ए-साग़र का अक्स ,
तेरे दस्त-ए-नाज़ में,  नाज़ुक सा पैमाना रहे ..

कम से कम इतना असर हो जो सुने आ जाए नींद ,
बेकसों की मौत का होंठों पर अफ़्साना रहे ...

रात जो जा बैठते हैं रोज़ हम मजनूँ के पास ,
पहले अन-बन रह चुकी है अब तो याराना रहे ..

हश्र हो तुम,  शर्म के पुतले न बनना हश्र में,
चाल इठलाई हुई अंदाज़ मस्ताना रहे ..

ताब उस की ला नहीं सकते कभी नाज़ुक दिमाग़ ,
बार सर है ,  दूर सर से ताज शाहाना रहे ..

उन के कहने से कभी यूँ कह लिए दो-चार शे'र ,
रात-दिन फ़िक्र-ए-सुख़न में कोई दीवाना रहे ..

उन बुतों के चलते हम ने दिल को पत्थर कर लिया ,
बुत रहे कोई न यारब कोई बुत-ख़ाना रहे ...

तूर पर आ मैं न मेरे सामने यूँ ही सही ,
हाँ ज़रा तर्ज़-ए-तकल्लुम,  बे-हिजाबाना रहे . ..

ज़िंदगी का लुत्फ़ है उड़ती रहे हर-दम 'रियाज़' ,
हम हों , शीशे की परी हो, घर परी-ख़ाना रहे ...

(Word's and meanings :
मय=liquor, शराब 
मीना = शराब रखने का बड़ा बरतन, प्याला, 
गर्दिश = बुरे दिन, revolution, circulation, misfortune, wandering about
पैमाना=शराब का गिलास, a vessel used to drink liquor
हश्र = प्रलय, कयामत, बुरी हालत, doomsday, resurrection, tumult प्रलय, हालत,
रुख़ = चेहरा , face, appearance,direction
नक़ाब= फेम, veil, mask
हद = सीमा, limit, boundry
आखिर=अंत , at the end, after all
दीवाना= crazy/ mad , पागल, खोया हुआ
दिलजलों = bereaved, frustrated
बेक़रारी =Unease , असहजता 
महफ़िल= assembly, gathering, party
परवाना = बारिश में होने वाले कीट, जो आग की तरफ आकर्षित होकर आते हैं और जलकर मर जाते हैं, lamp moth
खत ऐ सागर =  line of glass of wine, goblet
अक्स = परछाई , shadow, Reflection , प्रतिबिंब, छाया, साया 
दस्त ऐ नाज़ = नाजुक हाथ, चाहने वाले के हाथ gentle hand of beloved,
बेकसों = मजबूर, दया के पात्र , helpless-plural
अफसाना =  कहानी, वृतांत , story, Tale, novel
अनबन= झगड़ा  , बहस, quarrel 
याराना = दोस्ती , प्यार , friendship
इठलाई = घमंड भरी, मस्ती भरी, Put on airs; walk saucily; coquetishly
मस्ताना= शरारत / मस्ती से भरा हुआ, drunk, intoxicated 
ताब = सामर्थ्य , आभा, चमक , capacity , potential , warmth 
बार = बोझ , भरा हुआ , load , burden
ताज = मुकुट , crown 
शाहाना = राजसी , royal
फिक्र ऐ सुखन = गुलाबी कवितामय विचार , poetic thoughts
बुतों = पूज्यनीय , ईश्वर , idols, images, beloved ones
पत्थर = कड़ा , सख्त,   stone like strong, oppose 
यारब = हे ईश्वर , oh god
बुतखाना = प्रिय का निवास /घर , मंदिर , an idol-temple
तूर = असलियत , real undisguised face ,सच्चाई
 तर्ज़ ऐ तकल्लुम = बातचीत manner of conversation/ talking
बेहिजाबाना = स्पष्ठ, परदारहित , without coyness
लुत्फ= मज़ा , pleasure, enjoyment
परी खाना = fairy house)

कई सालों से सुनते आया था इस ग़ज़ल को ,जगजीत सिंह की आवाज़ में उनके एल्बम मिराज में सब एक से बढ़कर एक गाने है । ये भी काफी बेहतरीन है। रियाज खैराबादी की लिखी इस गजल को बेहतर समझने के लिए कविताकोश और रेख्ता पे पढ़ा। बहुत सी नई लाइनें भी पढ़ने को मिली , साथ ही कुछ बड़े बड़े कठिन उर्दू के शब्द थे जिनके मतलब जानने से गजल बेहतर समझ आयी। और अंततः जब शब्दों के अर्थ मालूम हुए और पूरी ग़ज़ल का अर्थ समझ आया तो भई वाह , क्या बेहतरीन लिखा है उन्होंने....कुछ लाइनों के तो एक से अधिक मतलब भी निकलते हैं, आपकी समझ जिस तरफ भी ले के जाए आपको एक खूबसूरत एहसास कराएगी, कुल मिलाकर बेहतरीन हैं। 
बस इतना ज्यादा पसंद आया इसलिए ही यहां शेयर कर रहा हूँ। आशा है ग़ज़ल पसंद करने वालों को पसंद आएगा।
 

Listen and watch at
https://youtu.be/yMHmyO4-mBk


Thursday, May 20, 2021

Dog Fight : It's not the size of the dog in the fight, it's the size of the fight in the dog. " - Mark Twain लड़ाई में कौन जीतेगा यह लड़ने वाले के भौतिक आकर पर नहीं बल्कि लड़ने वाले के अंदर कितना बड़ा लड़ाका हैं इससे तय होता है।...मार्क ट्वेन

" It's not the size of the dog in the fight, it's the size of the fight in the dog. "  - Mark Twain
 लड़ाई में कौन जीतेगा यह लड़ने वाले के भौतिक आकर पर नहीं बल्कि लड़ने वाले के अंदर कितना बड़ा लड़ाका हैं इससे तय होता है।...मार्क ट्वेन 
This is Usually refering to a small dog attacking a larger animal, this means that fierceness is not necessarily a matter of physical size, but rather mental/psychological attitude.
अर्थात एक छोटे कुत्ते का एक बड़े जानवर पर हमला करने का जिक्र करते हुए, इसका मतलब ये बताया गया है कि लड़ाई में केवल शारीरिक आकार विजेता नहीं बनाती, बल्कि मानसिक/मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण अधिक महत्वपूर्ण कारक है ।

(Mark Twain, whose real name was Samuel Clemens, was the celebrated author of several novels, including two major classics of American literature: The Adventures of Tom Sawyer and Adventures of Huckleberry Finn. He was also a riverboat pilot, journalist, lecturer, entrepreneur and inventor. Twain's written works challenged the fundamental issues that faced the America of his time; racism, evolving landscapes, class barriers, access to education and more.)
More detailed explanation :

It’s not the size of the battler that matters, but the size of stamina, passion, motivation, and struggle in the battler that he puts in a fight that makes him win.
No matter what size or how big a fight is, its only matters how much strength and need we have inside for that fight.
When it’s up to our life and no other way out then the real strength comes out if it’s necessary to fight. It’s your attitude, not your physicality that will dictate how you do in life.
It always an advantage to be big in a fight, but the bottom-line is, it's not always about the physical size but the spirit, the energy, the great passion and the will that's going to take you there.
Courage is inside all of us we just need to find it. Courage is not necessarily always about fighting battles, sometimes it knows when to walk away from a fight.

The reality of the upcoming days is in front of you and maybe, just maybe you feel a little blue.
Sometimes it seems impossible to overcome hard times, and it feels difficult to find happiness and light. This is when courage is most needed.
But your attitude and motivation will allow you to win every single battle doesn’t matter how much size of the trouble or worst circumstances.

 लड़ाई में दो शरीर नहीं लड़ रहे होते हैं, बल्कि शरीर के अंदर कि लड़ाईयां लड़ रही होती है। 
मार्क ट्वैन 
(मार्क ट्वेन, जिनका वास्तविक नाम सैमुअल क्लेमेंस था, अमेरिकी साहित्य के दो प्रमुख क्लासिक्स: द एडवेंचर्स ऑफ टॉम सॉयर और एडवेंचर्स ऑफ हकलबेरी फिन सहित कई उपन्यासों के प्रसिद्ध लेखक थे। वह एक रिवरबोट पायलट, पत्रकार, व्याख्याता, उद्यमी भी थे और आविष्कारक भी। ट्वेन के लिखित कार्यों ने उन मूलभूत मुद्दों को चुनौती दी जो उनके समय के अमेरिकन और अमेरिका सामना करते थे; नस्लवाद, विकसित परिदृश्य, वर्ग बाधाएं, शिक्षा तक पहुंच और बहुत कुछ..।)

विस्तृत तथा व्यापक अर्थ :
कुत्तों की लड़ाई का संदर्भ देते हुए बताया जा रहा है कि लड़ाई में लड़ने वाले का आकार मायने नहीं रखता है, बल्कि वास्तविकता में मायने रखती है  लड़ने वाले की क्षमता,  सहनशक्ति,  जुनून, प्रेरणा और उसके  संघर्ष का आकार जो वो उस लड़ाई में झोंकता है । और यही सब लड़ने वाले को जीत दिलाती है। 
(दरअसल कुत्तों की लड़ाई का संदर्भ इसलिए दिया गया है क्यूंकि उस अमेरिकन काल में कुत्तों की लड़ाई को विशेष माना जाता था और dog फाइट्स का आयोजन होता था जैसे आजकल भारत में क्रिकेट IPL होता है. इसी बात पर डिज़्नी की एक सपरिवार देखी जा सकने वाली अच्छी  फिल्म THE WHITE FANG है, देखिएगा कभी..  )
 लड़ाई कितनी भी छोटी या कितनी भी बड़ी क्यों न हो, यह मायने रखता है कि उस लड़ाई के लिए हमारे अंदर कितनी ताकत और जरूरत है , तथा हम उसमें अपना कितना झोंक देते है। 
 जब यह हमारे जीवन पर निर्भर करता है और कोई दूसरा रास्ता नहीं है तो असली ताकत सामने आती है अगर लड़ना जरूरी है।  वास्तव में वह आपका रवैया है, न कि आपकी शारीरिक क्षमता जो तय करेगी कि आप जीवन में कैसा और क्या  करते हैं।
 लड़ाई में बड़ा होना हमेशा एक फायदा देने वाला ज़रूर होता है, लेकिन लब्बोलुआब यह है कि यह हमेशा भौतिक आकार के बारे में नहीं है;  बल्कि आत्मा, ऊर्जा, महान जुनून और इच्छा है जो आपको वहां ले जाने वाली है जहां आप विजेता बनते हैं।

 साहस हम सभी के अंदर होता है बस हमें उसे खोजने की जरूरत होती है।  साहस हमेशा लड़ाई लड़ने के बारे में नहीं होता है, कभी-कभी यह जानना भी होता है कि लड़ाई से कब दूर जाना है।
 आने वाले दिनों की हकीकत आपके सामने है और हो सकता है कि भविष्य सोंचकर, शायद आपको थोड़ी निराशा महसूस हो।
जीवन में  कभी-कभी कठिन समय को पार करना असंभव लगता है, तब  अंधकारमय परिस्थिति में खुशी और प्रकाश को पाना बहुत कठिन लगता है। ऐसे समय ही हमें साहस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। और तब आपका रवैया और आपके अंदर की प्रेरणा ही आपकी जीत का द्वार खोलती है। तो याद रखें की  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सामने कितनी बड़ी मुसीबतें या खराब परिस्थितियां हैं, बस खुद के अंदर के लड़ाके पर विश्वास रखें , साहस जुटाएं और पूरी जीवटता के साथ संघर्ष में खुद को झोंक दें, निश्चित ही जीत आपकी होगी।

" It's not the size of the dog in the fight, it's the size of the fight in the dog. "  - Mark Twain
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लड़ाई में दो भिन्न आकार के कुत्ते नहीं होते हैं, बल्कि कुत्तों में लड़ाई का आकार होते हैं।  ..मार्क ट्वैन

आशा है कि मार्क ट्वैन की इस उक्ति का अर्थ बेहतर समझ पाने में थोड़ी मदद कर पाया। 

 Have a nice time! Take care!🌈

Saturday, May 15, 2021

लाखों रुपए की कर्णप्रिय गलती ( A Million Dollar Melodious Mistake) :

A Million dollar Melodious mistake ( लाखों रुपए की एक कर्णप्रिय गलती ) : 

  A small mistake by a guitarist gave people a chance to laugh.  But only intelligent and connoisseur music lovers like RD Burman felt that this very big mistake is indeed a very beautiful discovery in the music world.  He used that mistake in one of his songs, which not only won the hearts of the people but also created history.
 In those days of the 70s, RD Burman and Kishore Kumar dominated Indian film music with yodeling and fun-filled songs, but the RD and Kishore duo had no classical and serious songs like SD Burman and Rafi.  They used to be very malicious, in such a way that this raag Bhairvi based song not only gave them that spiritual satisfaction but they also got the National Award.
  What was that mistake? And what song was it?
  If you are an old Hindi music lover then definitely watch this video, hope you will like it... enjoy the Melody..
Have a Nice time , Take care!🌈

 एक गिटारवादक की एक छोटी सी गलती ने लोगों को हंसने का मौका दे दिया।  किन्तु आर डी बर्मन जैसे बुद्धिमान और पारखी संगीत प्रेमी को  यूं लगा कि यह बहुत बड़ी गलती तो दरअसल संगीत की दुनिया की बहुत  सुंदर खोज है। उन्होंने अपने एक गाने में उस गलती का ऐसा इस्तेमाल किया,  जिसने न सिर्फ लोगों के दिलों को छुआ, बल्कि इतिहास रच दिया।
70 के दशक के उन दिनों में योडलिंग और मस्ती भरे गीतों से आरडी बर्मन और किशोर कुमार भारतीय फिल्म संगीत में छाए हुए थे , किन्तु RD और किशोर की जोड़ी के पास एसडी बर्मन और रफी की तरह का कोई क्लासिकल और संजीदा गीत नहीं था, जिसका उन्हें बड़ा मलाल होता था, ऐसे में राग भैरवी के इस गाने ने उन्हें न सिर्फ वो आत्मिक संतुष्टि दी बल्कि उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

 क्या गलती थी वह ?और कौन सा गाना था? 
 अगर आप पुराने हिंदी संगीत प्रेमी हैं तो यह वीडियो ज़रूर देखें , आशा है पसंद आएगा। संगीत का आनंद लें। 
अपना और अपनों का ध्यान रखें।🌈
  🙏