Monday, January 13, 2020

7 habits of highly effective people

दुनिया मे जो किताबे सबसे ज्यादा बेची गई उसमे से एक है 'अति प्रभावकारी लोगो की 7 आदतें' अमेरिका के बेस्ट न्यूज़पेपर न्यूयॉर्क टाइम की लिस्ट में यह पुस्तक लगातार 60 हप्ते तक टॉप पर रही। इस पुस्तकके लेखक स्टीफ़न आर. कवी ने पुस्तक लिखने से पहले 3000 सक्सेसफुल लोगो का सर्वे किया, उन पर रिसर्च की वो किस तरह सफल बने, स्टीफन ने देखा कि 3000 सफल लोग मात्र अपने प्रोफेशन ही नही बल्कि वो लोग एक पति,मित्र, पिता जैसे अपने सभी रोल में सफल थे। स्टीफनने 3000 लोगो से मिलने के बाद 3 साल तक सोचा इसके बाद उन्होने यह किताब लिखी। दोस्तो, मेरा मानना है कि अगर हम इस किताब के सिद्धांत अपने जीवन मे आत्मसात कर लेते है तो दुनिया की कोई ताकत हमे सफल बनने से नही रोक सकती। तो चलिए सबसे पहले इस किताब में कहे गए 7 सूत्र समझते है।

1) BE PROACTIVE :

बी प्रोएक्टिव मतलब प्रतिकूल परिस्थितियों में सानुकूल प्रतिभाव देना। हम ज्यादातर परिस्थिति में रिएक्टिव हो जाते है जिससे हमारी एनर्जी बर्बाद हो जाती है। संत एकनाथ के जीवन का एक प्रसंग है। एकनाथ जब गोदावरी से स्नान कर कर लौट रहे थे तब एक बिगड़ेल यवन उस पर जानबूझकर थूंकता है, एकनाथ उस पर रिएक्शन नही देते है, एकनाथ बहुत बलवान थे जब वह गुरुगृह पर थे तब उसने अपनी वीरता से दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे। वो यवन एकनाथ के शरीर पर 108 बार थूंकता है। एकनाथ शांति बनाए रखते है उसकी थूंकने की क्रिया पर कोई रिएक्शन नही देते है, आखिर में वो युवा एकनाथ की शांति और क्षमा से उसके शरण मे आता है। अगर हम होते तो क्या करते झगड़ा करने में अपनी एनर्जी बर्बाद कर देते। अगर आपका कोई अपमान करता है तो भी आप शांत रहिये, जो दूसरे लोग सोच भी नही सकते पर जो मार्ग हमारे लिए बेटर है उसका चयन करें। प्रोएक्टिव लोग हमेंशा आगे की सोचते है। सब बात वो अपने कन्ट्रोल में रखते है।

2) BEGIN WITH THE END IN MINDS:

जब आप मरनेवाले होंगे तो आपके अग्निसंस्कार में जो लोग शामिल होंगे वो आपके बारेमे क्या सोच रहे होंगे, आपके मृत्यु के पश्चात आप की बीवी, आपके दोस्त आपके रिलेटिव आपके बारे में क्या बात कर रहे होंगे। अगर आपका जवाब है में उस दिन मेरे बारे में अच्छा सुनना चाहता हूँ। अब आप ही सोचिये क्या अभी आपके एक्शन ऐसे है कि आपके रिलेटिव आपके मरने के बाद आप के बारे में अच्छा सोचे। अगर आपका जवाब ना है तो आप अपने एक्शन ऐसे करिये जिसके कारण आप अच्छे व्यक्ति बन सके।

स्टीव जॉब्स का एक फेमस सेंटेंस मुजे याद आ रहा है "यदि आज का दिन आपकी जिंदगी का आखिर दिन होता, तो क्या आप, आज जो करनेवाले है, वो करेंगे"? हमेंशा एन्ड को ध्यान में रखकर आपको कार्य करना चाहिए। सबसे पहले लक्ष्य निर्धारित कीजिये उसके बाद आप जो अभी कार्य कर रहे है वो क्या आपको मंजिल तक पहुचायेगा, इस बात का विश्लेषण करके अपने कार्य को नया आकार दीजिए।

3) PUT FIRST THINGS FIRST :

इसका अर्थ है जो काम सबसे जरूरी है उसे प्रायोरिटी दीजिए। हमारे जीवन मे हम सदा बिजी रहते है, हमारे पास हजारो काम होते है उसमेंसे किस कामको में सबसे ज्यादा प्रायोरिटी दु, इसे जो लोग जानते है उनके सफल होने का चांस बढ़ जाता है।

हमारे पास जो कार्य होते है उसके 4 टाइप होते है। (1) important & urgent (2) important but not urgent (3) urgent but not important (4) Neither important nor urgent

अगर आपकी कंपनी में कल बहुत इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है और आपको उसके एजेंडा से लेकर सारी तैयारी करनी है तो इस प्रकार के कार्य आपके लिए इम्पोर्टेन्ट एंड अर्जेंट हो जाता है। आपको सबसे ज्यादा प्रायोरिटी ऐसे कार्य को देनी चाहिए। किन्तु आप सड़क पर जा रहे है वहा मदारी साँप का खेल दिखा रहा है और आप 1 घंटे तक अपना समय खेल देखने मे बिगाड़ते है तो आपके लिए यह कार्य इम्पोर्टेन्ट भी नही है और अर्जेंट भी नही है अगर जीवन मे सफल बनना है तो इस तरह के कार्य को अवॉयड कीजिये।

4) THINK WIN WIN :

इस सूत्र का मतलब है आप भी जीते और में भी जीतू, आप भि सुखि बने में भी सुखी बनू। में एक दृष्टांत से इस बात को समजाति हु, कोई ग्राहक व्यापारी के पास जाता है और 80 रुपये में कोई चीज चाहता है जबकि व्यापारी उसे 100 रुपये में बेचना चाहता है। अब दोनों बीच का मार्ग निकालते है और इस प्रोडक्ट का सौदा 90 रुपये में करते है तो दोनों की जीत होती है। यह सूत्र हमे समजाता है कि हमे केवल हमारा स्वार्थ नही देखना चाहिए।अगर कोई स्टूडेंट मैथ्स का प्रॉब्लम अपने फ्रेंड को इस बजह से सॉल्व करके नही देता है कि एग्जाम में उसके नम्बर ज्यादा आ जायेंगे तो यह सिर्फ स्वार्थ है। पर अगर दोनों फ्रेंड्स मिलकर काम करते है तो दोनों का फायदा होगा।

5) SEEK FIRST TO UNDERSTAND THEN TO BE UNDERSTOOD

आज कोई दूसरे की बात सुनने को तैयार नही है। आज हम कई बार सुनते है कि "तू पहले मेरी बात सुन" आज तो हम किसी की बात सुनते है तो भी उसे जवाब देने के लिए सुनते है। अगर हमें सफल होना है तो केवल हमारी बांते नही किन्तु सामने वाला क्या कहना चाहता है वो समझने की जरूरत है। आज के समय मे पिता पुत्र की बात नही सुनता है और पुत्र पिता की। दोनों खुद को ही ज्यादा बुद्धिमान समझते है। अगर हम किसीकी बात सुनेंगे उसे समझने का प्रयास करेंगे तो हम लोकप्रिय भी होंगे और सफल भी होंगे।

6) SYNERGIZE:

दो या उससे ज्यादा व्यक्ति साथ मे काम करते है तो कई बार मतभेद और मनभेद हो जाते है फिर भी संस्था के हित के लिए एक साथ अपनी तमाम एनर्जी लगाकर काम करना है उसे कहते है सिनर्जी। हमारे यहां कहावत है 1 और 1 मिलाकर 11 होते है। इस सूत्र में संघशक्ति का महत्व समजाया गया है। पांडवो के पक्ष में 7 अक्षोहिणी सैन्य था जबकि कौरव पक्षमे 11 अक्षोहिणी सैन्य था। पांडव पक्षमे एकता थी सबने साथ मिलकर पूरी एनर्जी लगाकर युद्ध किया और विजय प्राप्त की।

7) SHARPEN THE SAW:

अपने हथियार तीक्ष्ण कीजिये। मन बुद्धि और शरीर का डेवलोपमेन्ट कीजिये। अगर आप सफल बनना चाहते है तो आपको बौद्धिक विकास के लिए अच्छी किताब पढ़नी चाहिए, शरीर के विकास के लिए व्यायाम करना चाहिए। यह सात सूत्र अपने जीवन मे लाने का प्रयास कीजिये में दावे के साथ कहती हूं आपको सफल बनने से कोई नही रोक सकेंगा।

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