हिन्दी भाषा अपने आप में एक वृहत और गहन भाषा है। लेखन एक तरह से मनुष्य की मानसिक अवस्था से जुड़ा हुआ होता है। किसी भी लेखन को निर्बाध नहीं लिखा जा सकता है।ऐसा इसलिए होता है कि हमारी मानसिक दशा हमेशा एक जैसी नहीं रहती है।
पाठ को सरल बनाने के लिए,भाव बोध के लिए, शब्दों और वाक्यों के परस्पर संबंध दर्शाने के लिए, पढ़ते समय एक वाक्य की समाप्ति के लिए हम जिन चिह्नों का प्रयोग करते हैं,उसे 'विराम चिह्न' कहते हैं।
अधिकांश विराम चिह्न जो आज हिन्दी में प्रयुक्त हैं, वो अंग्रेज़ी से लिए गए हैं। आइए देखते हैं कि कितने तरह के विराम चिह्न हैं।
- पूर्ण विराम (full stop) - ( । )
- अर्द्ध विराम( semi colon) -( ;)
- अल्प विराम (comma) -( , )
- प्रश्नवाचक चिह्न (sign of interrogation) - ( ? )
- विस्मय सूचक(sign of Exclamation) - (! )
- उप विराम (colon) - ( : )
- अवतरण चिह्न - ( ' ')
- उद्धरण चिह्न) ( Inverted comma) - (" ")
- रेखिका या निर्देशक चिह्न (Dash) (-)
- विवरण चिह्न (colon + Dash) -(:- )
- त्रुटिपूर्ण चिह्न (sign of loftword) - (^ )
- कोष्ठक(Bracket) - ( ), [ ], { }
- समानता सूचक ( Equal) - ( =)
- दीर्घ उच्चारण चिह्न - (ऽ)
- लोप चिह्न - ( … )
- लाघव चिह्न - (०)
- पुनरूक्ति सूचक चिह्न - (,, ,,)
- समाप्ति सूचक - ( — ० —)
अब देखते हैं कि कैसे इन्हें प्रयोग में लाते हैं।
1) पूर्ण विराम (।) - किसी वाक्य के अंत में पूर्ण विराम चिह्न लगाने का मतलब होता है कि वह वाक्य समाप्त हो गया है। विस्मयकारी वाक्य( ! ) और प्रश्नवाचक वाक्य ( ? ) को छोड़कर सभी जगह पूर्ण विराम (। ) का प्रयोग होता है।
जैसे -
- मैं घर जाता हूँ।
- मैने पढ़ाई कर ली है।
2) अर्द्ध विराम (;) - जब किसी वाक्य को कहते हुए बीच में हल्का सा विराम लेना हो पर वाक्य को खत्म नहीं करना है तो वहाँ अर्द्ध चिह्न का प्रयोग किया जाता है। यहाँ अल्प विराम (,) से ज़्यादा और पूर्ण विराम (।) से कम रुकना हो तो उसे (;) अर्द्ध विराम कहते हैं। दो या तीन वाक्यांश के बीच में अर्ध विराम का प्रयोग किया जाता है।
जैसे -
- आकाश में काले बादल छाए ; बादल गरजने लगे; तेज बारिश होने लगी और लोग भीगने लगे।
- मैने जिसपर सबसे ज़्यादा भरोसा किया ;उसी ने मुझे धोखा दिया।
- मीता पढ़ने में बहुत अच्छी है ; लेकिन वह किसी की बात नहीं सुनती है।
3) अल्प विराम (,) - जब किसी वाक्य को पूरा करने में पूर्ण विराम(।) से कम समय के लिए रुकना हो तो उसे अल्प विराम ( , ) कहते हैं। इसका प्रयोग एक से ज्यादा संज्ञाओं के बीच किया जाता है और वाक्य को पूरा करने के पहले दो संज्ञाओं के बीच और का प्रयोग किया जाता है।
जैसे -
- सोहन, रजत, कमल और समीर सभी दोस्त घूमने के लिए गए।
- रामू , जरा मेरे पास तो आना।
- हाँ , अब मैं अपने घर जा रही हूँ।
अंको को लिखते समय भी इसका प्रयोग किया जाता है। 1 ,2,3, और 4 इस तरह से।
महीने और तारीख लिखने के लिए भी यह चिह्न प्रयोग में आता है।
जैसे -
- 23 मई , 2019 को वोटिंग का परिणाम आ जाएगा।
4) प्रश्नवाचक चिह्न ( ?) - जिस वाक्य में किसी प्रश्न के पूछे जाने की अनुभूति हो तो वहाँ वाक्य के अंत में इस चिह्न ( ? ) का प्रयोग होता है।
जैसे -
- तुम्हारा नाम क्या है ?
- तुम कहाँ जा रहे हो ?
- क्या तुम्हें मिठाई खाना पसंद है ?
5) विस्मय सूचक या आश्चर्य चिह्न ( ! ) - जब किसी वाक्य में आश्चर्य,घृणा, शोक,हर्ष आदि भावों का बोध कराने के लिए इस चिह्न ( ! ) का प्रयोग किया जाता है।
जैसे -
- ओह ! यह तो तुम्हारे साथ बुरा हुआ।
- वाह ! क्या सुहाना मौसम है।
- अरे ! तुम कब आए।
- हे भगवान ! यह तुम्हारी कैसी लीला है।
- अच्छा ! ऐसा बोला तुमसे उस पाखंडी ने।
- शाबाश ! मुझे तुमसे यही उम्मीद थी।
6) उप विराम या अपूर्ण विराम (:) -जब किसी शब्द को अलग दिखाना हो तो वहाँ उप विराम का प्रयोग किया जाता है।
जैसे -
- विज्ञान : वरदान या अभिशाप।
- उदाहरण : राम घर जाता है।
7 ) अवतरण चिह्न (' ') या किसी वाक्य में किसी खास शब्द पर जोर देने के लिए इस चिह्न का उपयोग किया जाता है।
अवतरण चिह्न (' ') का उदाहरण :
- 'गोदान' मुंशी प्रेमचंद का सबसे महत्वपूर्ण उपन्यास माना जाता है।
- 'रामायण ' हिन्दुओं का धार्मिक ग्रंथ है।
8) उद्धरण चिह्न ( " ") किसी और के लिखे वाक्य को ज्यों का त्यों लिखने के लिए भी 'उद्धरण चिह्न' का उपयोग होता है।
जैसे -
- हरिवंश राय जी ने कहा है " मन का हो तो अच्छा, मन का न हो तो और भी अच्छा।"
9 ) रेखिका या निर्देशक या, संयोजक चिह्न ( डैश) (-) इस चिह्न का प्रयोग किसी के द्वारा कही गयी बात को दर्शाने के लिए किया जाता है।
जैसे -
- माँ ने कहा — आज तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं है तो तुम स्कूल मत जाओ।
- तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा — सुभाष चंद्र बोस।
किसी शब्द की पुनरावृत्ति होने पर भी बीच में संयोजक चिह्न का प्रयोग होता है।
जैसे :
- कभी - कभी, चलते - चलते।
युग्म शब्दों के साथ पर यह चिह्न प्रयोग में आता है।
जैसे
- खेल में तो हार - जीत लगी ही रहती है।
- भाई -बहन साथ में खेल रहे हैं।
- खाना - पीना हो जाए तो सो जाना।
तुलनात्मक वाक्य के पहले डैश का प्रयोग होता है।
- झील - सी आँखें
- सागर - सा गहरा
10) विवरण चिह्न (:-) विवरण चिन्ह वाक्यांश की जानकारी ,सूचना आदि को दर्शाने के लिए की जाती है।
जैसे -
- निम्न लिखित नियमों का पालन करें :-
- मेरे उत्तर के महत्वपूर्ण पहलू इस प्रकार हैं :-
11) त्रुटिपूर्ण चिह्न (^) जब किसी वाक्य को लिखने में कोई शब्द छूट जाता है तो इस चिह्न का प्रयोग करके छूटे हुए शब्द को ऊपर लिख दिया जाता है।
जैसे -
- रोहन कल ^ दिल्ली जाएगा।
12) कोष्ठक ( ), { }, [ ] कोष्ठक का प्रयोग किसी शब्द की अधिक जानकारी बताने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग वाक्यों के बीच में किया जाता है। कोष्ठक भी तीन प्रकार के होते हैं।
- लघु कोष्ठक ( )
- मध्य कोष्ठक { }
- दीर्घ कोष्ठक [ ]
हिन्दी साहित्य लेखन में लघु कोष्ठक का ही इस्तेमाल किया जाता है। बाकी का प्रयोग गणित में किया जाता है।
जैसे -
- दशहरे के अवसर पर दशानन (रावण) के पुतले का दहन किया जाता है।
- डा. राजेन्द्र प्रसाद ( भारत के पहले राष्ट्रपति) का जन्म 3 दिसंबर 1884 को हुआ था।
13) समानता सूचक चिह्न ( =) किसी शब्द या गणित के अंको की समानता को दर्शाने के लिए समानता सूचक चिह्न का प्रयोग किया जाता है।
जैसे -
- अशिक्षित = अनपढ़
- 4 और 4= 8
14) दीर्घ उच्चारण चिह्न (ऽ ) जब किसी वाक्य के उच्चारण में अन्य शब्दों की अपेक्षा अधिक समय लगता है तो वहाँ दीर्घ उच्चारण चिह्न का प्रयोग होता है।
का , की, कू के, कै, को, कौ में दीर्घ मात्रा और क, कि, कु के लिए छोटी या लघु मात्रा का प्रयोग किया जाता है।
ओऽम के उच्चारण में दीर्घ मात्रा चिह्न का प्रयोग होता है।
15 ) लोप चिह्न (…) जब किसी वाक्य में कुछ अंश छोड़कर लिखना हो तो उसमें लोप चिह्न का प्रयोग किया जाता है।
जैसे -
- मैं टिकट ला देता हूँ…, पर मैं साथ नहीं चलूँगा।
- मैंने खाना बना दिया है …, लेकिन अभी मैं नहीं खाऊँगी।
16 ) लाघव चिह्न ( ० ) किसी शब्द का संक्षिप्त रूप लिखने के लिए लाघव चिह्न का प्रयोग होता है।
जैसे -
- डॉक्टर को- डा०
- प्रोफेसर को - प्रो ०
- उत्तर प्रदेश को - उ० प्र ०
17) पुनरूक्ति सूचक चिह्न (,, ,,) इसका उपयोग ऊपर लिखे हुए किसी वाक्य के अंश को दोबारा दोहराने के लिए किया जाता है ताकि एक ही चीज बार बार न लिखना पड़े।
जैसे -
- राम के पास 100 रूपए हैं।
- श्याम के पास ,, ,, ,,।
- मोहन के पास ,, ,, ,, ।
इसका मतलब सबके पास 100 रूपए हैं।
18) समाप्ति सूचक चिह्न (—० —) समाप्ति सूचक चिह्न का उपयोग बड़े लम्बे लेख,कहानी,अध्याय अथवा पुस्तक के अंत में करते हैं, जो यह सूचित करता है कि कहानी समाप्त हो गयी है।
हमने हिन्दी भाषा को लिखने में जितने चिह्नों का प्रयोग होता है,उन सबका विस्तृत वर्णन किया है। जिससे यह पता चलता है कि हिन्दी लिखने के लिए किस जगह पर सही चिह्न का इस्तेमाल करके हिन्दी लेखन में शुद्धता लायी जा सकती है।
स्रोत -विराम चिह्न के प्रकार | Studyfry और quota hindi
धन्यवाद!
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