बेशरम:
इंगलीश का Shameless या हिंदी का बेशर्म शब्द का यूँ तो अधिकतर नकारात्मक भावना से प्रयोग होता है और ये नेगेटिव साउंड करता लगता है। पर इस शब्द के नाम का एक पौधा भी है ।
बेहया या बेशर्म या थेथर एक पौधा है जो प्राय: तालाबों, पोखरों, नदियों व अन्य जलस्रोतों के किनारे पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Ipomoea carnea है।
जालिम अंग्रेज लोग इसको Bush morning glory या bush moonflower या manroot भी कहते हैं।इसके हल्के गुलाबी बैैैगनी रंग के फूूूल बहुुत खूूूबसुुरत लगते हैैं। कुछ कुछ गुलाबी रंगों की वजह से इसे कुुकिि
कुछ क्षेत्रों में गुलाबसी भी कहा जाता है।
प्रेरक सीख: यह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी जिन्दा रहता एवं पुष्पित-पल्लवित होता रहता है। इसीलिये इसे बेशरम कहते हैं।
विपरीत परिस्थितियों में तो बहुत से लोग जी लेते हैं , उन्नति भी कर लेते हैं , मगर वो कठोर हो जाते हैं | उनका व्यवहार कैक्टस कि भांति हो जाता है , वो हरे भरे तो रहते हैं मगर असभ्य ,कठोर और खडूस टाइप हो जाते हैं | मगर जीवन के अतिकठिनतम रास्तों पे चल कर और विपरीत परिस्थितयों को झेल कर भी उन्नति करना और विनम्रता को सहेज कर रखना कोई बेशरम के फूल से सीखे |
उपयोग/ Use: यह पौधा वैसे तो किसी काम का नहीं माना जाता है, लेकिन गांवों में लोग इससे बाड़ बनाते हैं और जलाने के काम में लाते हैं।
कई ग्रामीण क्षेत्रीय लोग इसकी पत्तियों को नीम पत्तियों और धतूरा के साथ गौमूत्र में उबाल कर फसलों पर कीटनाशक की तरह छिड़काव करते हैं, जिससे फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ जाती है।
बेशरम और बचपन:
ग्रामीण और कस्बाई जीवन से जुड़े बचपन में तो ये प्रमुख खिलौना रहा है। हमारा भी, क्योंकि इसके पौधे को बचपन से देखा है और खेल कूद में ये हमारे साथ रह है। फिर चाहे वो क्रिकेट की स्टंप रहा हो, या गोबर डंडे के खेल की छड़ी, या फिर हॉकी की स्टिक या फिर चोर पुलिस की बंदूक..इसके बगैर तो हम अपने बचपन की वास्तविक व्याख्या ही नहीं कर सकते...
और हां
..हमारे स्कूल में मास्टरजी कुटाई करने के लिए भी इसी को सबसे उपयुक्त समझते थे।😁
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