Thursday, November 26, 2020

Maradona माराडोना: अद्भुत, बदनाम, असाधारण, जीनियस और ग़ुस्सैल. डिएगो अरमांडो माराडोना. फ़ुटबॉल के एक ऐसे महानायक जिनमें कई ऐब भी थे.

माराडोना : अद्भुत, बदनाम, असाधारण, जीनियस और ग़ुस्सैल. डिएगो अरमांडो माराडोना. फ़ुटबॉल के एक ऐसे महानायक जिनमें कई ऐब भी थे. जानिए 'Hand of God ' से 'Goal of the Century' तक, जीनियस और बदनाम डिएगो माराडोना की रोचक कहानी: 

फ़ुटबॉल के सबसे करिश्माई खिलाड़ियों में से एक, अर्जेंटीना के माराडोना के पास प्रतिभा, शोखी, नज़र और रफ़्तार का ऐसा भंडार था, जिससे वो अपने प्रशंसकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे.उन्होंने अपने विवादित कदमों की वजह से अपने फ़ैंस को ग़ुस्सा भी दिलाया और नाराज़ भी किया.माराडोना ने अपने विवादित 'हैंड ऑफ़ गॉड' गोल से सबको हैरत में डाला और मैदान के बाहर ड्रग्स और नशाखोरी जैसे मामलों में भी पड़े.

छोटे कद के माराडोना: फ़ुटबॉल के जीनियस :
माराडोना का जन्म आज से 60 साल पहले अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स के झुग्गी-झोपड़ियों वाले एक कस्बे में हुआ था.
अपनी ग़रीबी से लड़ते हुए वो युवावस्था आने तक फ़ुटबॉल के सुपरस्टार बन चुके थे. कुछ लोग तो उन्हें ब्राज़ील के महान फ़ुटबॉलर पेले से भी शानदार खिलाड़ी मानते हैं.

Football Career : माराडोना ने 491 मैचों में कुल 259 गोल दागे थे. इतना ही नहीं, एक सर्वेक्षण में उन्होंने पेले को पीछे छोड़ '20वीं सदी के सबसे महान फ़ुटबॉलर' होने का गौरव अपने नाम कर लिया था.
हालाँकि इसके बाद फ़ीफ़ा ने वोटिंग के नियम बदल दिए थे और दोनों खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया था.
माराडोना विलक्षण प्रतिभा के धनी थे, यह उनके बचपन से ही नज़र आने लगा था. उन्होंने महज़ 16 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल जगत में क़दम रख दिया था.
कद से छोटे और शरीर से मोटे, सिर्फ़ पाँच फ़ीट पाँच इंच लंबाई वाले माराडोना कोई सामान्य खिलाड़ी नहीं थे.
माराडोना के पास चतुराई, तेज़ी, चौकन्नी नज़र, फ़ुटबॉल को काबू में रखने की क्षमता और ड्रिब्लिंग जैसे गुण थे, जिन्होंने उनके ज़्यादा वज़न से कभी-कभार होने वाली दिक्कतों को ढँक लिया था.

हैंड ऑफ़ गॉड' और 'गोल ऑफ़ द सेंचुरी' :
माराडोना ने अर्जेंटीना के लिए 91 मैच खेले, जिनमें उन्होंने कुल 34 गोल दागे. लेकिन ये उनके उतार-चढ़ाव भरे अंतरराष्ट्रीय करियर का एक हिस्सा भर ही है.

उन्होंने अपने देश को साल 1986 में मेक्सिको में आयोजित वर्ल्ड कप में जीत दिलाई और चार बार टूर्नामेंट के फ़ाइनल तक पहुँचाया.

1986 के वर्ल्ड कप के क्वार्टर फ़ाइनल में माराडोना ने कुछ ऐसा किया, जिसकी चर्चा हमेशा होती रहेगी.
मेक्सिको में क्वार्टर फ़ाइनल का यह मैच अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच था. दोनों देशों के बीच यह मैच पहले से ही ज़्यादा तनावपूर्ण था क्योंकि इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच सिर्फ़ चार साल पहले फ़ॉकलैंड्स युद्ध हुआ था.

22 जून 1986 को साँसें थमा देने वाले इस रोमांचक मैच के 51 मिनट बीत गए थे और दोनों टीमों में से कोई एक भी गोल नहीं कर पाया था.
इसी समय माराडोना विपक्षी टीम के गोलकीपर पीटर शिल्टन की तरफ़ उछले और उन्होंने अपने सिर और हाथ से फ़ुटबॉल को नेट में डाल दिया. हाथ का इस्तेमाल होने की वजह से यह गोल विवादों में आ गया.
फ़ुटबॉल के नियमों के अनुसार हाथ का इस्तेमाल होने के कारण यह गोल फ़ाउल था और इसके लिए माराडोना को 'येलो कार्ड' दिखाया जाना चाहिए था.
लेकिन उस समय वीडियो असिस्टेंस टेक्नॉलजी नहीं थी और रेफ़री इस फॉउल को ठीक से देख नहीं पाए. इसलिए इसे गोल माना गया और इसी के साथ अर्जेंटीना 1-0 से मैच में आगे हो गया.
मैच के बाद माराडोना ने कहा था कि उन्होंने यह गोल 'थोड़ा सा अपने सिर और थोड़ा सा भगवान के हाथ से' किया था. इसके बाद से फ़ुटबॉल के इतिहास में यह घटना हमेशा के लिए 'हैंड ऑफ़ गॉड' के नाम से दर्ज हो गई.

गोल ऑफ़ द सेंचुरी: 
इसी मैच में इस विवादित गोल के ठीक चार मिनट बाद माराडोना ने कुछ ऐसा किया जिसे 'गोल ऑफ़ द सेंचुरी' यानी 'सदी का गोल' कहा गया.
वो फ़ुटबॉल को इंग्लैंड की टीम के पाँच खिलाड़ियों और आख़िरकार गोलकीपर शिल्टन से बचाते हुए ले गए और गोल पोस्ट के भीतर दे डाला. इस गोल के बारे में बीबीसी के कमेंटेटर बैरी डेविस ने कहा था:  "आपको मानना ही होगा कि ये शानदार था. इस गोल के बारे में कोई संदेह नहीं है. यह पूरी तरह से फ़ुटबॉल जीनियस है."

इस मैच के बारे में माराडोना ने कहा था, "यह मैच जीतने से कहीं से ज़्यादा था. इसका मक़सद इंग्लैंड को वर्ल्ड कप से बाहर करना था."

ड्रग्स और शराब में फँसा नेपोली का हीरो :
माराडोना बार्सिलोना और नेपोली जैसे नामी फ़ुटबॉल क्लबों के लिए भी खेले और इन क्लबों के हीरो कहलाए. साल 1982 में वो तीन मिलियन पाउंड में स्पेन के फ़ुटबॉल क्लब बार्सिलोना और इसके दो साल बाद पाँच मिलियन पाउंड में इटली के क्लब नेपोली में शामिल हुए.
जब माराडोना हेलिकॉप्टर में सवार होकर इटली के सान पाओलो स्टेडियम पहुँचे तो वहां 80 हज़ार से ज़्यादा प्रशंसक अपने नए हीरो का स्वागत करने के लिए मौजूद थे.
उन्होंने अपने करियर का सबसे अच्छा क्लब फ़ुटबॉल इटली में ही खेला और वहाँ उन्हें अपने प्रशंसकों से ख़ूब प्रसिद्ध मिली.

Limelight और चकाचौन्ध से ऊब नशा और ड्रग्स:
इटली में माराडोना को इतनी शोहरत मिली को वो इससे तंग तक आ गए. एक बार उन्होंने कहा था, "यह एक बेहतरीन जगह है लेकिन मैं यहाँ मुश्किल से साँस ले पाता हूँ. मैं आज़ाद और बेफ़िक्र होकर इधर-उधर घूमना चाहता हूँ. मैं किसी आम इंसान की तरह ही हूँ."
इस बीच उन्हें कोकीन की लत लग गई थी और उनका नाम इटली के कुख्यात माफ़िया संगठन कैमोरा से भी जुड़ गया था.
साल 1991 में माराडोना एक डोप टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गए और अगले 15 महीनों के लिए उन्हें फ़ुटबॉल से प्रतिबंधित कर दिया गया.

इसके बाद साल 1994 में अमरीका में होने वाले फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप में माराडोना को प्रतिबंधित ड्रग एफ़ेड्रिन लिए पाया गया था. इसके बाद बीच टूर्नामेंट में ही उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

माराडोना timeline :
1977: अर्जेंटीना बनाम हंगरी- अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल में शुरूआत.
1982: बार्सिलोना में दो साल बिताने के बाद नेपोली में शामिल.
1986: अर्जेंटीना को वर्ल्ड कप जिताया.
1990: अर्जेंटीना को वर्ल्ड कप में रनर अप बनाया.
1991: ड्रग टेस्ट में पॉज़िटिव पाए जाने के बाद 15 महीने का प्रतिबंध.
1994: अमरीका में वर्ल्ड कप के दौरान डोप टेस्ट फ़ेल होने के बाद टूर्नामेंट से बाहर.
1997: तीसरे पॉज़िटिव टेस्ट के बाद प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉल से रिटायर हुए.
2010: दो साल तक अर्जेंटीना की टीम के मैनेजर. वर्ल्ड कप में अर्जेंटीना के क्वार्टर फ़ाइनल से बाहर होने के बाद पद से अलग हुए.

रिटायरमेंट के बाद माराडोना की ज़िंदगी और असाधारण घटनाएं: 
ततीसरी बार ड्रग्स पोज़िटिव पाये जाने के बाद माराडोना ने अपने 37वें जन्मदिन पर प्रोफ़ेशनल फ़ुटबॉल से रिटायरमेंट ले लिया था. हालाँकि इसके बाद भी विवाद और मुश्किलें उनका पीछा करती ही रहीं. जैसे की

माराडोना ने एक बार एक पत्रकार पर एयर राइफ़ल से गोली चलाई थी जिसके लिए उन्हें दो साल 10 महीने के लिए जेल की सज़ा सुनाई गई थी.

कोकीन और शराब की लत की वजह से उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ी कई तकलीफ़ें हो गई थीं.
उनका वज़न भी काफ़ी बढ़ गया था और एक समय में 128 किलो तक पहुँच गया था. साल 2004 में माराडोना को दिल का दौरा पड़ा था जिसकी वजह से उन्हें आईसीयू में भर्ती होना पड़ा था.
मोटापा घटाने के लिए माराडोना की गैस्ट्रिक-बाइपास सर्जरी तक करानी पड़ी थी. इतना ही नहीं, ड्रग्स की लत से छुटकारा पाने के लिए भी मदद लेनी पड़ी थी.

इन सभी विवादों और परेशानियों के बावजूद साल 2008 में माराडोना को अर्जेंटीना की नेशनल टीम के मैनेजर के तौर पर नामित किया गया. उन्हें मैनेजर के तौर पर कई और भूमिकाएँ भी मिलीं, जिनके बारे में लोगों की राय बँटी रही और वो लगातार किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बने रहे.

एक बार उनके कुत्ते ने उन्हें होठों पर काट लिया था जिसकी वजह से उन्हें सर्जरी करानी पड़ी.
माराडोना ने एक विवाहेतर संबंध से जन्मे अपने बेटे डिएगो अरमांडो जूनियर को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया था.

साल 2018 के फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप में जब वो रूस में अर्जेंटीना और नाइजीरिया के बीच मैच देखने गए थे तब उनका एक फ़ोटो वायरल हो गया था. इस फ़ोटो से पता चला था कि माराडोना की जीवनशैली कितनी बिगड़ चुकी थी.

रूस में उन्होंने एक नाइजीरियाई फ़ैन के साथ डांस किया, मैच शुरू होने से पहले आसमान की ओर देखते हुए प्रार्थना की, मेसी के गोल पर बुरी तरह झूमकर सेलिब्रेट किया, मैच के दौरान ही सो गए और अर्जेंटीना के दूसरे गोल के बाद 'डबल मिडिल फिंगर सल्यूट' किया.
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार माराडोना का ज़िंदगी के आख़िरी बरसों में अपनी जीवनशैली सुधारने के लिए माराडोना को इलाज कराना पड़ा था.

माराडोना का राजनैतिक दर्शन :

दिएगो मारादोना ने अपने टखने और बांह पर बीसवीं सदी के दो सबसे बड़े लातीन अमेरिकी क्रांतिकारियों फिदेल कास्त्रो और चे गुएवारा के टैटू गुदवा रखे थे. एक बहुत बड़ी सेलेब्रिटी के तौर उसे अधिकार था कि जितनी चाहे उतनी रकम मांग कर अमेरिकी पूंजीवाद का टट्टू बन जाता. पर उसने उन पर थूक दिया. उसने कहा वह अपने लोगों से मोहब्बत करता है.

फुटबॉल को समझने-चाहने वालों में से आधे लोग उसे भगवान मानते हैं. इतनी ही तादाद उसे बर्बाद नशेड़ी बताने वालों की भी है. कुछ भी हो आपको उसे पिछले सौ सालों के सबसे बड़े दो या तीन फुटबॉलरों में गिनना ही होगा. उसके जैसी बेबाक राजनैतिक प्रतिबद्धता और सजगता बहुत कम खिलाड़ियों में रही. 

इस चैम्पियन ने अपने समय के सबसे ताकतवर आदमी यानी अमेरिकी राष्ट्रपति को सार्वजनिक रूप से "मानव गू का हिस्सा" कहा. मारादोना कहता था – "जब आपको दुनिया जानने लगती है तो आपको अमरीका या उसके राष्ट्रपति के बारे में कुछ भी कहने की अनुमति नहीं होती. ऐसे और भी बहुत से निषिद्ध विषय होते हैं लेकिन आपको यह सीखना होता है कि किसे कितनी इज़्ज़त दी जानी चाहिये. आप चाहे कितने ही मशहूर फ़ुटबॉलर या और कोई खिलाड़ी क्यों न हों, आपको एक हत्यारे व्यक्ति के बारे में अपने विचार व्यक्त करने का पूरा अधिकार होता है.”

अगर मारादोना की मौत पर कुछ लिखे-कहे बिना चैन न आ रहा हो तो तेल और फ्लैट बेचने वाले महानायकों वाले हमारे देश के हर खेलप्रेमी नागरिक को सर्बिया के जबदस्त फिल्मकार एमीर कुस्तुरिका की 2008 में बनाई फिल्म 'मारादोना' एक बार जरूर देखनी चाहिए. 

मारादोना कहता था - "अमेरिका की यह बात मुझे ज़रा भी पसंद नहीं है कि वह दुनिया पर अपनी दादागीरी चलाने के लिए बहुत मेहनत करता है और उसे दुनिया के हर नागरिक की समस्या दूर करने का फितूर है."

यानी माराडोना बेहतरीन खिलाडी, बेबाक बदनाम, शर्मनाक , मनोरंजक फिलोसोफर...सब कुछ थे. ऐसी असाधारण ज़िंदगी वाले डिएगो माराडोना और उनकी 10 नम्बर की जर्सी को सालों तक , हर 25/11 को असाधारणता के लिए याद किया जायेगा। 

सलाम चैम्पियन! अलविदा चैम्पियन!

Monday, June 29, 2020

सत्यानाशी (वानस्पतिक नाम:Argemone mexicana) Mexican prickly poppy :

सत्यानाशी (वानस्पतिक नाम:Argemone mexicana) Mexican prickly poppy :

      खेत में इसका एक पौधा भी उपज गया तो छह महीने में पूरा खेत भर जाता है इससे... उसके बाद उस खेत में खेती सम्भव नहीं होती। फसल उपजे भी तो इसके कांटों के कारण न सोहनी हो पाती है न कटनी... खेत का लगभग  सत्यानाश ही हो जाता है। इसीलिए बुजुर्गों ने इसका नाम सत्यानाशी रख दिया शायद...
     फिर भी! जब इसमें फूल आते हैं तो कितना सुन्दर दिखता है यह। गज्जब का आकर्षण होता है इसमें... शायद कंटीली चीजें यूँ ही बहुत आकर्षक होती हैं। मनुष्य और जंतु फूल के लोभ में जाता है, और कांटों से छलनी हो कर लौटता है। गाँव के बूढ़े तभी कहते थे कि अधिक आकर्षक वस्तुओं से दूर ही रहना चाहिए।


     हमारा जीवन भी ऐसा ही होता है। फूल की तरह सुन्दर, आकर्षक,  पर मोह ईर्ष्या लोभ आदि कांटे घेरे रहते हैं। अंतर बस इतना है कि फूल के कांटे दूसरों को कष्ट देते हैं, हमारे अंदर के कांटे हमें ही दुख देते हैं। हमारे कांटे हमारी ही आत्मा में चुभते हैं।

     किसी के प्रति घृणा में डूबा व्यक्ति अंत तक समझ नहीं पाता कि वह अपना ही अहित कर रहा है। उसे लगता है कि वह दूसरों का मजाक उड़ा कर, उन्हें पीड़ा दे कर उन्हें पराजित कर देगा। पर ऐसा होता नहीं है। सामने वाला धीरे धीरे व्यंग्य,आक्षेप सहने का आदी हो जाता है, पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाता है, और इधर घृणा में डूबा व्यक्ति स्वयं पराजित हो जाता है।
     कई बार जब हमें कोई व्यक्ति गलत तरीके अपना कर सफल होता दिखता है, तो हमें जलन होने लगती है। यह जलन कई बार घृणा में भी बदल जाती है। पर समझना होगा कि हम जलन या घृणा में डूब जाएं तो उसे पराजित नहीं कर सकते। रामायण की कथा में भगवान श्रीराम ने यदि रावण से केवल घृणा की होती, या उससे डाह रखे होते तो उसे पराजित कर पाते क्या? नहीं! श्रीराम ने चौदह वर्षों तक अपने तरकश में तीर बटोरे... उन्होंने रावण के हर दांव की काट खोजी... उन्होंने स्वयं को रावण से अधिक समृद्ध किया... फल यह कि रावण पराजित हुआ। संयम ज़रूरी है।
     कल्पना कीजिये, महाभारत में पांडवों ने अपने बनवास के बारह वर्ष यदि कौरवों से घृणा करने में ही, उनपर क्रोध करने में ही निकाल दिए होते तो क्या महाभारत युद्ध में उन्हें विजय मिलती? नहीं न?
  
    सत्यानाशी का पौधा आयुर्वेद में औषधि माना जाता है। यह एक नहीं, अनेक रोगों में लाभ पहुँचाता है। कितना आश्चर्यजनक है न, सत्यानाशी जैसा कंटीला पौधा भी जीवनदायक औषधि है। जीवन का एक रङ्ग यह भी है। कई बार हम जिसे बुरा मान कर त्याग चुके होते हैं वही विपत्ति में सहायक सिद्ध होता है। परिस्थितियाँ कब किसे आपका शत्रु बना दें और किसे सहयोगी, यह कोई नहीं जानता। सो बेहतर है कि घृणा से मुक्ति पा ली जाय। है न?
अब यह न सोंचियेगा कि क्या शत्रुओं से भी घृणा करना छोड़ दें! शत्रु से भी घृणा कर अपनी ऊर्जा व्यर्थ क्यों करना, उसे पराजित ही करना है तो शस्त्र इकट्ठे करने चाहिए, लड़ना चाहिए बिना विद्वेष के, ईमानदारी से। वैसे शत्रुता का भाव भी नकारात्मक ही है, इसे छोड़ना ज्यादा बेहतर होगा अगर छोड़ सको तो।


    राजनीति, विचारधारा, भाषा, क्षेत्र... जाने कितने कारक हैं जो मनुष्यों में दूरी बनाते हैं। इनसे मुक्ति पा लेना ही ज्ञान है। घृणा किसी से भी ठीक नहीं, क्योंकि कोई हमेशा नहीं रहने वाला,  विचार और विचारधाराएं रहेंगी, संघर्ष रहेगा।
  
   मोह, घृणा, लोभ, काम, क्रोध, जलन आदि विकृतियां सब में होती हैं। किसी में थोड़ा, किसी में कम, किसी में थोड़ा अधिक... कोई इनसे अछूता नहीं, हम सब में ये कांटे भरे पड़े हैं। यह भी सही है कि हम इन विकृतियों से पूर्ण रूप से मुक्त भी नहीं हो सकते। फिर भी... जितना सम्भव हो सके , स्वयं को इन कांटो से मुक्त करना चाहिए।

Sunday, June 7, 2020

त्रिवेणी ghazal

त्रिवेणी : ये दो लाइन के शेर न होकर तीन लाइन की त्रिवेणियाँ हैं। जिसका अविष्कार गुलज़ार साब ने किया है और जगजीत जी ने बेहतरीन compose किया है। त्रिवेणी की खासियत ये है कि दो लाइन के शेर अपने आप में पूर्ण हैं, किंतु तीसरी लाइन आकर , पहले दो लाइनों के अर्थों को लगभग बदल ही देती है । पहले दो लाइनों के विचार और मायने को तीसरी लाइन आकर अर्थों की एक ऐसी नयी खिड़की खोल देती है और एक अलग ही रोशनी देती है कि फिर आप उन तीन लाइन के शेर को एक वृहत कैनवस के साथ ,  नए dimension में सोंचते हैं और पूरे विस्तृत विचार को समझ पाते हैं , कि ओह ये बात कहना चाह रहा था शायर!) 


ज़िन्दगी क्या है जानने के लिए,
ज़िंदा रहना बहुत जरुरी है,
आज तक कोई भी रहा तो नहीं!

सारी वादी उदास बैठी है,
मौसम-ए गुल ने ख़ुदकुशी कर ली ,
किसने बारूद बोया बाग़ों में !

आओ हम सब पहन लें आइना ,
सारे देखेंगे अपना ही चेहरा ,
सबको सारे हसीं लगेंगे यहाँ !

है नहीं जो दिखाई देता है ,
आईने पर छपा हुआ चेहरा ,
तर्जुमा आइने का ठीक नहीं !

हमको ग़ालिब ने ये दुआ दी थी ,
तुम सलामत रहो हज़ार बरस ,
ये बरस तो फ़क़त दिनों में गया !

लब तेरे मीर ने भी देखे है ,
पंखुड़ी इक गुलाब की सी है ,
बात सुनते तो ग़ालिब हो जाते !

ऐसे बिखरे हैं रात दिन जैसे ,
मोतियों वाला हार टूट गया ,
तुमने मुझको पिरोके रखा था !

*************************
Reference: https://youtu.be/QE4nIiuMSS4

Sunday, May 31, 2020

Spread HAPPYNESS (सच्ची खुशियां, better customs ) :

कुछ रूपयों का हार, नारियल, अगरबत्ती लेकर 

 या 

चादर, इत्र, फूल, मोमबत्ती लेकर किसी धार्मिक स्थल जाने की बजाए,

 कुछ रुपयों का बिस्किट, chocolate, मिठाई, गुब्बारे, खिलौने लेकर जाने का प्रयत्न करें.....

कुछ छोटे बच्चे खुशियों के आने की राह देखते हैं...

खुशियां मांगने से नही, बांटने से मिलती है....
TheGodOfSmallThings

Sunday, May 24, 2020

I love Tea...चाय पीजिये और कोरोना से बचिए

एक कप चाय दूर करेगी कोरोना संक्रमण का खतरा, कई दवाओं से ज्यादा है कारगर : 

Thursday, May 21, 2020

music timless love song Sathiya tuney kya kiya

हिंदी के कुछ गाने timless love songs हैं। जैसे कि ये ..1991 का गाना है पर आज भी उतना ही कर्णप्रिय (melodious) और खूबसूरत लगता है, बार बार सुनने का मन करता है। SP balasubraminam और चितत्रा की आवाज और आनंद मिलिंद की धुन बेहद खोइबसूरत है , सुनिएगा एक बार, ज़रूर , humble request है..plz..
Duration : 5:12 
Size : 6.6MB , 
Sathiya Tune Kya kiya | साथिया तूने क्या किया – Chitra – Balasubrahmanyam

Gaana.com link : 
https://gaana.com/song/saathiya-tune-kya-kiya-1 

साथिया तूने क्या किया?
बेलिया ये तूने क्या किया?
मैने किया तेरा इंतेज़ार,
इतना करो ना मुझे प्यार!

साथिया तूने क्या कहा?
बेलिया ये तूने क्या कहा?
यूँ ना कभी करना इंतज़ार,
मैने किया है तुमसे प्यार!
मैने किया है तुमसे प्यार।

साथिया तूने क्या किया?
बेलिया ये तूने क्या किया?

इतनी मोहब्बत सह ना सकूँगा,
सच मानो ज़िंदा रह ना सकूँगा.
तुझको सम्हालूं ये मेरा ज़िम्मा,
मैं हू तो क्या ग़म जाने तमन्ना!
अब जीना मरना मेरा जानम तेरे हाथ है,
मैने कहा ना सनम अब तू मेरे साथ है!
तो फिर सम्हाल…ये मैं चला, 
जाना कहाँ…आ दिल मे आ,
ला ला ला …

साथिया तूने क्या किया? 
बेलिया ये तूने क्या किया?

दिल के चमन का हंसना तो देखो,
जागी नज़र का सपना तो देखो!
ऐसे हुए हम , इक जान एक दिल,
तू है के मैं हूँ ,  कहना है मुश्किल,
झोंका बसंती है तू,  तन है गुलाबी मेरा!
दो रंग मिलने के बाद, 
होते नही है जुदा.
तो फिर संभाल…दिल ये चला,
जाना कहां…आ दिल मे आ.

साथिया तूने क्या कहा,
बेलिया ये तूने क्या कहा?
यूँ ना कभी करना इंतज़ार
मैने किया है तुमसे प्यार.
मैंने किया है तुमसे प्यार!
इतना करो ना मुझे प्यार..
इतना करो न,  मुझे प्यार!

Movie: Love (1991)
Singers: Krishnan Nair Shantakumari Chitra (K.S. Chitra), S. P. Balasubrahmanyam
Song Lyricists: Majrooh Sultanpuri
Music: Anand Milind
Music Label: Venus Records
Starring: Salman Khan, Revthi, Shafi Inamdaar, Amjad Khan
Released on: 30th August, 1991
Music Genre: hindi duet soft love song,  90s magic, slow melody, timless love song

Wednesday, May 20, 2020

New Business Startup suggestion by Sholay's Gabbar (गब्बर की सलाह नए व्यवसाय के लिए )

कोई नया व्यवसाय शुरू करने के लिए क्या आवश्यक है : 

चलो गब्बर से सीखते हैं क्या क्या करना चाहिए ?

गब्बर सिंह एक वास्तविक प्रबंधन गुरु था।

 उन्होंने पढ़ाया : 

1. जो डर गया - समझो मर गया !
 Means :
व्यवसाय की सफल नींव रखने के लिए साहस और उद्यम महत्वपूर्ण कारक हैं।
सफलता प्राप्त करने के लिए पराक्रम की जरूरत है।

2. कितने आदमी थे ? मतलब :
प्रतियोगिता और उसके आकार को जानना महत्वपूर्ण है। वह समझ गया कि एक छोटी सी टीम भी फर्क कर सकती है।

3. अरे ओ सांभा, कितना इनाम रक्खें है , सरकार हम पर?
मतलब :
अपने बाजार मूल्य को जानें। अपने खुद के ब्रांड को बढ़ावा देना बहुत महत्वपूर्ण है और हमेशा ये बढ़ना जरूरी है |

4 गोली 6 और आदमी 3 बहुत नाइंसाफी है !
मतलब:
डिमांड कम है और सप्लाई ज्यादा करोगे तो मारे जाओगे

5. ले अब गोली खा!

कभी-कभी संगठन के हित में आपको कठोर और अलोकप्रिय निर्णय लेने पड़ते हैं।

इसलिए कभी-कभी किसी कर्मचारियों के नेता को बाहर का रास्ता दिखाना पड़ता है अगर वे आपकेबिज़नेस को ख़राब करने करने की कोशिश में हों |

6. ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर।

बाजार में खतरों के तत्वों को पहचानें और उन्हें कम से कम करने के उपाय करें

7. होली कब है, कब है होली?

आपके बिज़नेस के भीतर प्रमुख घटनाओं का आंकलन करना बहुत जरूरी है | अगर पहले से पता है कब क्या होगा तो आप अपने कम्पीटिशन वाले से जीत पाओगे |

8.बसंती, नाच !

सिर्फ वेतन और बोनस से अपनी टीम को प्रेरित न करें बसंती को भी नाचना पड़ेगा ....।

 ये जरूरी चीजें बताने के लिए गब्बर को धन्यवाद कहें, और Happy journey ...

Wednesday, May 13, 2020

विश्व पुस्तक दिवस पर एक विचार

मस्तिष्क की टेम्पररी मेमोरी के विचारों को प्रतीको के माध्यम से पेरमानेंट मेमोरी मे रेप्लिकेट करना और उनकी कई प्रतियाँ बना लेना कोई मामूली परिवर्तन नहीं था, यह मानव सभ्यता के लिए एक क्रांति थी। हम खुद के ही विचार जीवित रहते भूलते रहते हैं ( इसीलिए लोगो को टू-डू लिस्ट बनानी पड़ती है, कलेंडर मे जन्म दिन और सालगिरह वगैरह डालकर रिमाइंडर लगाना पड़ता है, रासन की लिस्ट बनानी पड़ती है)। मृत्यु के साथ विचार भी दफन हो जाते हैं; (जरूर उसमे से कुछ अपने आस पास के लोगों द्वारा अगली पीढ़ी को चले जाते है)। जब लेखन नहीं था, तो कितना मुश्किल रहा होगा, मेरे कुछ विचार हैं उन्हे कोई सुनना नहीं चाहता है, लेकिन मेरा सुनाने का मन है, तो क्या करूँ। कोई सुनता भी है, तो याद नहीं रख पाता है, कोई याद भी रख पाता है तो विचार मे घालमेल कर देता है। करोड़ो लोग जो जा चुके हैं, उनके अनुभव से अर्जित ज्ञान को किताबें संचित रखती हैं, उन अनुभवों का एक सूक्ष्म हिस्सा भी हम व्यक्तिगत अनुभव से हाँसिल नहीं कर सकते। इसलिए ज्यादा से ज्यादा किताबें पढे, वह उससे कई गुना ज्ञान दे सकती हैं जो हम व्यक्तिगत अनुभव से जीवन भर मे नहीं प्राप्त कर सकते हैं। किताबों का चुनाव भी एक मुद्दा है लेकिन उस पर फिर कभी।...

Thursday, April 23, 2020

विश्व पुस्तक दिवस पर एक विचार

मस्तिष्क की टेम्पररी मेमोरी के विचारों को प्रतीको के माध्यम से पेरमानेंट मेमोरी मे रेप्लिकेट करना और उनकी कई प्रतियाँ बना लेना कोई मामूली परिवर्तन नहीं था, यह मानव सभ्यता के लिए एक क्रांति थी। हम खुद के ही विचार जीवित रहते भूलते रहते हैं ( इसीलिए लोगो को टू-डू लिस्ट बनानी पड़ती है, कलेंडर मे जन्म दिन और सालगिरह वगैरह डालकर रिमाइंडर लगाना पड़ता है, रासन की लिस्ट बनानी पड़ती है)। मृत्यु के साथ विचार भी दफन हो जाते हैं; (जरूर उसमे से कुछ अपने आस पास के लोगों द्वारा अगली पीढ़ी को चले जाते है)। जब लेखन नहीं था, तो कितना मुश्किल रहा होगा, मेरे कुछ विचार हैं उन्हे कोई सुनना नहीं चाहता है, लेकिन मेरा सुनाने का मन है, तो क्या करूँ। कोई सुनता भी है, तो याद नहीं रख पाता है, कोई याद भी रख पाता है तो विचार मे घालमेल कर देता है। करोड़ो लोग जो जा चुके हैं, उनके अनुभव से अर्जित ज्ञान को किताबें संचित रखती हैं, उन अनुभवों का एक सूक्ष्म हिस्सा भी हम व्यक्तिगत अनुभव से हाँसिल नहीं कर सकते। इसलिए ज्यादा से ज्यादा किताबें पढे, वह उससे कई गुना ज्ञान दे सकती हैं जो हम व्यक्तिगत अनुभव से जीवन भर मे नहीं प्राप्त कर सकते हैं। किताबों का चुनाव भी एक मुद्दा है लेकिन उस पर फिर कभी।...

Saturday, April 4, 2020

Polio Vaccine दो बूंद ज़िंदगी की :

Polio Vaccine दो बूंद ज़िंदगी की  : 

एक कहानी सुनेंगे? एक सच्ची कहानी जो हम सबकी ज़िंदगी से जुड़ी है,  पोलियो की कहानी। पोलियो के कहर की कहानी। और उसके पराभव की कहानी। पोलियो को खत्म करने वाले महानायकों की कहानी। शायद थोड़ी बोरिंग लगे पर माफ कीजियेगा , क्या करें जीवन से जुड़ी सच्ची कहानियां अक्सर  ऐसी ही होती है और उसपे हम भी खराब लेखक हैं। 

चलिए शुरू करते हैं...
पोलियो एक ऐसी बीमारी है जो किसी समय लाखों लोगों को अपाहिज बना देती थी। इसके कितने ही शिकार मर जाते थे। लेकिन वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के संयुक्त प्रयासों से आज यह बीमारी धरती से खत्म होने की कगार पर है। यह कैसे हुआ? इसकी शुरुआत हुई 1935 में, जब न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के एक युवा शोधकर्ता मौरिस ब्रॉडी ने सबसे पहले इसकी वैक्सीन बनाई। उन्होंने इसे सबसे पहले चिंपांजी पर टेस्ट किया, फिर खुद पर और फिर कुछ बच्चों पर। उन्हीं दिनों एक अन्य शोधकर्ता जॉन कोलमेर ने एक अन्य वैक्सीन बनाई और इसे बच्चों पर टेस्ट किया। ये दोनों ही प्रयोग बुरी तरह से असफल रहे। कुछ बच्चों को तो इसके गंभीर साइड इफ़ेक्ट भी हो गए। उसके बाद काफी लोगों ने कोशिशें की लेकिन सफलता हाथ नहीं आयी। फिर 1948 में एक अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस वैलर ने पोलियो वायरस को लेबोरेटरी में कल्चर करने का तरीका खोज निकाला जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरुस्कार दिया गया। फिर 1952 में एक वैज्ञानिक जोनास साक और उनकी टीम ने पहले सफल पोलियो वैक्सीन का आविष्कार किया। जोनास साक का जन्म न्यूयॉर्क शहर में 1914 में हुआ था। उन्होंने 1939 में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से मेडिकल की डिग्री हासिल की। लेकिन उनकी रुचि मेडिकल प्रैक्टिस में नहीं थी। इसलिए कुछ समय प्रैक्टिस करने के बाद उन्होंने अपना कार्यक्षेत्र रिसर्च को बना लिया। उन दिनों पोलियो एक डर पैदा करने वाली बीमारी हुआ करती थी। 1952 में अमेरिका में पोलियो के 58000 केस सामने आए थे जिनमें से 3145 की मृत्यु हो गई थी। 21269 कम या ज्यादा विकलांगता का शिकार हो गए थे। 1947 में जोनास साक पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के मेडिकल स्कूल में काम करने लगे। यहां उन्होंने चुने हुए लोगों की एक टीम बनाई और अगले सात साल के लिए पोलियो वैक्सीन की रिसर्च में जी जान से जुट गए। जब वैक्सीन बन कर तैयार हो गई तो इसका फील्ड ट्रायल किया गया। यह उस समय तक का सबसे विस्तृत फील्ड ट्रायल था। इसमें 20000 डॉक्टरों और पब्लिक हेल्थ अफसरों, 64000 स्कूल कर्मियों, 220000 वालंटियरों ने हिस्सा लिया। 1800000 स्कूली बच्चों को यह वैक्सीन दी गई। ट्रायल की रिपोर्ट 12 अप्रैल 1955 को सार्वजनिक की गई। प्रयोग सफल रहा था। पूरा अमेरिका खुशी से झूम उठा था। लोग लगातार बधाइयां दे रहे थे, उनके सम्मान में सलाम भेज रहे थे, स्कूलों की छुट्टियां हो गई थी। यह मानव जाति के इतिहास में आगे की एक छलांग थी। डॉ जोनास साक "चमत्कारी कार्यकर्ता" के तौर पर प्रसिद्ध हो चुके थे। इस प्रयोग के बाद तो अमेरिका ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी डॉ जोनास साक की बनाई वैक्सीन से व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू हो गए। डॉ साक ने कहा था कि पोलियो का टीकाकरण एक नैतिक जिम्मेदारी होना चाहिए। डॉ साक ने अपनी इस खोज का पेटेंट नहीं करवाया। एक अनुमान के अनुसार वैक्सीन के पेटेंट के बाद इसकी कीमत 7 अरब डॉलर तक होती। लेकिन डॉ साक को पैसे की बजाय मानवता की परवाह थी। एक पत्रकार ने जब इनसे पूछा कि इसका पेटेंट किसके पास है तो साक ने जवाब दिया कि इसका कोई पेटेंट नहीं है। क्या आप सूरज का पेटेंट कर सकते हैं?

उन्हीं दिनों एक और वैज्ञानिक डॉ अल्बर्ट साबिन भी पोलियो वैक्सीन की रिसर्च में लगे हुए थे। साक की वैक्सीन मरे हुए वायरस पर आधारित थी जिसने इंजेक्शन से शरीर में पहुंचाया जाता था। साबिन निष्क्रिय किये हुए जिंदा वायरस पर आधारित वैक्सीन बना रहे थे जिसे मुंह से बूंद बूंद करके शरीर में पहुंचाया जा सके। "दो बूंद जिंदगी की" के बारे में हम सभी जानते हैं। अल्बर्ट साबिन का जन्म रूसी साम्राज्य के अधीन पोलैंड में एक यहूदी परिवार में 1906 में हुआ था। 1922 में वे परिवार सहित अमेरिका में चले गए थे। साबिन ने 1931 में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से मेडिकल की डिग्री हासिल की। इसके बाद अलग अलग जगह काम करते हुए इनकी रुचि संक्रामक रोगों से संबंधित रिसर्च में होने लगी। दूसरे विश्वयुद्ध में ये अमेरिकी सेना के साथ थे और इन्होंने जापानी बुखार की वैक्सीन विकसित करने में मदद की। इसके बाद ये पोलियो वैक्सीन के शोध में जुट गए। इन्होंने 1954 में ओरल वैक्सीन यानि मुंह से दी जा सकने वाली जिंदा वायरस पर आधारित वैक्सीन का आविष्कार किया। साथ ही 1955 में साक भी पोलियो की वैक्सीन का आविष्कार कर चुके थे। साक की यह वैक्सीन पोलियो की अधिकतर जटिलताओं को रोकती थी लेकिन यह आंतों में पोलियो के इन्फेक्शन को रोकने में नाकाम थी। साबिन की ओरल वैक्सीन यह काम बखूबी कर सकती थी। इसका प्रभाव लम्बे समय तक रहता था। और यह सस्ती भी पड़ती थी। साबिन ने खोज की थी कि पोलियो का वायरस असल में आंतों में ही द्विगुणित होता है और वहीं से हमला करता है। ओरल वैक्सीन इसको वहीं पर रोकती थी और इसके प्रसार पर रोक लगाती थी। इससे इस बीमारी का धरती से जड़ से खात्मा सम्भव था। उन दिनों अमेरिकी सरकार साक की बनाई वैक्सीन पर ज्यादा भरोसा करती थी इसलिए साबिन की वैक्सीन को तवज्जो मिली सोवियत संघ में। 1955 से 1961 तक साबिन की वैक्सीन को सोविएत संघ, पूर्वी यूरोप के भागों में, सिंगापुर, मैक्सिको और नीदरलैंड में लगभग दस करोड़ लोगों को दिया जा चुका था। साबिन को सोवियत संघ सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया गया बावजूद इसके कि वह एक अमेरिकी नागरिक थे और वह शीत युद्ध का काल था। यह डॉ साबिन की प्रतिभा और मानवता की भलाई के प्रति उनके जज्बे की वजह से हुआ था। 1957 में साबिन ने पोलियो के मौजूद तीनों वायरसों पर आधारित ट्राईवेलेंट पोलियो वैक्सीन विकसित की। 1961 में इसे अमेरिका के सिनसिनाटी में टेस्ट किया गया और उसकी वजह से सिनसिनाटी पोलियो मुक्त हो गया। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरी दुनिया में व्यापक पोलियो मुक्ति अभियान शुरू किया तो उसमें साबिन की बनाई हुई पोलियो वैक्सीन ही इस्तेमाल की गई। हमारे देश में भी पोलियो टीकाकरण अभियान जिसकी वजह से हम पोलियो को खत्म करने में सफल रहे हैं, साबिन की बनाई हुई "दो बूंद जिंदगी की" पर ही आधारित था। साबिन ने भी अपनी इस खोज का पेटेंट करवाने से इनकार कर दिया और अपनी यह खोज मानवता को समर्पित कर दी। 
डॉ जोनास साक, डॉ अल्बर्ट साबिन और उनके जैसे अन्य मानवता के सेवकों की बदौलत हम एक अच्छी जिंदगी जी रहे हैं। बीमारियों से बचे हुए हैं। विज्ञान आज मुनाफे की चपेट में है लेकिन साक और साबिन जैसे लोग समय समय पर मानवता के सेवक के रूप में विज्ञान की लौ को जलाए रखते हैं और मानवता में विश्वास बनाए रखते हैं।

आशा है पोलियो के उन्मूलनकर्ताओं की कहानी आपको थोड़ी बोरिंग पर अच्छी लगी होगी। अगर अच्छी लगी हो  तो इसे सबको बताएं; खासतौर पर बच्चों को, उन्हें बताएं कि मानवता के रक्षक महानायक कौन होते हैं और कैसे होते हैं। इन महानायकों का क्या योगदान है। इनके जीवन और मूल्यों से क्या प्रेरणा लेनी चाहिए।

एक बेहतर दुनिया बनाने में अपना  रचनात्मक योगदान दीजिये...
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Monday, March 30, 2020

what is N95 Mask ?? types of Masks:

Corona COVID19 and Masks :
मास्क के बारे में सारी कीमती जानकारी संक्षेप में हिंदी और IN  ENGLISH: 

In this era of Corona panic and fear, there are lot of confusions and misconceptions existing regarding the use of mask, not only amongst the laypersons but also among the health care providers.
On one hand masks are not available for the risk group while on other hand, who are not at risk, spending unnecessary money and energy to procure these masks.
This situation provoked me to write these details, hope this would improve the understanding about the various types of commonly used masks and clarify the proper indications of use.

Q1 ... What are the common types of masks
Ans:
1 Cloth mask
2 Surgical mask

Q2... What are the Respirators?
Ans:
N- 95
N- 99
N- 100
are the respirators.

Q3 : what is the difference between mask and respirator
Ans: Mask has loose fit, it doesn't seal nose and mouth snugly.
During respiration air moves along the edges of the mask, while respirator has tight seal and most of the times air passes only through its material after filtration.

Q4: Are all respirator masks are same
Ans: No, respirators are graded according to their filtration efficiency.
According to the used filter type According to the type of materials used And additional features They are of different types.

Q5: what is the efficiency grading
Ans : According to the efficiency of filtration these are usually graded as-
95, 99 and 100 Means these respirator masks are capable of traping 95%, 99% and 99.9% of particles, smaller up to the 0.3 micron size.
This grading can also be done as
P1 (FFP1) - 80%
P2 (FFP2) - 95%
P3 (FFP3) - 99.95%
Filtration efficiency.

Q.6: What is the N,R or P meaning written over mask
Ans...
N - not oil proof
R- oil resistant
P- oil proof
(Eg. N 95 is not oil proof).

Q7. Few repirator masks have valve, what is that.
Ans : That valve is nothing but a simple exhalation port with one way valve mechanism, it reduces effort of expiration, reduce heat inside the mask, dissipate humidity and reduce co2(carbon Di Oxide) the amount of from the  dead space of mask.

Q.8.. When to use surgical masks?
Ans... Surgical mask or procedure mask is the most common mask used by health workers.
It is not designed to protect wearer from inhaling the air born bacteria and viruses.
It is used to block only large particle droplets, splashes, sprays or splatter.
It also reduce the exposure of wearer's saliva and respiratory secretions to  others. Surgical mask also remind wearer not to touch their mouth/nose which could otherwise transfer virus/bacteria after having touched a contaminated surface.

Q9: what is the filtration capacity of surgical mask
Ans: It can vary between 10-90% according to the manufacturer.

Q..10.. how one can assure about the quality of mask
Ans..
Mask should be certified by the
NIOSH (National institute for occupational safety and health)
Or
NPPTL (National personal protective technology laboratory)

Q.11:  Does cloth mask effective?
Ans.
Cloth is a wooven material thus pore size is bigger than surgical mask which is made up of non wooven polypropylene material thus cloth mask is less effective than surgical mask in terms of filtration efficiency.

Q12 :  Does extra layer improve efficacy of cloth mask
Ans: No, it's not advisable. Each extra layer adds only 2% of extra protection on the cost of comfort .

Q.13: Can surgical/cloth mask be used routinely
Ans.
Yes these can be used routinely.
Few studies done on normal population concluded that the use of simple mask can decrease the incidence of flu up to 75%.
Few east asian countries following this practice of routine use of mask.

Q.14: Can mask be reused?
Ans: Cloth mask can be reused after washing
- Surgical mask should be discarded after single use or after soiled
- Respirator mask should be discarded when resistance of breathing get increased or get soiled. Viruses/bacterias can grow and flourish inside the reused mask.

Q15: what are the WHO recommendations for using masks?
Ans...
- *For the normal population, any type of mask is not required, maintaining the social distance and hand hygiene are the sufficient.*
- Sick person should wear surgical mask
- Any person who is taking care of sick person should also wear the surgical mask.
- N 95 mask should be used by the person who is potential to get expose with the respiratory secretions of the infected patient eg. During the Endotracheal intubation, CPR, Ventilation, Bronchoscopy and Tracheostomy etc.

Summary:
Please don't create panic and use this precious commodity judiciously⚖...
lets create A Better World...🌈

Thanks for giving your precious time and attention..

The Better World , in association with KN Healthcare & Lotus Safety ...TheBetterWorldindia@outlook.com
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏


कोरोना काल मे मास्क के पहलुओं के बारे में सारी कीमती जानकारी संक्षेप में:

कोरोना कोविद19 की घबराहट और भय के इस युग में, मास्क के उपयोग के बारे में बहुत सारे भ्रम और गलत धारणाएं मौजूद हैं, न केवल आम आदमी के बीच बल्कि स्वास्थ्य देखभाल सेवा प्रदाता स्वास्थ्य कर्मियों health workers के बीच भी।

एक तरफ इस जोखिम समूह के लिए मास्क उपलब्ध नहीं हैं, जबकि दूसरी तरफ, जो जोखिम में नहीं हैं, इन मास्क को खरीदने के लिए अनावश्यक धन और ऊर्जा खर्च करते हैं।

इस स्थितियों ने मुझे इन विवरणों को लिखने के लिए उकसाया, आशा है कि यह आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के मास्क और रेस्पिरेटर्स (Mask & Respirators)  के बारे में सामान्य समझ में सुधार करेगा और उपयोग के उचित संकेतों को स्पष्ट करेगा। 

Q1 : मास्क के सामान्य प्रकार क्या हैं?

उत्तर:

1 कपड़े का मास्क

2 सर्जिकल मास्क


Q2 : रेस्पिरेटर क्या हैं?

उत्तर:

एन- 95

एन- 99

एन- 100 

श्वासयंत्र हैं।


Q3: मास्क और श्वासयंत्र(रेस्पिरेटर्स) बीच अंतर क्या है?

उत्तर: मास्क ढीली फिट होती है, यह नाक और मुंह को (ज्यादा ताकत से)किनारों से सील नहीं करता है। श्वसन के दौरान मास्क के किनारों के साथ हवा चलती है। जबकि श्वासयंत्र (रेस्पिरेटर्स) में किनारे सील्ड होते है और अधिकांश समय वायु केवल निस्पंद के बाद अपनी फिल्टर सामग्री से गुजरती है।


Q4: क्या सभी श्वासयंत्र मास्क समान हैं?

उत्तर: नहीं, सांस लेने वालों को उनकी निस्पंदन क्षमता के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।

उपयोग किए गए फ़िल्टर प्रकार के अनुसार, उपयोग की गई सामग्री और अतिरिक्त सुविधाओं के प्रकार के अनुसार वे विभिन्न प्रकार के होते हैं।

Q5: दक्षता ग्रेडिंग क्या है?

उत्तर: निस्पंदन की दक्षता के अनुसार ये आमतौर पर निम्नानुसार वर्गीकृत किए जाते हैं-

९५, ९९ और १०० अर्थात ये रेस्पिरेटर मास्क ९५%, ९९% और ९९.९% कणों को अपने जाली(फिल्टर) में फंसा कर रोकने में सक्षम हैं, जो ०.५ माइक्रोन आकार से छोटे होते हैं। इनकी इस प्रकार ग्रेडिंग (वर्गीकरण) भी किया जाता है: 

P1 (FFP1) - 80%

P2 (FFP2) - 95%

P3 (FFP3) - 99.95%

निस्पंदन दक्षता।


Q.6: मास्क के ऊपर लिखे गए N, R या P का अर्थ क्या है?

उत्तर: ...

एन - तेलप्रतिरोधी नहीं

आर- तेल प्रतिरोधी

पी- तेल प्रतिरोधी

(उदा:  एन 95 तेल प्रमाण नहीं है)।

Q 7:  कुछ repirator मास्क में वाल्व होता है, वह क्या है?

उत्तर: वह वाल्व कुछ भी खास नहीं बल्कि एक तरह से वाल्व तंत्र के साथ एक सरल साँस लेना और छोड़ना बनाने में सहायक बंनाने की युक्ति है, यह सांस लेने की प्रक्रिया के प्रयास को कम करता है, मास्क के अंदर गर्मी को कम करता है, आर्द्रता को नष्ट करता है और सीओ 2 (कार्बन डाई ऑक्साइड) को मास्क के खाली स्थान से कम करता है ताकि पहनने वाले कि सुरक्षा और आसानी बनी रहे।

Q.8 .. सर्जिकल मास्क कब इस्तेमाल करें?

उत्तर ... सर्जिकल मास्क या प्रक्रिया मास्क स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा उपयोग किया जाने वाला सबसे आम मास्क है।

इसे पहनने वाले को हवा में पैदा होने वाले बैक्टीरिया और वायरस से बचाने के लिए नहीं बनाया गया है।

 इसका उपयोग केवल बड़े कण बूंदों, स्प्लैश, स्प्रे या स्प्लिटर को ब्लॉक करने के लिए किया जाता है।

यह दूसरों को पहनने वाले की लार और श्वसन स्राव के जोखिम को भी कम करता है। सर्जिकल मास्क पहनने वाले को याद दिलाता है कि वे अपने मुंह / नाक को न छुएं जो दूषित सतह को छूने के बाद वायरस / बैक्टीरिया को स्थानांतरित कर सकता है।


Q9: सर्जिकल मास्क की निस्पंदन क्षमता क्या है?

उत्तर: यह भिन्न भिन्न निर्माता के अनुसार 10-90% के बीच भिन्न हो सकता है।

Q10  मास्क की गुणवत्ता के बारे में कोई कैसे आश्वस्त हो सकता है?

उत्तर: ..

मास्क की गुणवत्ता को प्रमाणित करने वाली अजेंसीज  NIOSH (व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए एक राष्ट्रीय संस्थान ) या एनपीपीटीएल (राष्ट्रीय व्यक्तिगत सुरक्षा प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला) से प्रमाणित हो तो सर्वश्रेष्ठ या फिर उत्पादक द्वारा ।

Q.11: क्या कपड़ा मास्क प्रभावी है?

उत्तर: कपड़ा एक बुना हुआ पदार्थ होता है, अक्सर इसके छिद्र का आकार सर्जिकल मास्क के छिद्र से बड़ा होता है, जो नॉन वूवन पॉलीप्रोपाइलीन सामग्री से बना होता है, इसलिए कपड़े का मास्क निस्पंदन दक्षता के मामले में सर्जिकल मास्क की तुलना में कम प्रभावी होता है।

प्रश्न 12: क्या अतिरिक्त परत कपड़ा मास्क की प्रभावकारिता में सुधार करती है?

उत्तर: नहीं, यह ज्यादा सही नहीं है। प्रत्येक अतिरिक्त परत सांस लेने के आराम की कीमत पर अतिरिक्त सुरक्षा का केवल 2% जोड़ती है।

Q.13: क्या सर्जिकल / क्लॉथ मास्क का नियमित उपयोग किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, इनका नियमित उपयोग किया जा सकता है।

सामान्य आबादी पर किए गए कुछ अध्ययनों ने निष्कर्ष निकाला कि साधारण मास्क के उपयोग से फ्लू की घटनाओं में 75% तक की कमी आ सकती है। नकाब(मास्क) के नियमित उपयोग के अध्ययन के बाद कुछ पूर्व एशियाई देश इसका प्रयोग करते रहे है। 

Q.14: क्या मास्क का पुन: उपयोग किया जा सकता है?

Ans: बिल्कुल , कपड़े के मास्क को धोने के बाद फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।

- सर्जिकल मास्क को एकल उपयोग के बाद या गंदे होने के बाद छोड़ देना चाहिए।

- जब सांस की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है या गंदे हो जाते हैं तो रेस्पिरेटर मास्क को छोड़ देना चाहिए। वायरस / जीवाणु पुन: उपयोग किए गए मास्क के अंदर विकसित और पनप सकते हैं।

Q15: मास्क का उपयोग करने के लिए डब्ल्यूएचओ की क्या सिफारिशें हैं?

उत्तर: सामान्य आबादी के लिए, किसी भी प्रकार के मास्क की आवश्यकता नहीं है, शारीरिक दूरी बनाए रखना और हाथ की सफाई ही पर्याप्त है। 

- बीमार व्यक्ति को सर्जिकल मास्क पहनना चाहिए।

- कोई भी व्यक्ति जो बीमार व्यक्ति की देखभाल कर रहा है, उसे भी सर्जिकल मास्क पहनना चाहिए।

- एन 95 मास्क का उपयोग उस व्यक्ति द्वारा किया जाना चाहिए जो संक्रमित रोगी के श्वसन स्राव के साथ बाहर निकलने की मजबूरी रखता  है जैसे। एंडोट्रैचियल इंटुबैशन, सीपीआर, वेंटिलेशन, ब्रोंकोस्कोपी और ट्रेकियोस्टोमी आदि के दौरान।

सारांश:

कृपया घबराएं नहीं और इस कीमती वस्तु का विवेकपूर्ण उपयोग करें ...और एक बेहतर दुनिया🌈 के निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाते हुए अपना सहयोग दें.....

अपना कीमती समय देने और ध्यान से पढ़ने के लिए आपका आभार और धन्यवाद ।

डरें नहीं, लड़ें !👍

बस सजग रहे , सतर्कता बरतें..🙏

केएन हेल्थकेयर विशाखापत्तनम और लोटस सेफ्टी रायपुर के साथ मिलकर द बेटर वर्ल्ड🌐 ... TheBetterWorldindia@outlook.com

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Monday, March 23, 2020

Servo Voltage Stabilizer , AVC ( Automatic Voltage Controllers ) , dimmer and linear voltage controllers


IMPORTANCE OF AUTOMATIC VOLTAGE CONTROLLER (AVC):
Voltage variation is today one of the major problems afflicting almost every electricity consumer / industry all across the country.  Generally, voltage is low during daytime and high during the night hours / holidays / rainy season.  High Voltage phenomenon often goes undetected by consumers, whereas Low Voltage is evidently noticeable.  Both, Low and High Voltage, result in excessive power losses of electrical equipment, resulting in their premature failure apart from inflated electricity bills
The growing use of sophisticated electrical and electronic equipments, requiring a near constant voltage supply for efficient operation, makes line voltage regulation increasingly necessary and to finer limits.  Thus, AVCs or Voltage Stabilizers fulfill this growing need of providing constant voltage supply.
ADVANTAGES OF AVC:
An AVC resolves 99% of voltage problems automatically, and ensures steady voltage supply round the clock at an effective monthly cost of an electrician.  Some key advantages of installing an AVC are:
Up to 80% Reduction in Break Down of Electrical Equipment
Up to 30% Savings in Electricity Costs
Improved Productivity of Plant due to less breakdowns
Uniform Quality of End Product
Reduction in MDI (Peak Demand)  & Improvement in Power Factor
80% Depreciation as per Income Tax Act in India (being an energy saving device)

PAY-BACK PERIOD:
As per our customers feedback, the payback period for an AVC is typically between 624 months owing to the aforesaid benefits (depending upon the no. of working hours and input voltage variation.

How to choose between Rolling Type And Variac Type Servo Voltage Stabilizer: 
Now that you have opted for a Servo automatic stabilizer, you need to decide which kind of stabilizer you want. Here is a step-by-step comparative analysis between rolling contact type and variac type servo voltage stabilizer.

Mechanism
Movement of the carbon as it moves, it always rolls. As the name suggests the carbon contact used is in form of a Roller. Movement of the carbon as it moves, it always slides. The carbon contact used is in form of a Brush.
Durability of the Carbon Brush
Wear and Tear of the carbon brush is at a minimum in A rolling type Servo Stabilizer due to frictionless and smooth surface of the winding track. In a Variac, wear and Tear of the carbon brush is more due to friction and rough surface of the track, resulting in shorter life.
Better Conduction
Copper conductor used in the case of a rolling type is of Copper Strip and not copper wire; copper strip so used serves as a better current carrying conductor. Whereas, the copper conductor so used is Copper Wire, which comparatively has low current carrying capacity.
Durable Core material used
Core used at  Rolling stabilizer is purely Cold rolled Non Grain Oriented or CRGO that too fresh and not the reused one, the core so used is constructed from low loss, cold rolled, grain oriented, annealed laminations of electrical sheet steel conforming to the latest international standards. Core used in Variac type is generally CRNO (i.e. Cold rolled Non Grain Oriented) which has higher losses value in comparison to CRGO. Very rarely CRGO is used and that too made from the reused material.
Easy Assembling
Inspection of the Carbon roller of a rolling type stabilizer can be done without taking out the whole Transformer / Regulator assembly. Only by removing the top cover the condition of the carbon rollers can be observed. Whereas in a Variac type, it is completely the opposite, the transformer has to be taken out.
Backup controller
In the case of failure of the rolling type stabilizer’s automatic controller, the same can be operated manually by raise lower button, in case the motor also fails to work the Hand Wheel provided on the side of the stabilizer can be operated manually and the carbon roller can be positioned to give desired output. While the Variac type has a manual operator, it still misses out on the hand wheel part.
Higher Efficiency :
Efficiency of the  Rolling Contact Type Stabilizer is approximately 98% to 99% resulting in minimum losses and lesser electricity bills while efficiency of these Variac Stabilizers is not more than 95% to 96% resulting in more loses and higher electricity bills.
Can be used in any premises
Installation of Rolling Contact Type Stabilizer can be done for Indoor or Outdoor services. Installation of Variac or Dimmer Type Stabilizer can be done only for Indoor services.

Life of a Rolling stabilizer is better than a Variac stabilizer
Life of Rolling Contact Type Stabilizer under normal working conditions is 15 – 20 Years while Life of Variac / Dimmer Type Stabilizer under normal working conditions is approx 3 - 6 Years.


From the above write-up, you must have inferred that Rolling stabilizers are much better than Variac Stabilizers
But VARIAC type has following advantage over Rolling contact linear type is VARIAC has faster  Voltage correction speed,  lightweight and cheaper in cost.
   
 Rolling contact Linear type Vs Variac based or dimmer type : 
Given below are a few of the superior features of our SERVO VOLTAGE STABILIZER as compared to the conventional ones: using square copper section to facilitate more current carrying capacity.
We insist on the use of chain drive allowing the regulating transformer to be driven at relatively higher speeds yielding smooth commutation avoiding potential jamming.
 Carbon Roller Assembly Vs ordinary brushes.  The torroidal type dimmer has to be cleaned very often because the brushes wear deposit and carbon on the track.  The roller assembly used by us yields very low wear with the contact life expectancy exceeding 1,00,000 meters of track level.
In case of jerking loads the normal carbon brush tends to wear off because of its size limitation which would ultimately affect the efficiency of the system, whereas our roller assembly with stands jerks very effectively without hampering the working.
The core is built from grain oriented silicon steel laminations which keeps iron loses to minimum values.  The flux density is not allowed to rise to the saturation points point thus reducing output waveform distortion.
Linear type Roller servo withstand an overload of 20 times than normal current for a small period, which is a unique feature in itself.  The conventional ones will immediately burn in case of any overloading.
The efficiency of  Linear  Stabilizer at 75% load is more than 99%.
ADVANTAGES Linear type AUTOMATIC VOLTAGE CONTROLLER
In case, you find that your input voltage is higher even for few hours a day  then you can reduce failure rate of electrical equipments by installing Rolling contact linear S AVC & will have following advantages:
REDUCTION IN BREAKDOWN OF ELECTRICAL EQUIPMENTS:  60  80% reduction in breakdown of motors, contractor coils, bulbs, tubes etc. depending upon the Input Voltage variation and working hours of the plant.
ENERGY SAVING: With the installation of AVC, 5-10% power saving is certainly possible.  Power losses of any electrical equipment increase at low or high voltage.  With the stabilized voltage at 390-400 Volts, the extra losses generated due to low / high voltage can be considerably reduced that will automatically result in energy saving.
You will find from a table in our AVC catalogue that you can achieve power savings of up to 10% on motor load & 30% on lighting load, besides up to 60% reduction in breakdowns. 
REDUCTION IN MDI (Max Demand Indicator):  There will be definite reduction in MDI by 10  15% after the installation of an AVC.  MDI is a multiplication of voltage & current and is half an hour reading.  At higher input voltage, the current of electric motors also increases.  So, the MDI also increases.  For Example:
Consider a 10H.P.Motor
Suppose, current at 400 Volts    = 12 Amps
Current at 450 Volts                           = 14 Amps
MDI at 400 Volts = (400 x 12) / 1000 = 4.8 KVA
MDI at 450 Volts = (450 x 14) / 1000 = 6.3 KVA
% increase in MDI at 450 Volts as compared to 400 Volts = ((6.3  4.8)/ 4.8) x 100% = 31.25%
Even if the high voltage occurs for half an hour in a month, the MDI increases.  With the installation of the AVC, the voltage will be controlled and MDI will also be controlled.
IMPROVEMENT IN POWER FACTOR:  Whenever the voltage increases above 440 Volts, there is a sharp reduction in power factor at least by square function of voltage .At higher input voltage (i.e. >400 Volts), excitation current (No Load Current) of the industrial motors increases.  The power factor of no load current is normally (0.2).  So as the voltage increases, the excitation current also increases which further lowers the power factor. By maintaining constant voltage at 390/400 Volts with help of AVC, there will be definite improvement in power factor by 10-15%.
Uniform Quality of end Product& Increase in Throughput:  With stabilized input voltage to your sensitive production equipments, you can ensure that your production processes run consistently & continuously, without any interruption / aberration, thus ensuring uniform quality of end product as well as increase in output.
Depreciation allowance @ 80% as per Income Tax Act

PAY-BACK PERIOD:
Owing to the high efficiency of Rolling contact linear S AVC (> 99% in avg. running conditions)  payback period of Linear  AVC is normally within 6-12 months, depending upon the input variation and the number of working hours.      

Variacs Dimmer type  STABILIZERS


Torroidal Dimmers are used, wound with max. 8 mm² copper wire.  Cross-section area is 3 times lesser.  I²R losses are more.

Heat generated is more.  Size is bulky.  Quantity of oil is more.


Regulators are straight 254 volts type, remaining always in circuit. At any given point, it will contain its max. current.

Light duty carbon brushes are used which are in full contact with the winding.  Wear & tear requires change of brushes periodically.


Light duty. Suitable only for partial loads. 


Maximum life is 5-8  years if operating at full load.


Prone to damage when working on high capacity motors and jerking loads.  Double the capacity is required for such applications.

Overall efficiency max. 95%.  Running cost is high as the stabilizer will consume 5% energy itself. A 100 kVA stabilizer will consume approx. Rs.1,00,000 worth of energy per year (assuming 70% avg. running load for 24 hours a day, working 300 days a year).

Warranty 1  2 years.  AMC @ 10% of its value thereafter.




ROLLING CONTACT Lineae  STABILIZERS


Linear type regulators wound with min. 24 mm² copper strips.  Since the cross-section area is more, I²R losses are much less. (R =   L/A)

As the losses are less, heat generated is less.  The size of the stabilizer is very compact, the quantity of oil less. 

Regulators are ± 440 or ± 254 volts therefore half the capacity is sufficient.  At max buck or boost position, regulator is out of circuit.  No losses at those points.

Graphite Carbon roller assemblies are used, which do not require replacements for at least 8  10 years (or 100,000 meters of travel).  There is no wear & tear of the bared copper track.

Suitable for 100% continuous duty cycle.  Sufficient overload bearing capacity due to its liberal design.

Life at full load is 15  20 years.


No effect on jerking loads or with heavy starting current machines.  Same capacity Stabilizer can be installed.

Over all efficiency is 99% resulting in minimum running cost.  A 100 kVA stabilizer will consume only about Rs.20000/- worth of energy per annum (assuming 70% avg. running load for 24 hours a day, working 300 days a year).


Unconditional Guarantee for 5 years.  Service network all over the country.  Maintenance requirements are minimal & cost very nominal.

For any queries or clarification you can contact me at +91-9165234616 or TheBetterWorldindia@outlook.com

Monday, March 16, 2020

fight Corona and make a mask at your home

घर मे बना सकते हैं ऐसा मास्क, जिसे आप रोज धो भी सकते है।

 महंगा मास्क लेने से बचें और घर का अच्छा reusable मास्क प्रयोग करें।

Don't rush to purchase a N95 mask and be panic on shortage of 3Ply mask , because you can make a very useful and effective mask at your home with the help of your handkerchief and rubber band .

N95 मास्क खरीदने में जल्दबाजी न करें और 3Ply मास्क की कमी से घबराएं, क्योंकि आप केवल अपने रूमाल और रबर बैंड की मदद से अपने घर पर बहुत उपयोगी और प्रभावी मास्क बना सकते हैं। कृपया ये छोटा सा वीडियो देखें और समझें। 

https://youtu.be/FmOBfT5tk7g



🙏

How to Make an effective hand Sanitizer at your home , don't get panic with corona

हैंड सेनेटाइजर घर मे बनाएं  make a good Hand Sanitizer at your home
============
Hand sanitizer से कोरोना का वायरस मरता भी है या नहीं पता नहीं, लेकिन इसकी बिक्री बेहद बढ़ चुकी है market यानी बाजार में इसकी कमी है और है भी तो बहुत महंगे में बिक रहा है । टीवी पर आने वाले डॉक्टर गर्म पानी या नींबू के रस से हाथ धोना भी बता सकते थे हम ग़रीब देश के वासियों को लेकिन कोई बताएगा नहीं, क्योंकि यहाँ भी लोगों को प्रोडक्ट बिक्री करनी है।

दो रुपये का नींबू साथ रखिये, उसे थोड़ा सा ऊपर से काट लें। अब जब भी ज़रूरत हो उसकी कुछ बूंदें हाथ पर टपकाएं और उससे हाथ साफ करलें...
 यक़ीन कीजिए यह उतना ही असरदार है जितना कि 600 रुपये लीटर के टीवी स्क्रीन पर 99% जर्म्स मारने वाले ब्रांडेड हैंड सेनेटाइजर...

यकीन कीजिए ये बहुत असरदार होता है..
🙏🙏

Thursday, March 12, 2020

salute to Healthcare community

स्कूल बंद हो गए,
ऑफिस बंद हो गए,
मॉल खाली हैं,
समारोह तक रदद्,
उड़ानें थम गई,
अर्थव्यवस्था नीचे की ओर,
यहां तक ​​कि अंतरराष्ट्रीय सीमाएं भी बंद हो गईं ।
🤔🤔🤔
लोग एक-दूसरे को देखकर 
सहम जाते हैं, 
छूना भूल जाते हैं ।।
😰😰😰 ऐसा है कोरोना का डर...

लेकिन, 
अस्पताल अभी भी खुले हैं, ambulances चल रही हैं ,  वे  अभी भी रोगियों की जांच करने के लिए उन्हें छूते हैं, इलाज और रोकथाम में लगे हैं... ।
अगर आपको सर्दी, खांसी और बुखार है तो भी ये संकोच नहीं करते,
और न ही 3 मीटर दूर हट जाते हैं ...

एकमात्र समुदाय जो सबसे अधिक जोखिम में है, 
फिर भी अपने mission से पीछे नहीं हट रहा है....,

एक सलाम तो बनता है  स्वास्थ्यसेवा से जुड़े कर्मचारियों के नाम !
👍👍👍👍👍👍👍

Wednesday, March 11, 2020

kabhi kabhi yun bhi humne apne dil ko bahlaya hai, jin baton ko khud nahin samjhe auron ko samjhaya hai...

कभी कभी यूँ भी हमने अपने जी को बहलाया है,
जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया है...

हमसे पूछो इज़्ज़त वालों की इज़्ज़त का हाल कभी,
हमने भी इस शहर में रह कर थोड़ा नाम कमाया है..

उससे बिछड़े बरसों बीते लेकिन आज न जाने क्यों,
आँगन में हँसते बच्चों को बे-कारण धमकाया है..

कोई मिला तो हाथ मिलाया; कहीं गए तो बातें की,
घर से बाहर जब भी निकले दिन भर बोझ उठाया है...

-निदा फ़ाज़ली की लिखी और जगजीत सिंह की एक खूबसूरत ग़ज़ल Album: Visions (पर मैंने "रिश्तों में दरार आई" कैसेट में सुना है) , ये लाइनें आज एक मित्र ने भेजा और बहुत अच्छा लगा , काफी सुना है इस ग़ज़ल को कैस्सेट्स के ज़माने में, वो दौर अलग था, दुनिया भी अलग थी, 10-12 गाने होते थे एक cassette में और इतना सुनते थे की lyrics, tune और sequence भी याद हो जाता था...ये ग़ज़ल बहुत सरल और अर्थपूर्ण लगती थी और आज भी लगती है, और सोंचे तो हर कोई समझ और correlate कर सकता है....किसी को ग़ज़ल पसंद हो मगर ये नहीं सुन पाये हो तो ज़रूर सुनें आशा है आपको ज़रूर पसंद आयेगा...
(Copied from my Facebook wall 2017)

यकीन The Faith , The Belief

यकीन ( The Belief, The Faith ):

एक सुबह सर हेनरी फोर्ड अपने हाथ में एक कागज लेकर बैठ गए।उस कागज पर उन्होंने V8 इंजन का डिजाइन बनाया था।
फोर्ड ने फ़ौरन अपने इंजीनियरों की एक टीम को अपने कार्यालय में बुलाया और उनके साथ उस इंजन की रूपरेखा पर विचार करने लगे।

"सर। आठ-सिलेंडर वाला गैसोलीन इंजन ब्लॉक बनाना नामुमकिन काम है,” उनके एक अनुभवी इंजीनियर ने कहा।

"लेकिन इसे बनाओ," फोर्ड ने मजबूत आवाज में जवाब दिया।

"पर, आप समझ नहीं रहे हैं सर," उन्होंने उत्तर दिया, "यह बिल्कुल असंभव है!"

"इस काम पर तब तक जुटे रहो, जब तक इंजन बन नहीं जाता, चाहे कितना भी समय क्यों न लगे, मुझे यह इंजन तैयार चाहिए," फोर्ड ने मांग की।

उन्हें पूरा यकीन था कि वे अपनी योजना में निश्चित रूप से सफल होंगे।

फोर्ड की जिद्द सुनकर सभी इंजीनियर लोग घबरा गए।

कुछ लोग शिकायत करने लगे, “फोर्ड का दिमाग खराब हो गया है! उन्हें पता नहीं कि असंभव का क्या मतलब होता है! उन्होंने ये क्या मुसीबत खड़ी कर दी है, इंजन तैयार नहीं हुआ तो हमारी नौकरी चली जाएगी!

फिर उन्होंने बिना कुछ बोले इंजन पर काम करना शुरू कर दिया।

छह महीने बीते…

"क्या मेरी वी-8 मोटर तैयार है!" फोर्ड ने आकर पूछा…

नौ महीने बीत गए ...

तब भी इंजन तैयार नहीं हो पाया था।

इंजीनियरों ने हर तरह से दिमाग दौड़ाया, लेकिन यह काम अभी भी 'नामुमकिन' लग रहा था।

साल के आखिर में, सर फोर्ड ने अपने इंजीनियरों का दौरा किया, तब भी इंजीनियरों ने उन्हें यही बताया कि यह काम नहीं हो पाएगा।

" कोशिश करते रहो", फोर्ड ने कहा, "मुझे हर हाल में यह इंजन तैयार चाहिए!"

इंजीनियरों के पास कोई दूसरा चारा नहीं था। वे महीनों तक कड़ी मशक्कत करते रहे, तब तक, जब तक कि 'वी -8' नामक प्रसिद्ध इंजन बनाने का रहस्य खोज नहीं लिया गया और 1932 में पहली फोर्ड वी-8 कार लांच हो पाई।

"कौन सा एक कारक है, जो यह निर्धारित करता है कि कोई व्यक्ति जीवन में सफल होगा या नहीं?"

उत्तर है- 'यकीन'।

यकीन या विश्वास के बिना सफलता असंभव है।
सब कुछ यकीन के साथ शुरू होता है।
अगर आपको 'यकीन 'है कि आप सफल हो पाएंगे तो आप निश्चित रूप से होंगे, अगर 'यकीन 'नहीं है तो आप कभी सफल नहीं हो सकते।

womens day! salute to the women

जिस दिन औरतें अपने श्रम का हिसाब माँगेंगी उस दिन मानव इतिहास की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी चोरी पकड़ी जाएगी।
~ रोजा लग्जमबर्ग


On the day women ask for their labor, the biggest and oldest theft in human history will be caught.
~ Rosa Luxembourg


Sunday, February 23, 2020

पुराना PF निकालना :

navbharat timesनई दिल्ली
ऐसा कई लोगों के साथ होता है कि अलग-अलग संस्थानों में काम करने के दौरान अलग-अलग पीएफ अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी वजह से कई बार उनका पुराना पीएफ अकाउंट इन-ऑपरेटिव हो जता है। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो नौकरी के बीच में विदेश जाते हैं और वहीं कंटिन्यू करते हैं। इस परिस्थिति में भी पुराना पीएफ अकाउंट इन-ऑपरेटिव हो जाता है
घर बैठे होगा काम: 
इन-ऑपरेटिव अकाउंट को ट्रैक करना थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं है। यह काम घर बैठे ऑनलाइन किया जा सकता है। एकबार अकाउंट ट्रेस हो जाने के बाद इसमें जमा राशि ट्रांसफर की जा सकती है या फिर निकाली जा सकती है।

क्या होता है इन-ऑपरेटिव अकाउंट?
अगर किसी अकाउंट में तीन साल (36 महीने) तक कुछ जमा नहीं होता है तो इसे इन-ऑपरेटिव माना जाता है। 1 अप्रैल 2011 के बाद से सरकार ने ऐसे अकाउंट में जमा राशि पर इंट्रेस्ट देना बंद कर दिया है। एक डेटा के मुताबिक, मार्च 2014 तक EPFO के इन-ऑपरेटिव अकाउंट में 27000 करोड़ रुपये जमा थे। नियम के मुताबिक अगर इन-ऑपरेटिव अकाउंट पर अगर 7 साल तक दावा नहीं किया गया तो सरकार इसे सिनियर सिटिजन के लिए वेलफेयर फंड में डाल देती है।


कैसे ट्रेस करें अकाउंट?
पहले पीएफ की वेबसाइट www.epfindia.gov.in पर जाना है। यहां इन-ऑपरेटिव अकाउंट हेल्पडेस्क ऑप्शन को चुनना है। शिकायत बॉक्स में अपनी समस्या के बारे में पूरी जानकारी देनी है। बाद में आपसे निजी जानकारी मांगी जाएगी, मसलन नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जन्मदिन, पति या पिता का नाम, एंप्लॉयर नेम। इन तमाम जानकारी की मदद से आपका अकाउंट आसानी से ट्रेस हो जाएगा। अकाउंट ट्रेस होने के बाद फंड निकाला जा सकता है या ट्रांसफर किया जा सकता है।

Reference: Published by:  |  | Updated: 10 Feb 2020, 02:52:00 PM

Saturday, February 22, 2020

mobile charging's Science type c port advantages

USB Type C port: 

 आजकल के नए जितने भी स्मार्टफोन आ रहे हैं सभी में टाइप सी पोर्ट दिया जा रहा है तो इसका मुख्य कारण और कुछ फ़ायदा है।

आजकल लोगों को सबकुछ तेजी से चाहिए, चाहे फोन चार्ज हो या डाटा स्पीड और यही type C पोर्ट का मुख्य फायदा है। 

मोबाइल में टाइप सी पोर्ट देने के फायदे-
यूएसबी टाइप सी में डाटा तेज गति से ट्रांसफर होता है।

यूएसबी टाइप सी पोर्ट को लगाते समय उल्टा है या सीधा यह देखना नहीं पड़ता है जो कि typeB (जिसे micro USB भी कहते है) में देखना पड़ता है क्योंकि इसके नीचे दो hook होते हैं ।  

यूएसबी टाइप सी पोर्ट में एक ही पोर्ट से कई सारे काम कर सकते हैं जैसे-फोन चार्ज करना , डाटा ट्रांसफर करना (  5Gbps to 10Gbps की स्पीड तक)तथा इयरफोन से गाना सुनना (नोट : इयरफोन से गाना सुनने के लिए आपको इयरफोन में टाइप सी वाला जैक भी होना चाहिए , जल्द ही इंडियन मार्किट में ये दिखने लगेगा)

  टाइप सी पोर्ट में जल्दी चार्जिंग होने की मुख्य वजह इसकी  20 Volt/100Watt तक की पावर सप्लाई की क्षमता रहती है जो पुराने USB type B में नहीं थी। पर इसके लिए यह फास्ट चार्जिंग का फीचर आपके फोन में दिया होना चाहिए तभी तेजी से चार्ज होगा।

अगर 2 फोन टाइप सी पोर्ट वाले हैं तो एक से दूसरे फोन को चार्ज भी कर सकते हैं। 

अभी transition पीरियड है और अगले कुछ महीनों/सालों में type C और भी ज्यादा कॉमन हो जाएगा।

Technical Specifications of USB Type C

Type-C supports USB 3.1 and offers a top speed of 10 Gbps for transferring data. It also boasts a much higher power output of up to 20 Volts (100 W) and 5 Amperes. It should be noted that regular laptops usually have a power consumption in the range of 40-70 Watts, which means that Type-C easily covers their power requirements. Another functionality that Type-C offers is bi-directional power; in other words, it means that you can not only charge your smartphone through your laptop, but also the other way around!

Credit: Yuriy Vlasenko/Shutterstock

Credit: Yuriy Vlasenko/Shutterstock

Type-C has already received rave reviews from users all over the world, and has been rolled out in some major electronic devices, including the Chromebook Pixel, 1+2 and Nexus 6P (smartphones) and the Nokia N1 (tablet).

It’s almost a certainty that in the coming years, every electronic device will support Type-C. Think how easy and convenient dealing with electronic devices will become; all you will need is a single Type-C cable, allowing you to finally eliminate that tangled mess of cables jammed in your desk.


Also suggested article is:

https://www.memorysuppliers.com/blogs/memory-suppliers-blog/guide-to-the-differences-between-mini-usb-micro-usb-and-usb-c



Monday, February 17, 2020

WHAT DO I POST ON SOCIAL MEDIA? as a startup


*WHAT DO I POST ON SOCIAL MEDIA?*
When a start-up Starts up on social media then this big question arises..

The number one question people ask when it comes to social media marketing.

The interesting thing here is that there’s really an endless amount of ideas for you to use when it comes to posting on social media.

Before you skip this and jump down to the list, here’s a few tips to get the most impact out of these ideas:

1. Make it RELEVANT for your audience.

For Example:

If you choose to share something from your bucket list…

Can you relate it back to your business?

Can you add in an open ended question so it sparks people to engage?

2. Talk TO your audience, don’t talk AT them. This is social media. People are looking for stories and posts that they connect with. If you’re not wording posts socially, you close the door for engagement.

For Example:

DON’T DO THIS: I read a quote this morning, liked it, and wanted to share it with you.

DO THIS: Have you ever read a quote and thought, “Wow, I really needed to hear that?” Well I found one this morning that was so perfect, I had to pass it on to you. It’s a difference in the way you talk with people. I promise, you’ll see a difference in how people respond when you word things just a little differently.

3. EVERYTHING you post should ALWAYS support your weekly, monthly, annual marketing and business goals.

Don’t just “post to post” – post with purpose.
Post to connect.
Post to learn more about your audience.
Post to start a conversation.
Post to get leads.
Post to drive traffic.
Post to build your business.

The more you do this, the faster you reach your goals.

RELATED:  FREE WEEKLY SOCIAL MEDIA PLANNERS

4. Use TASSI. It’s a social media management tool that gives you content. You will never run out of ideas, or content, since you can choose from thousands of ready made content just waiting for you to drop your logo on it and make it your own.

Now, save this post so you never run out of ideas again!

*70 KILLER CONTENT IDEAS TO POST ON SOCIAL MEDIA:*

1. Remind People Who You Are, How You Got Started
2. Go Behind The Scenes
3. Share a Personal Story
4. Tell People What You Sell
5. Share a Joke (Graphics or Text)
6. Share a Quote (Graphics or Text)
7. Host an #AMA (Ask Me Anything)
8. Â Post a How To or Tutorial
9. Ask a Question
10. Host a Poll
11. Share Your Favorite Book
12. Ask for Recommendations (Book, TV, Apps, Music, Something related to your biz)
13. Host a Giveaway
14. Tell People to Sign Up On Your Email List
15. Give away a coupon
16. Host a Sale
17. Remind People To Buy Your Products or Services
18. Share a Quick Tip
19. Share Industry News (Add Your Thoughts To It)
20. Go LIVE (Live Videos Perform AMAZINGLY WELL)
21. Post a Sneak Peek of something coming soon
22. Share a Blog Post You Wrote
23. Share Any Press or PR Features You Have
24. Post a Testimonial From a Client
25. Give Your Audience A Gift
26. Re-Share Some Older Content (Graphics, Quotes, Blog Posts)
27. Host a 1 Day Only Flash Sale
28. Share Content From Someone Else
29. Let Someone Guest Post or Takeover Your Profile
30. Post a Case Study
31. Answer FAQ’s
32. Share Some Personal Wins or Results
33. Host an Interview with a Guest
34. Post Something Seasonal or Highlight a Holiday
35. Thank Your Fans!
36. Post Motivational Monday
37. Post a Tuesday Tip
38. Post a Wednesday Wisdom
39. Post a Throwback Thursday
40. Post a Flashback Friday
41. Share a Short Video Clip (Yours or one you like)
42. Share a podcast episode you love
43. Share a YouTube video you love
44. Post some interesting stats or data about your industry
45. Share your favorite resources (Apps, Websites, Blogs)
46. Share a WIN or SUCCESS
47. Share a LOSS or a FAILURE
48. Share Your Morning Routine
49. Post about events you’re hosting or going to
50. Post where you’ll be speaking or where you’re making appearances
51. Share an Unknown Feature About Your Products or Services
52. Let Your Employee Take Over For a Day
53. Show someone using your product
54. Post a discount or a special offer
55. Tell People How You Got Started
56. Share What Inspired You To Create Your Product or Service
57. Shoutout or Mention Other Brands
58. Shoutout or Mention Your Clients
59. Share a Success Story
60. Share a Few Of Your Favorite Things
61. Post a Fill In The Blank
62. Talk about Mistakes People Are Making
63. Share a Tweet You Like
64. Share a Pinterest Pin You Like
65. Share Your Other Social Profiles to Connect On
66. Share Your Contact Info
67. Post About A Trip You’ve Taken
68. Share a Charity You’ve Partnered With
69. Post About Something On Your Bucket List
70. Ask Your Audience How They Found You





Writer: Kat Sullivan :
Kat Sullivan is the CEO & Founder of Marketing Solved and Co-Founder of TASSI. The Automated Social Software Inc. She has worked with and successfully coached over 11,000 business owners. Kat has been recognized as the social..

Sunday, February 16, 2020

जो भी मैं कहना चाहूँ , बर्बाद करें अल्फ़ाज़ मेरे...

कुछ फिल्मी गाने और ग़ज़ल देर से समझ आये जैसे कि मिर्ज़ा ग़ालिब के गाने और बहुत सी जगजीत की ग़ज़लें...पर जब शब्दों और लाइनों के अर्थ समझ आये तो फिर वो गीत बहुत अच्छे लगे, दिल के ज्यादा करीब रहे और सालों साल याद रहे....
कुछ वर्षों से शिकायत रही है कि आजकल गानों में केवल बीट्स और शोर ज्यादा होता है, गानों के बोल पहले की तरह स्तरीय नहीं होते। पर कुछ गाने आज भी आते हैं जिनके बोल बेहद खूबसूरत होते हैं....आज जिस गाने की बात कर रहा हूँ उसके बोल बेहतरीन हैं...
पहले ऐसा भी हुआ है कि गाने के बोल बेहद संजीदा थे , सूफियाना भी , पर बीट्स इतने हावी हुए की लोगों ने मतलब पे ध्यान ही नहीं दिया ,  बस गाने में झूमते नाचते ही रहे..ऐसा हो एक गाना है .. 
एक फ़िल्म थी 'दिल से' इसका एक गाना था:
 चल छइयां छइयां....सुखविंदर सिंह को इस गाने ने हिंदी फिल्मों में रिलॉन्च किया है , उन्हें एक नयी पहच्चान मिली , और इस गाने के बाद वो हाई पिच गायकी के सरताज बने...
इसका म्यूजिक रहमान ने दिया था और पूरा देश और देशवाले इसपे नाच भी लिए, एक फेमस डांस नम्बर है ये, आज भी इसकी म्यूजिक सुनकर सबके पैर थिरक जाते हैं । पर छइयां छइयां गाने का अर्थ शायद बहुत कम ही लोगों को पता है..सोंचियेगा एक बार की इस गाने का अर्थ क्या है???..  दरअसल गुल्ज़ार ने एक फोक सांग से इसकी लिरिक्स चुराई है...मतलब प्रेरणा लेकर लिखी है...इतने बड़े शख्स पे चोरी का इल्जाम ठीक नहीं..छइयां छइयां की और  बात फिर कभी ...

आज इरशाद कामिल का लिखा रॉकस्टार का ये गाना..पढियेगा , समझियेगा और फिर सुनियेगा ...आशा है पसंद आएगा...

जो भी मैं कहना चाहूँ , 
बरबाद करें, अल्फ़ाज़ मेरे..

(Whatever I want to say, My words destroys its real meaning...)

कभी मुझे लगे कि जैसे,
सारा ही ये जहाँ है जादू,
जो है भी, और नहीं भी है:  ये
फ़िज़ा, घटा, हवा, बहारें 
मुझे करे इशारे, ये
कैसे कहूँ कहानी मैं इनकी..

Sometimes I feel like, This whole world is magical, Whatever is there, is not there:  Breeze, clouds, wind, spring,They are all making signs to me, How should I tell you their story...


मैने ये भी सोचा है अक्सर : 
तू भी, मैं भी, सभी हैं शीशे , 
ख़ुद ही को हम सभी में देखें,
नहीं हूँ मैं, हूँ मैं तो फिर भी, 
सही-ग़लत तुम्हारा मैं, 
मुझे पाना, पाना है ख़ुद को..

I've often thought that, You, me, we all are mirrors, We see ourselves in everyone, We see ourselves in everyone, Right or wrong, I'm yours, If you find me, you'll find yourself..

Lyrics : irshad Kamil
Music: A R Rehman
Singer: Mohit Chauhan

One can watch via this youtube link : 
https://youtu.be/_kOzFMR9Hys

मोहित चौहान को सबसे पहले उनके बैंड सिल्क रुट के गाने डूबा डूबा रहता हूँ ...से सब जानते हैं..बहुत से हिट फिल्मी गाने उन्होंने गाये हैं..,उनके कुछ एक गाने बहुत पसंद हैं जैसे कि :
गूंचा कोई मेरे नाम कर दिया, साक़ी ने फिर से मेरा जाम भर दिया...
तुमसे ही ....जब वी मेट
आदि..

Wednesday, February 12, 2020

friends & family or the Celebrities what you will choose? मित्र और परिवार या फिर सेलेब्रिटी इनमे से एक को चुनना हो तो क्या चुनेंगे आप???

अगर कोई पूछे कि : 

*आप किसी सेलिब्रिटी को सहयोग देना चुनेंगे या फिर किसी अपने दोस्त या परिवार वाले को सहयोग देना चुनेंगे ??*

आपका जवाब निश्चित तौर पे यही होगा कि : अपने परिवार या दोस्त को सहयोग देंगे। ...ये भी कोई पूछने वाली बात है ...किन्तु इस प्रश्न पर इस मैसेज को पढ़ने के बाद दोबारा ज्यादा ईमानदारी से गौर करियेगा...plz 🙏🙏🙏

आमतौर पर होता ये है कि अगर *ऐश्वर्या राय* किसी साबुन को प्रमोट करे, तो हम लोग ख़रीद लेते हैं,
*शिल्पा शेट्टी* किसी ब्रेकफ़ास्ट को प्रमोट करे, तो हम लोग ख़रीद लेते हैं,
*ह्रितिक रोशन* टीवी पे कोई Deo लगाए, तो हम लोग वो ले आते हैं,
*जॉन अब्राहम* कोई हैल्थ ड्रिंक प्रमोट करे, तो हम लोग उसे पीने लग जाते हैं!

ऐसे *अनगिनत उदाहरण* हैं...हैं न ? 

*लेकिन.. लेकिन.. लेकिन..*

अगर हमारा कोई *दोस्त या रिश्तेदार* कोई नया बिज़नेस शुरू करे तो *हम लोग नहीं लेते।* हम कहते हैं *"इस पर रिसर्च करूँगा"* या *"महँगा है"!!*

है न ?? 

*क्यों हम जल्दी से उन्हें सपोर्ट करते हैं जिन्हें हम ठीक से जानते तक नहीं, जिनके पास पहले ही अथाह पैसा है???* जिनके किसी उत्पाद के साथ जुड़ने पर उस उत्पाद की गुणवत्ता  नहीं , बल्कि बाजार में उस उत्पाद की  कीमत बढ़ती है , जिसकी भरपाई अधिक कीमत देकर आप यानी ग्राहक ही चुकाता है।

जबकि *हमारे पास हज़ारों कारण होते हैं किसी सेलिब्रिटी के बदले किसी अपने के साथ सहयोग करने के लिए...*

 जिसे *हम जानते हैं और जो हमारी तरह ही साधारण जीवन जी रहा है!*
जब आप ऐसे किसी अपने जानकार को *सपोर्ट* करते हैं तो आप *अपने जैसे ही किसी साधारण व्यक्ति को आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का मौका देते हैं।*
बजाय इसके की  किसी  *सेलिब्रिटी* के *अंतहीन बैंक बैलेंस और संपत्ति को* को और बढ़ाने का काम करते हैं।....

पर वास्तविकता कड़वी है...

*अपनी सोच बदलिये,* अपने मित्रों और पहचान वालों को *सबसे पहले*  सहयोग और Support कीजिये..

/सोंच बदलिए, कर्म बदलिए, दुनिया बदलिए../

आज एक औपचारिक सुप्रभात नहीं कहुंगा, बल्कि आज अनुरोध करूँगा की आप किसी अपने की सुबह को शुभ बनाइये.. *वास्तविकता को बेहतर बनाइये...please..* सहमत हों  तब भी फारवर्ड मत करिए.... पहले अपने स्वयं के व्यवहार में बदलाव लाइये , खुद एक अच्छा उदाहरण बनिये ...

🙏🏻🌈💐


If someone ask this question : 
Question) What you will choose Celebrity or Family & Friends ?

Your answer would be definitel : Family & Friends.....Is this a question to be Asked?? 

But really it is ????? Think on this again , honestly after reading this messege....Please..🙏🙏🙏🙏🙏
 
Because 

*If Aishwarya Rai Promotes a soap, we buys it. Shilpa Shetty promote a breakfast, we buys it...*
If we see Hrithik Roshan puts a Deo on a TV commercial, then we bring it, tries it..
*If John Abraham*  promotes a health drink, then we start drinking it!

There are *countless* examples where a celebrity like Amitabh Bachhan, Salman Khan , SRK, Ranveer Kapoor, Deepika Padukon, Tiger Shroff, Virat Kohli, Dhoni or Tendulkar  commercially promotes  something and people (means I, we, YOU) buys it...

*But ..But ..But :*

If any of our friends or relative start a new business, we don't take it in that positive manner.

 We thinks and say: 
 " I'll do research on it. "
 or " It is expensive !! "

*Why do we quickly supports those celebrity (associated big brands who have a lot of money) over our struggling & needy friends and relatives???*

.....While we have many  reasons to give priority to our friends & family over this celebritie's commercial advice....

Despite of that we know  who is leading a simple life like us, We give wrong priority when buying something.

When you *supports* such a knowledgeable person like 'yourself' you not only buys something but also give a chance that struggling entrepreneur to move forward and become self-sufficient, in lieu of increasing the endless bank balance of any  celebrity and brands.

Its time to break the trap and Change your mind, change the world and  Support your friends and acquaintances..

So remember :
Change your mind,
Change your acts,
Change the world....

I Will not say a formal good morning today , I'd like to request to make someone's morning good today...please!!

*Make the reality better ... please ..* Do not forward this even if you're agree .... Firstly  change your own behaviour, be a good example yourself 1st...

🙏🌈💐

Manners Etiquettes Tips सद्व्यवहार के टिप्स

Manners यानि कि अच्छे संस्कार.....: 

1. *लगातार दो बार से अधिक किसी को कॉल न करें*। यदि वे आपकी *कॉल नहीं उठाते हैं, तो मान लें कि इस वक्त उनके पास कुछ ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य है।*

2. वह *उधार पहले लौटाएँ* जो दूसरे व्यक्ति के याद दिलाने या माँगने से पहले ही लिया हो। *यह आपकी ईमानदारी और चरित्र को दर्शाता है*।

3. जब कोई आपको लंच / डिनर दे रहा हो तो कभी भी *मेनू पर महंगे पकवान का ऑर्डर न करें।* यदि *संभव हो तो उन्हें ही आपके लिए अपनी पसंद का ऑर्डर* करने के लिए कहें।

4. ओह! *'तो आपने अभी तक शादी नहीं की है'? या अरे! 'क्या आपके बच्चे नहीं हैं’ जैसे अजीबो गरीब सवाल नहीं पूछें।*
'आपने घर क्यों नहीं खरीदा'? या 'आप कार क्यों नहीं खरीदते'? *यह आपकी समस्या नहीं है*।

5. अपने *पीछे आने वाले व्यक्ति के लिए हमेशा दरवाजा खोलें*।  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह लड़का है या लड़की, सीनियर है या जूनियर। आप सार्वजनिक रूप से प्रत्येक के साथ *अच्छा व्यवहार करें*।

6. यदि आप किसी दोस्त के साथ टैक्सी लेते हैं, और वह अभी भुगतान करता है, तो *अगली बार आप भुगतान करने का प्रयास करें*।

7. *विभिन्न प्रकार के विचारों का सम्मान करें*।  याद रखें कि आपके लिए जो 6 दिख रहा है वो सामने से आने वाले लोगों को 9 दिखाई देगा।

8. लोगों से बात करते समय बीच में कभी *बाधा न डालें*। उन्हें अपनी बात कहने की अनुमति दें। 

9. यदि आप किसी को चिढ़ाते हैं, मजाक या हंसी ठिठोली करते हैं, किन्तु वे इसका आनंद नहीं लेते हैं, *तो इसे रोकें और फिर कभी ऐसा न करें*। 

10. जब कोई आपकी मदद कर रहा हो तो *"धन्यवाद" जरूर कहें।*

11. *सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करें*!  जरूरी हो तभी *आलोचना करें, वो भी निजी तरीके से*।

12. किसी के वजन , रूप रंग, आदि पर असम्मानजनक टिप्पणी करने का कभी कोई मतलब नहीं है। *हमेशा कहें, "आप शानदार दिखते हैं*।"

13. जब कोई आपको अपने मोबाईल पर एक फोटो दिखाता है, तो *स्वयं उसके मोबाइल पर बाएं या दाएं स्वाइप न करें*।  आपको नहीं पता कि आगे उसका निजी फोटो है।

14. यदि कोई सहकर्मी आपको बताता है कि उसे डॉक्टर से मिलना है, तो *यह न पूछें कि किस लिये मिलना है?*, बस कहें "मुझे आशा है कि आप ठीक हैं"।  अपनी व्यक्तिगत बीमारी बताने के लिए उन्हें असहज स्थिति में न डालें।

15. अगर *आप अपने से नीचे पद प्रतिष्ठा के लोगों के साथ सम्मान* के साथ अच्छे से व्यवहार करते हैं तो लोग नोटिस करेंगे।

16. यदि कोई व्यक्ति आपसे सीधे बात कर रहा है, तो अपने *फोन को देखना अशिष्टता है*;

17. जब तक आप से नहीं पूछा जाये तब तक कभी भी *बिन मांगे सलाह न दें*;

18. जब किसी से लंबे समय के बाद मिल रहे हों तो, जब तक वे इसके बारे में बात न करें, तब तक उनसे उनकी *उम्र और वेतन न पूछें*।

19. अपने *काम से काम रखें*

20. अपने *धूप के चश्मे को हटा दें* जिस समय आप किसी से सड़क पर बात कर रहे हैं, यह सम्मान की निशानी है। *नेत्र संपर्क* आपके भाषण में महत्वपूर्ण है।

21. *आर्थिक कमज़ोरों के बीच* में अपने *धन के बारे में गर्वानुक्ति के साथ* कभी *बात न करें*।

22. *और अंत में...इस मैसेज को किसी को फारवर्ड मत करें प्लीज़🙏*,  इन बातों को पहले खुद के सोंच , कर्म, व्यवहार में शामिल करें। क्योंकि समस्या ये नहीं हैं कि ज्ञान या जानकारी नहीं है, बल्कि समस्या ये है कि ज्ञान केवल फारवर्ड हो रहा है , सोंच और व्यवहार में इसका पालन नहीं हो रहा है।

पहले अपने स्वयं के व्यवहार में लाएं फिर इस  पोस्ट को कहीं और  साझा करें।
*अच्छाई फैलाएं,  कचरा नहीं।*

आइये एक बेहतर दुनिया बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं!

Lets move towards The Better World... 🌈🌐
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Tuesday, February 11, 2020

support friends and family over celebrity and brands

If Aishwarya Rai Promote a soap, we buys  it, Shilpa Shetty promote a breakfast, we buys it...
If we see Hrithik Roshan puts a Deo on a TV commercial, then we bring it, tries it..
If we see John Abraham  promotes a health drink, then we start drinking it!

There are countless examples where a celebrity like Amitabh Bachhan, Salman Khan , SRK, Ranveer Kapoor, Deepika Padukon, Tiger Shroff, Virat Kohli, Dhoni or Tendulkar  commercially promotes  something and people (means we) buys it...

But ..But ..But :
If any of our friends or relative start a new business, we don't take it in that positive manner. We thinks and say:
" I'll do research on it. "
or " It is expensive !! "

Why do we quickly supports those celebrity associated big brands who have a lot of money, over our struggling & needy friends and relatives???

-While we have many reasons to give priority to our friends & family over this celebritie's commercial advice..to support Whom we know personally and who is leading a simple life like us!

When you supports such a knowledgeable person, you give someone ( like 'yourself') a chance to move forward and become self-sufficient, Not to increase the endless bank balance of any greedy celebrity and brands.

your friends and acquaintances..

Change your mind,
Change your acts,
Change the world....
And support your friends, families and acquaintances....

I Will not say a formal good morning today , I'd like to request to make someone's morning good today...please!!

🙏🏻🌈💐


ऐश्वर्या राय किसी साबुन को प्रमोट करे, तो हम लोग ख़रीद लेते हैं,
शिल्पा शेट्टी किसी ब्रेकफ़ास्ट को प्रमोट करे, तो हम लोग ख़रीद लेते हैं,
ह्रितिक रोशन tv pe कोई Deo लगाए, तो हम लोग वो ले आते हैं,
जॉन अब्राहम कोई हैल्थ ड्रिंक प्रमोट करे, तो हम लोग उसे पीने लग जाते हैं!

ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं..

लेकिन.. लेकिन.. लेकिन..

अगर हमारा कोई दोस्त या रिश्तेदार कोई नया बिज़नेस शुरू करे तो हम लोग नहीं लेते। हम कहते हैं "इस पर रिसर्च करूँगा"* या "महँगा है"!! 

क्यों हम जल्दी से उन्हें सहयोग करते हैं जिन्हें हम ठीक से जानते तक नहीं, जिनके पास पहले ही अथाह पैसा है??? जिनके किसी उत्पाद के साथ जुड़ने पर उस उत्पाद की गुणवत्ता नहीं बल्कि बाजार में उस product की कीमत बढ़ती है। और इस बढ़ी हुई कीमत की भरपाई के लिए ग्राहक यानी कि आप ही अधिक कीमत देकर चुकाते हैं।

जबकि हमारे पास हज़ारों कारण होते हैं किसी सेलिब्रिटी के बदले किसी अपने के साथ सहयोग करने के लिए...किसी ऐसे का support करने के लिए जिसे हम जानते हैं, और जो हमारी तरह ही साधारण जीवन जी रहा है!

जब आप ऐसे किसी अपने जानकार को सपोर्ट करते हैं तो आप अपने जैसे ही किसी साधारण को आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का मौका देते हैं।
न कि किसी सेलिब्रिटी के अंतहीन बैंक बैलेंस और संपत्ति को और बढ़ाने का काम करते हैं।

अपनी सोच बदलिये, अपने मित्रों और पहचान वालों को सबसे पहले  सहयोग और Support कीजिये..

/   सोंच बदलिए,    कर्म बदलिए,      दुनिया बदलिए../

आज एक औपचारिक सुप्रभात नहीं कहुंगा, बल्कि आज अनुरोध करूँगा की आप किसी अपने की सुबह को शुभ बनाइये..please!!!

🙏🏻🌈💐